विमान की कमान अनुभवी पायलट कैप्टन सुमित कपूर के पास थी, जबकि Shambhavi Pathak को-पायलट की भूमिका में मौजूद थीं।
Lady pilot Shambhavi Pathak: बुधवार सुबह पुणे-बारामती क्षेत्र में हुए एक भीषण विमान हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। Learjet 45 चार्टर्ड विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित विमान में सवार सभी पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ, जब विमान निर्धारित लैंडिंग से कुछ ही मिनट पहले नियंत्रण खो बैठा।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान की कमान अनुभवी पायलट कैप्टन सुमित कपूर के पास थी, जबकि Shambhavi Pathak को-पायलट की भूमिका में मौजूद थीं। दुर्घटना के बाद विमान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। राहत और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन किसी को भी बचाया नहीं जा सका।
ग्वालियर से कॉकपिट तक का सफर
को-पायलट Shambhavi Pathak देश की उन चुनिंदा उभरती महिला पायलटों में गिनी जाती थीं, जिन्होंने कॉर्पोरेट और चार्टर एविएशन में कम समय में अपनी पहचान बनाई। उनका संबंध मध्य प्रदेश के ग्वालियर से रहा, जहां उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की।
शांभवी ने एयरफोर्स स्कूल नंबर-वन, ग्वालियर से 2016 से 2018 के बीच पढ़ाई की। इसी दौरान उनके भीतर पायलट बनने का सपना आकार लेने लगा। वायुसेना के माहौल और अनुशासन ने उनके लक्ष्य को और मजबूत किया।
उच्च शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण
2018 में इंटरमीडिएट पूरा करने के बाद शांभवी ने मुंबई विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। यहां उन्होंने एयरोनॉटिक्स, एविएशन और एयरोस्पेस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में बीएससी की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने व्यावसायिक पायलट बनने की तैयारी शुरू कर दी थी।
इसके बाद Shambhavi Pathak ने न्यूजीलैंड इंटरनेशनल कमर्शियल पायलट अकादमी में दाखिला लिया, जहां उन्होंने उन्नत उड़ान प्रशिक्षण प्राप्त किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस प्रशिक्षण ने उनके करियर को नई दिशा दी और वे कॉर्पोरेट एविएशन में तेजी से आगे बढ़ीं।
परिवार और निजी जीवन
Shambhavi Pathak का परिवार वर्तमान में दिल्ली में निवास करता है। उनके परिवार में एक छोटा भाई वरुण, माता रोली शुक्ला पाठक हैं। उनका ननिहाल उत्तर प्रदेश के कानपुर में है। परिवार के लिए यह हादसा असहनीय सदमे जैसा है।
केवल पायलट ही नहीं, प्रशिक्षक भी थीं शांभवी
शांभवी पाठक सिर्फ खुद उड़ान भरने तक सीमित नहीं थीं। वे भावी पीढ़ी के पायलटों को प्रशिक्षित करने के लिए भी समर्पित रहीं। उन्होंने मध्य प्रदेश फ्लाइंग क्लब में असिस्टेंट फ्लाइट इंस्ट्रक्टर के रूप में कार्य किया और उनके पास फ्लाइट इंस्ट्रक्टर रेटिंग (A) थी। साथी पायलट उन्हें अनुशासित, तकनीकी रूप से सशक्त और प्रेरणादायक प्रशिक्षक के रूप में याद करते हैं।
वायुसेना से जुड़ा पारिवारिक रिश्ता
Shambhavi Pathak के पिता विक्रम पाठक भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर रहे हैं और ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पर पोस्टेड थे। शांभवी अपनी पढ़ाई के दौरान परिवार के साथ एयरफोर्स कैंपस में रहती थीं। वायुसेना की पृष्ठभूमि ने उनके भीतर उड़ान के प्रति जुनून और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया। सेवानिवृत्ति के बाद उनके पिता निजी क्षेत्र में, इंडिगो एयरलाइंस से जुड़े रहे।
एलुमनाई ग्रुप में शोक की लहर
एयरफोर्स स्कूल नंबर-वन के एलुमनाई ग्रुप से शांभवी पिछले वर्ष नवंबर में जुड़ी थीं। उन्होंने वहां अपने पिता और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में भी जानकारी साझा की थी। नवंबर 2025 में वे पुणे में सक्रिय रूप से उड़ान भर रही थीं। उनकी मृत्यु की खबर सामने आते ही एलुमनाई ग्रुप और एविएशन समुदाय में शोक संदेशों की बाढ़ आ गई।
जांच के आदेश, देश में शोक
Learjet 45 हादसे को लेकर नागरिक उड्डयन से जुड़ी एजेंसियों ने जांच के आदेश दे दिए हैं। हादसे के कारणों की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। इस दुर्घटना ने न केवल एक वरिष्ठ राजनेता को देश से छीना, बल्कि एक होनहार महिला पायलट Shambhavi Pathak का उज्ज्वल भविष्य भी छीन लिया।
यह हादसा लंबे समय तक राजनीति और भारतीय एविएशन जगत में याद किया जाएगा—एक ऐसी त्रासदी के रूप में, जिसने कई सपनों को एक साथ बुझा दिया।
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