लोकसभा सत्र समाप्त होने के बाद दिल्ली से पटना लौटे पप्पू यादव को शायद अंदाजा भी नहीं था कि आधी रात उनके घर के बाहर एक बड़ा सियासी और प्रशासनिक ड्रामा खड़ा हो जाएगा।
बिहार की राजनीति में शुक्रवार देर रात उस वक्त जबरदस्त हलचल मच गई, जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ Pappu Yadav को उनके पटना स्थित आवास से पुलिस ने हिरासत में ले लिया। लोकसभा सत्र समाप्त होने के बाद दिल्ली से पटना लौटे पप्पू यादव को शायद अंदाजा भी नहीं था कि आधी रात उनके घर के बाहर एक बड़ा सियासी और प्रशासनिक ड्रामा खड़ा हो जाएगा।
रात करीब 11 बजे जैसे ही वे अपने आवास पहुंचे, अचानक माहौल बदल गया। कुछ ही मिनटों में सिविल ड्रेस में पुलिस अधिकारी, पांच अलग-अलग थानों की टीम और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात हो गया। पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
अचानक पुलिस की एंट्री
पुलिस टीम का नेतृत्व एसपी सिटी पश्चिम भानु प्रताप सिंह और एसएसपी कार्तिकेय शर्मा कर रहे थे। अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पप्पू यादव की गिरफ्तारी की बात कही। यहीं से विवाद की शुरुआत हो गई।
Pappu Yadav का दावा था कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तारी का वारंट नहीं, बल्कि सिर्फ संपत्ति कुर्की से संबंधित दस्तावेज दिखाए। उन्होंने मौके पर ही सवाल उठाया कि बिना वैध गिरफ्तारी वारंट उन्हें कैसे हिरासत में लिया जा सकता है। इसी बात को लेकर पुलिस और सांसद के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
“ये मुझे मारने आए हैं”
जैसे-जैसे समय बीतता गया, स्थिति और तनावपूर्ण होती चली गई। पप्पू यादव बार-बार यह कहते सुने गए कि, “ये लोग मुझे मारने आए हैं, मैं रात में थाने नहीं जाऊंगा।”
उनकी इस बात से समर्थकों में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए, नारेबाजी शुरू हो गई और कुछ समर्थक तो पुलिस वाहनों पर चढ़ गए। हालात को काबू में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा।
Pappu Yadav ने हाउस अरेस्ट की मांग की
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पप्पू यादव ने पुलिस से अपील की कि अगर कार्रवाई करनी ही है तो उन्हें हाउस अरेस्ट में रखा जाए और सुबह अदालत में पेश होने दिया जाए। उन्होंने मीडिया के सामने भी कहा कि वे खुद कोर्ट में हाजिर होने को तैयार हैं।
हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने साफ कर दिया कि उनके पास कोर्ट का आदेश है और तत्काल गिरफ्तारी जरूरी है। कई घंटों तक चली खींचतान और बहस के बाद आखिरकार पुलिस ने सांसद को हिरासत में ले लिया।
35 साल पुराना मामला
पुलिस के मुताबिक, यह मामला 1995 का है और गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि पप्पू यादव ने मकान मालिक विनोद बिहारी लाल से धोखे से मकान किराए पर लिया था। शर्त यह थी कि मकान का उपयोग निजी आवास के लिए किया जाएगा, लेकिन बाद में उसे राजनीतिक कार्यालय में बदल दिया गया।
इस मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। केस फिलहाल MP-MLA विशेष अदालत में लंबित था।
कोर्ट में पेशी न होने से बढ़ी मुश्किल
पुलिस का कहना है कि Pappu Yadav लंबे समय से कोर्ट में पेश नहीं हो रहे थे। इसे जमानत शर्तों का उल्लंघन माना गया, जिसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। उसी आदेश के तहत पटना पुलिस ने यह कार्रवाई की।
गिरफ्तारी के बाद सांसद को मेडिकल जांच के लिए IGIMS अस्पताल ले जाया गया।
राजनीतिक साजिश का आरोप
पप्पू यादव ने अपनी गिरफ्तारी को पूरी तरह राजनीतिक साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने हाल ही में पटना में नीट छात्र की मौत, गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े मामलों और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा था। इसी वजह से उन्हें दबाने की कोशिश की जा रही है।
उनकी गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दलों और समर्थकों ने भी सवाल उठाए हैं कि क्या आधी रात इस तरह की कार्रवाई जरूरी थी।
अब नजर कोर्ट पर
फिलहाल Pappu Yadav पुलिस हिरासत में हैं और शनिवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। उन्हें जमानत मिलती है या न्यायिक हिरासत बढ़ती है, यह आने वाले घंटों में साफ होगा।
आधी रात की यह गिरफ्तारी बिहार की राजनीति में नई बहस और सियासी घमासान को जन्म दे चुकी है, जिसकी गूंज आने वाले दिनों तक सुनाई दे सकती है।
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