Processed food health risks: अपैकेट वाला खाना बन रहा है धीमा ज़हर? नई स्टडी ने बढ़ाई चिंता
Processed food health risks: आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में प्रोसेस्ड फूड हमारी रोज़मर्रा की डाइट का हिस्सा बन चुका है। सुबह ऑफिस की जल्दी हो या बच्चों का टिफिन—चिप्स, बिस्किट, इंस्टेंट नूडल्स, पैकेट वाले स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक्स हर जगह नज़र आते हैं। स्वाद अच्छा लगता है, समय भी बचता है, लेकिन सेहत की कीमत पर।
हाल ही में प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित एक बड़ी स्टडी ने अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। इस रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि अगर ऐसे फूड्स का सेवन लगातार किया जाए, तो यह शरीर को अंदर से धीरे-धीरे बीमार बना सकता है।
क्या होते हैं अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड?
इस अध्ययन में खाने-पीने की चीज़ों को चार श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें सबसे खतरनाक माने गए हैं अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स। ये वे चीज़ें होती हैं जो फैक्ट्री में तैयार की जाती हैं और जिनमें प्राकृतिक खाद्य तत्व बहुत कम होते हैं।
इनमें सस्ते रिफाइंड तेल, ज़्यादा चीनी, नमक, आर्टिफिशियल फ्लेवर, कलर और प्रिज़र्वेटिव्स मिलाए जाते हैं। चिप्स, पैकेट वाले स्नैक्स, इंस्टेंट फूड, मीठे सीरियल्स, रेडी-टू-ईट मील और सॉफ्ट ड्रिंक्स—ये सभी इसी श्रेणी में आते हैं।
स्टडी में क्या सामने आया?
इस रिसर्च में 104 अलग-अलग अध्ययनों की समीक्षा की गई। नतीजे चौंकाने वाले हैं।
जो लोग नियमित रूप से अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाते हैं, उनमें:
- टाइप-2 डायबिटीज़ का खतरा 25% तक बढ़ जाता है
- डिप्रेशन का जोखिम 23% ज्यादा पाया गया
- मोटापा या ज़्यादा वजन होने की संभावना 21% तक बढ़ जाती है
- सभी कारणों से होने वाली मौतों का जोखिम भी 18% अधिक देखा गया
ये आंकड़े साफ़ बताते हैं कि मामला सिर्फ वजन बढ़ने का नहीं, बल्कि गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों का है।
ये फूड्स शरीर को नुकसान क्यों पहुंचाते हैं?
अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स में पोषण लगभग ना के बराबर होता है। इनमें फाइबर, विटामिन और मिनरल्स कम होते हैं, जबकि शुगर, नमक और अनहेल्दी फैट बहुत ज़्यादा।
इनका स्वाद इस तरह बनाया जाता है कि इंसान बार-बार खाने का मन करे। नतीजा यह होता है कि हम ज़रूरत से ज़्यादा खा लेते हैं। इससे ब्लड शुगर बढ़ती है, पाचन बिगड़ता है और धीरे-धीरे शरीर में सूजन और हार्मोनल असंतुलन पैदा होने लगता है।
मुनाफे का खेल, सेहत की कीमत पर
स्टडी में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। पिछले करीब 60 सालों में फूड इंडस्ट्री में जो मुनाफा कमाया गया, उसका बड़ा हिस्सा अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड कंपनियों से आया है।
इन कंपनियों का फोकस लोगों की सेहत नहीं, बल्कि बिक्री और मुनाफा होता है। आकर्षक पैकेजिंग, टीवी विज्ञापन और सस्ते दाम—इन सबके ज़रिए लोगों को इन चीज़ों का आदी बना दिया जाता है।
क्या पूरी तरह छोड़ना ज़रूरी है?
एकदम से सब कुछ छोड़ पाना हर किसी के लिए आसान नहीं है। लेकिन शुरुआत की जा सकती है।
- पैकेट वाले फूड की जगह घर का ताज़ा खाना चुनें
- सब्ज़ी, फल, दाल, चावल, रोटी जैसे साधारण भोजन को प्राथमिकता दें
- बच्चों की डाइट पर खास ध्यान दें
- लेबल पढ़ने की आदत डालें—अगर चीज़ों की लिस्ट बहुत लंबी है, तो समझ लें कि वो ज्यादा प्रोसेस्ड है
आखिर में…
यह स्टडी हमें डराने के लिए नहीं, बल्कि जागरूक करने के लिए है। सेहत कोई एक दिन में खराब नहीं होती, लेकिन रोज़ की छोटी-छोटी गलत आदतें हमें बड़ी बीमारी की तरफ ले जाती हैं।
अगर आज हम अपनी थाली में थोड़ा सा बदलाव कर लें, तो आने वाले सालों में खुद को और अपने परिवार को कई गंभीर बीमारियों से बचा सकते हैं। स्वाद ज़रूरी है, लेकिन सेहत से बढ़कर कुछ नहीं।
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