
PM Modi SCO Summit: 7 साल बाद एशिया की दो महाशक्तियों की ऐतिहासिक मुलाकात
PM Modi SCO Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद चीन की धरती पर पहुंचे हैं। जापान के सफल दौरे के बाद वे सीधे चीन पहुंचे, जहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया। यह दौरा इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में तनाव और मतभेद देखने को मिले हैं। अब शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पीएम मोदी चीन में मौजूद हैं। इस मौके पर पूरी दुनिया की नजर भारत और चीन के रिश्तों पर टिकी हुई है।
जापान दौरे के बाद चीन रवाना
पीएम मोदी ने अपने दो दिवसीय जापान दौरे में कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए। भारत और जापान ने 13 बड़े समझौते किए जिनमें सेमीकंडक्टर प्लांट, रेयर अर्थ मिनरल्स सप्लाई चेन, और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट प्रमुख रहे। जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ पीएम मोदी ने बुलेट ट्रेन से यात्रा की और सेंदाई में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
जापान ने भारत का आतंकवाद के खिलाफ भी साथ दिया और पहलगाम हमले की निंदा की। इसके बाद पीएम मोदी सीधे चीन रवाना हो गए।
चीन में भव्य स्वागत
चीन के तियानजिन एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने किया। रेड कार्पेट बिछाकर पारंपरिक तरीके से उनका अभिनंदन हुआ। इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी तैयारी की गई थी। भारतीय संगीत और नृत्य की झलक के साथ चीनी कलाकारों ने भी प्रस्तुति दी।
खास बात यह रही कि मोदी के स्वागत में ओडिसी नृत्य भी शामिल था, जिससे भारत की परंपरा का प्रतिनिधित्व हुआ।
SCO शिखर सम्मेलन
पीएम मोदी चीन दौरे पर दो दिन रुकेंगे और इस दौरान वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का मुख्य फोकस होगा –
- एशिया में शांति और स्थिरता
- आतंकवाद और कट्टरपंथ पर सख्त कदम
- आर्थिक सहयोग और व्यापारिक समझौते
- ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन मजबूत करना
इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी तय है। यह बैठकें एशिया की राजनीति और रणनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे सकती हैं।
भारत-चीन संबंधों में बदलाव
पिछले कुछ वर्षों से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और राजनीतिक मतभेद देखने को मिले थे। लेकिन हालिया वैश्विक परिस्थितियों ने दोनों देशों को करीब लाने का काम किया है।
- अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ और उसकी कठोर विदेश नीति ने भारत और चीन दोनों को प्रभावित किया है।
- रूस के साथ भारत और चीन के रिश्ते मजबूत हो रहे हैं।
- एशिया में ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के हित काफी हद तक एक जैसे हैं।
यही वजह है कि रूस की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच रिश्ते धीरे-धीरे सामान्य होते नजर आ रहे हैं।
भारतीय समुदाय का उत्साह
चीन में मौजूद भारतीय समुदाय पीएम मोदी के स्वागत के लिए काफी उत्साहित है। भारतीय प्रवासियों का कहना है कि 2015 के बाद उन्हें फिर से अपने प्रधानमंत्री से मिलने का मौका मिल रहा है। उनका मानना है कि भारत और चीन अगर मिलकर काम करें तो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और संस्कृति को फायदा होगा।
सांस्कृतिक साझेदारी पर जोर
चीन ने पीएम मोदी के स्वागत के लिए भारतीय संस्कृति को भी मंच पर उतारा। ओडिसी नृत्य, भारतीय संगीत और चीनी धुनों का संगम दोनों देशों की साझेदारी को दर्शाता है।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान हमेशा से भारत-चीन रिश्तों का अहम हिस्सा रहा है। पीएम मोदी ने भी पहले कई बार कहा है कि संस्कृति रिश्तों को मजबूत करने का पुल है।
दौरे की अहमियत
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दौरा केवल एक शिखर सम्मेलन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एशिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था में नए अध्याय की शुरुआत हो सकता है।
- भारत और चीन अगर सहयोग बढ़ाते हैं तो एशिया की आवाज़ और मजबूत होगी।
- अमेरिका और पश्चिमी देशों की एकतरफा नीतियों का असर कम हो सकता है।
- ऊर्जा, तकनीक और व्यापार में नए अवसर पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा भारत-चीन रिश्तों को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। सात साल बाद पीएम मोदी का चीन पहुँचना केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि एशिया में संतुलन और सहयोग की नई कोशिश भी है। दुनिया की नजर इस बात पर है कि मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन की मुलाकात से क्या नया समीकरण निकलकर सामने आता है।
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