Paush Purnima 2026: कब है व्रत, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और क्या करें ये सरल उपाय
Paush Purnima 2026 : हिंदू धर्म में पौष पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। यह तिथि न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से पवित्र है, बल्कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने वाली भी मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करता है, उसे जीवन के कई कष्टों से मुक्ति मिलती है।
पौष पूर्णिमा के अगले दिन स्नान और दान का भी विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि इस पावन तिथि पर किए गए छोटे-छोटे उपाय भी बड़ा फल देते हैं।
पौष पूर्णिमा 2026 कब है?
साल 2026 में पौष माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत
2 जनवरी, शुक्रवार को शाम 6 बजकर 54 मिनट से होगी।
वहीं, इस तिथि का समापन
3 जनवरी, शनिवार को शाम 5 बजकर 35 मिनट पर होगा।
हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा का व्रत 2 जनवरी 2026 (शुक्रवार) को रखा जाएगा।
जबकि स्नान और दान का पुण्यकाल 3 जनवरी 2026 को माना जाएगा।
पौष पूर्णिमा 2026 स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
पौष पूर्णिमा व्रत के अगले दिन यानी
3 जनवरी, शनिवार को सुबह 7 बजकर 30 मिनट तक स्नान, दान और पुण्य कार्य करना अत्यंत शुभ रहेगा।
मान्यता है कि इस समय स्नान करने और दान देने से व्यक्ति को पुण्य फल की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है।
पौष पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा का व्रत करने से जातक को:
- मानसिक शांति मिलती है
- जीवन के कष्ट कम होते हैं
- पापों से मुक्ति मिलती है
- घर में सुख-समृद्धि आती है
यह तिथि विशेष रूप से उन लोगों के लिए शुभ मानी जाती है, जो आर्थिक परेशानियों, मानसिक तनाव या पारिवारिक समस्याओं से गुजर रहे हों।
पौष पूर्णिमा के सरल और प्रभावी उपाय
1. विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करें
इस दिन प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पूजा के समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
2. शिव और चंद्रदेव की पूजा
पौष पूर्णिमा पर भगवान शिव और चंद्रदेव की पूजा करना भी लाभकारी माना गया है। शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने से कुंडली में चंद्र दोष से राहत मिल सकती है और मन को शांति मिलती है।
3. स्नान के बाद दान करें
शुभ मुहूर्त में स्नान करने के बाद जरूरतमंदों को
- अनाज
- कंबल
- वस्त्र
- तिल या घी का दान करें। ऐसा करने से लक्ष्मीनारायण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
4. घी का दीपक जरूर जलाएं
पूर्णिमा तिथि की शाम को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने एक घी का दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय अपनी मनोकामना मन ही मन कहें और श्रद्धा से पूजा करें।
5. व्रत में संयम रखें
यदि संभव हो तो पौष पूर्णिमा का व्रत रखें। व्रत के दौरान सात्त्विक भोजन करें, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
निष्कर्ष
पौष पूर्णिमा सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और पुण्य कमाने का अवसर है। इस दिन सच्चे मन से पूजा, स्नान और दान करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। छोटे-छोटे उपाय भी अगर श्रद्धा से किए जाएं, तो वे बड़े फल दे सकते हैं।
इस पौष पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से आपका जीवन सुख, शांति और समृद्धि से भर जाए—यही कामना है।
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