पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में डूबने से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई।
Software engineer death: उत्तर प्रदेश के नोएडा में शनिवार रात एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया, जिसने न सिर्फ एक परिवार की खुशियां छीन लीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर कर दिया। सेक्टर-150 इलाके में पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में डूबने से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई। हादसे के बाद अब वहां आनन-फानन में 16 लोहे की बैरिकेडिंग लगा दी गई हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये इंतजाम किसी की जान जाने के बाद ही किए जाते हैं?
खौफनाक मंजर और एक आम आदमी की बहादुरी
Software engineer death मामले में सबसे ज्यादा चर्चा फ्लिपकार्ट में काम करने वाले डिलीवरी एग्जीक्यूटिव मोनिंदर की हो रही है। मोनिंदर वही शख्स हैं, जिन्होंने कड़कड़ाती ठंड और जान का जोखिम उठाते हुए उस खतरनाक गड्ढे में छलांग लगाई, ताकि युवराज को बचाया जा सके। मोनिंदर की आंखों में आज भी उस रात का डर, गुस्सा और दर्द साफ झलकता है।
उनके मुताबिक, जब वह मौके पर पहुंचे, तब तक प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीमें वहां मौजूद थीं। युवराज अपनी कार की छत पर लेटा हुआ था और मोबाइल की टॉर्च जलाकर मदद की गुहार लगा रहा था। मोनिंदर बताते हैं, “फायर ब्रिगेड के पास सीढ़ी थी, सेफ्टी जैकेट थी, लेकिन वे किनारे खड़े तमाशा देखते रहे। उन्होंने मुझसे कहा कि तुम पानी में उतर जाओ। मैं कूद गया, लेकिन सवाल यह है कि वे पहले से वहां थे, उन्होंने कोशिश क्यों नहीं की?”
‘अगर सिस्टम चाहता, तो जान बच सकती थी’
मोनिंदर का आरोप है कि प्रशासन की सुस्ती और डर ने युवराज की जान ले ली। उनका कहना है कि अगर अधिकारी समय पर और साहस के साथ कार्रवाई करते, तो एक युवा जिंदगी बचाई जा सकती थी। “एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। यह सिर्फ हादसा नहीं, सिस्टम की नाकामी है,” मोनिंदर कहते हैं।
Software engineer death के बाद जागा सिस्टम
घटना के बाद जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां अब चमचमाती लोहे की बैरिकेडिंग लगा दी गई हैं। लेकिन स्थानीय लोग और मोनिंदर सवाल उठा रहे हैं कि ये बैरिकेडिंग 10-15 साल पहले क्यों नहीं लगाई गईं? जिस गड्ढे ने एक युवक की जान ले ली, वह लंबे समय से वहां मौजूद था। लोगों का कहना है कि सिस्टम हमेशा किसी बड़ी त्रासदी के बाद ही जागता है।
कोहरे में छिपा ‘मौत का गड्ढा’
मृतक युवराज मेहता नोएडा की टाटा युरेका पार्क सोसाइटी में रहते थे। शनिवार रात वह गुरुग्राम से ऑफिस का काम खत्म कर घर लौट रहे थे। रास्ते में एक निर्माणाधीन मॉल के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में उनकी कार गिर गई। कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम थी। मौके पर न तो कोई रिफ्लेक्टर लगा था, न ही कोई चेतावनी बोर्ड, जिससे वाहन चालकों को खतरे का अंदेशा हो सके।
15 दिन पहले भी हुआ था हादसा
हैरान करने वाली बात यह है कि इसी गड्ढे में करीब 15 दिन पहले भी एक ट्रक गिर चुका था। उस वक्त भी मोनिंदर ने ही ट्रक चालक गुरिंदर की जान बचाई थी। गुरिंदर बताते हैं, “इलाके में कोई रिफ्लेक्टर नहीं है। मुझे लगा नीचे सड़क है, लेकिन ट्रक सीधे पानी में चला गया। मोनिंदर ने रस्सी की मदद से मुझे बाहर निकाला।”
गुरिंदर का आरोप है कि जब उन्होंने नोएडा अथॉरिटी से शिकायत की, तो कार्रवाई करने के बजाय उन पर ही दीवार तोड़ने का आरोप लगा दिया गया।
शादी से पहले बुझ गया घर का चिराग
मोनिंदर बताते हैं कि युवराज की शादी अगले 2-4 महीनों में होने वाली थी। उनके पिता की उम्र 65 साल से अधिक है। “मैंने एक बेबस पिता को अपने बेटे के लिए टूटते देखा है। मैं सच बोलता रहूंगा, चाहे मुझे जेल ही क्यों न जाना पड़े,” मोनिंदर भावुक होकर कहते हैं। उनके परिवार ने भी इस मामले में उनका पूरा समर्थन किया है। उनके भाई सोमिंद्र सिंह का कहना है कि मोनिंदर उस पिता का दर्द देख नहीं पाए, इसलिए अपनी जान जोखिम में डाल दी।
अधिकारियों की चुप्पी, लोगों का गुस्सा
इस पूरे मामले पर अब तक नोएडा अथॉरिटी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। उनका सवाल है कि विकास के नाम पर खोदे गए ऐसे खुले और असुरक्षित गड्ढों का जिम्मेदार कौन है? क्या किसी की मौत के बाद ही प्रशासन की नींद टूटेगी?
यह हादसा नोएडा ही नहीं, बल्कि देश के कई शहरों में चल रहे अव्यवस्थित विकास कार्यों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि युवराज की मौत के बाद जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होती है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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