Rohini Vrat 2026: सुख-सौभाग्य, शीघ्र विवाह और मोक्ष ,भगवान वासुपूज्य की कृपा से पूरी होंगी मनोकामनाएं
Rohini Vrat 2026: जैन धर्म में रोहिणी व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। यह व्रत मुख्य रूप से जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में सुख-शांति, सौभाग्य, विवाह में आ रही बाधाओं का निवारण और आत्म-शुद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
इस वर्ष रोहिणी व्रत 28 जनवरी 2026, बुधवार को माघ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाएगा। यह दिन न केवल धार्मिक बल्कि राष्ट्रीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Rohini Vrat का धार्मिक महत्व
रोहिणी व्रत जैन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। यह व्रत स्त्री और पुरुष दोनों द्वारा किया जाता है। जैन मान्यताओं के अनुसार—
- विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत सुख-सौभाग्य और पति की लंबी उम्र का कारक होता है।
- अविवाहित जातकों के लिए शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।
- परिवार में शांति, समृद्धि और संतान की खुशहाली बनी रहती है।
- आत्मा की शुद्धि, कर्म-निर्जरण और मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ने में सहायता मिलती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस व्रत को करने से रानी रोहिणी को अनेक कष्टों से मुक्ति मिली थी, तभी से यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।
रोहिणी व्रत की तिथि और नक्षत्र
वैदिक पंचांग के अनुसार,
28 जनवरी 2026 को माघ शुक्ल दशमी तिथि शाम 04:35 बजे तक रहेगी। इसके बाद एकादशी तिथि प्रारंभ होगी।
इसी दिन रोहिणी नक्षत्र का शुभ संयोग सुबह 09:27 बजे से बन रहा है। व्रती इस दिन अपनी सुविधा अनुसार समय पर भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा कर सकते हैं।
रोहिणी व्रत पर बनने वाले शुभ योग
इस वर्ष रोहिणी व्रत पर कई दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं—
- ब्रह्म योग: जिसका समापन रात 11:54 बजे होगा। इस योग में की गई पूजा से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
- इंद्र योग: यह योग कार्य-सिद्धि और सौभाग्य में वृद्धि करता है।
- सर्वार्थ सिद्धि योग: इस योग में किए गए धार्मिक कार्य विशेष फल देते हैं।
इन शुभ योगों के कारण 28 जनवरी का रोहिणी व्रत और भी फलदायी माना जा रहा है।
रोहिणी व्रत क्यों रखा जाता है?
जैन और हिंदू दोनों परंपराओं में रोहिणी व्रत को महत्वपूर्ण माना गया है। इसके प्रमुख कारण हैं—
- घर-परिवार में सुख-समृद्धि और शांति
- पति की लंबी उम्र और कल्याण
- संतान की दीर्घायु और खुशहाली
- आत्म-शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति
- भगवान वासुपूज्य स्वामी की विशेष कृपा
- ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्र दोष का निवारण और मानसिक शांति
विशेष रूप से कमजोर चंद्रमा वाले जातकों के लिए यह व्रत लाभकारी माना जाता है।
रोहिणी व्रत कैसे किया जाता है?
यह व्रत हर महीने रोहिणी नक्षत्र के संयोग पर किया जाता है। व्रती अपनी श्रद्धा अनुसार—
- निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं
- भगवान वासुपूज्य स्वामी और चंद्रदेव की पूजा करते हैं
- दान-पुण्य और सेवा कार्य करते हैं
मान्यता है कि यह व्रत 5 साल, 5 महीने या 7 साल तक करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।
28 जनवरी 2026 का अन्य महत्व
28 जनवरी का दिन केवल रोहिणी व्रत के कारण ही नहीं, बल्कि अन्य कारणों से भी खास है—
- लाला लाजपत राय जयंती
- के.एम. करियप्पा जयंती (भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ)
- सम्मक्का सरलम्मा जतारा (तेलंगाना) की शुरुआत
- जया एकादशी तिथि का प्रारंभ (मुख्य व्रत 29 जनवरी को)
इस तरह 28 जनवरी 2026 धार्मिक, आध्यात्मिक और राष्ट्रीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है।
रोहिणी व्रत न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह आत्म-संयम, श्रद्धा और सकारात्मक जीवन दृष्टि का प्रतीक भी माना जाता है।
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