Negative Energy on Holi: क्या सच में जागती हैं काली शक्तियाँ? जानिए डर और सच्चाई का पूरा सच!
Negative Energy on Holi: होली यानी रंग, उमंग और खुशियों का त्योहार। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि होली की रात, खासकर होलिका दहन के समय, नकारात्मक शक्तियाँ ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं? कई जगहों पर आज भी लोग इस रात को लेकर थोड़ा सतर्क रहते हैं। कुछ इसे आध्यात्मिक ऊर्जा का समय मानते हैं, तो कुछ इसे अंधविश्वास कहते हैं।
Spiritual Energy on Purnima: क्यों मानी जाती है खास?
होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी पूरी रोशनी के साथ आकाश में चमकता है। लोक मान्यताओं के अनुसार इस समय वातावरण में ऊर्जा का स्तर बहुत अधिक होता है।
कुछ लोग मानते हैं कि ऐसी रातों में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जाएँ सक्रिय हो जाती हैं। हालांकि विज्ञान इसे प्राकृतिक खगोलीय घटना मानता है, लेकिन सदियों से चली आ रही मान्यताओं का असर आज भी लोगों के मन में है।
Holashtak Effects: आठ दिन क्यों माने जाते हैं संवेदनशील?
होली से आठ दिन पहले का समय “होलाष्टक” कहलाता है। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक कई परिवार शुभ कार्य जैसे शादी या गृह प्रवेश टाल देते हैं।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन दिनों ग्रहों का प्रभाव उग्र माना जाता है। इसी कारण लोग इन दिनों को थोड़ा सावधानी भरा समय मानते हैं। हालांकि यह पूरी तरह धार्मिक आस्था पर आधारित है।
Holika Dahan : बुराई पर अच्छाई की जीत
पौराणिक कथा के अनुसार इसी रात भक्त प्रह्लाद की रक्षा हुई और होलिका अग्नि में भस्म हो गई। यह घटना अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक है।
लेकिन लोक कथाओं में एक और बात कही जाती है—जब कोई बड़ी आसुरी शक्ति समाप्त होती है, तो उसके आसपास नकारात्मक ऊर्जाएँ भी सक्रिय हो जाती हैं। शायद इसी वजह से होलिका दहन की रात को रहस्यमयी माना जाता है।
असल में होलिका दहन का संदेश है—अपने भीतर की बुराइयों को जलाना।
Black Magic: टोटके और सावधानियां
ग्रामीण इलाकों में होली की रात चौराहों पर नींबू, सरसों के दाने या मिठाई रखी दिखाई देती है। लोग इसे टोटका मानते हैं।
कुछ लोग होलिका की राख को घर लाकर शुभ मानते हैं। वे इसे बुरी नजर से बचाने वाला मानते हैं। वहीं कई लोग इस रात सुनसान जगहों या श्मशान के पास जाने से बचते हैं।
सवाल यह है—क्या सच में ऐसा कुछ होता है? या यह सब मन का डर है?
भारत की कुछ रहस्यमयी जगहें
देश में कुछ स्थान ऐसे हैं जिनका नाम तंत्र-मंत्र और काला जादू से जोड़ा जाता है। असम का मायोंग गांव, वाराणसी के श्मशान घाट, ओडिशा के कुछ नदी किनारे और हैदराबाद के पुराने इलाके—इन जगहों को लेकर कई कहानियाँ प्रचलित हैं।
कहा जाता है कि पुराने समय में मुगलों और अंग्रेजों को भी कुछ इलाकों में जाने से डर लगता था। हालांकि आज के समय में काला जादू और टोना-टोटका कानूनन अपराध है।
मनोविज्ञान क्या कहता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी रात या समय को पहले से ही रहस्यमयी बताया जाता है, तो हमारा मन उसी तरह प्रतिक्रिया देने लगता है।
मौसम बदलने का समय भी होता है। शरीर और मन में हल्का उतार-चढ़ाव महसूस होता है। कई बार हम इन बदलावों को रहस्यमयी ऊर्जा मान लेते हैं।
असली संदेश: डर नहीं, सकारात्मकता अपनाएं
होली का त्योहार हमें डराने के लिए नहीं है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपने भीतर की नकारात्मकता—अहंकार, ईर्ष्या और बुरे विचारों—को आग में जलाना चाहिए।
अगर हम इस असली संदेश को समझ लें, तो किसी भी “काली शक्ति” से डरने की जरूरत नहीं।
होली की रात रहस्यमयी जरूर लग सकती है, लेकिन असली शक्ति हमारे विश्वास, समझदारी और सकारात्मक सोच में है।
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