Smartphone overheating: रजाई के अंदर मोबाइल चलाना, आराम की आदत या सेहत के लिए खतरा?
Smartphone overheating: सर्दियों की रात हो, बाहर ठंड हो और हम रजाई में दुबके हों—ऐसे में हाथ अपने आप मोबाइल की तरफ बढ़ जाता है। कोई सोशल मीडिया स्क्रॉल करता है, कोई चैट में लगा रहता है, तो कोई देर रात तक वीडियो देखता रहता है। हमें लगता है कि इससे आराम मिलता है और नींद भी आ जाएगी।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रजाई या कंबल के अंदर मोबाइल चलाने की यह आदत कितनी खतरनाक हो सकती है?
कंबल के अंदर मोबाइल क्यों बन जाता है ‘हीट बॉक्स’?
मोबाइल फोन एक छोटा कंप्यूटर है। ज्यादा देर वीडियो देखने, गेम खेलने या चार्जिंग के दौरान यह गर्म हो जाता है। जब मोबाइल को कंबल या तकिए के नीचे रखा जाता है, तो हवा का रास्ता बंद हो जाता है।
नतीजा यह होता है कि मोबाइल की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और फोन ज्यादा गरम होने लगता है।
इसका सबसे पहला असर बैटरी पर पड़ता है। आजकल ज्यादातर फोनों में लिथियम-आयन बैटरी होती है, जो ज्यादा गर्मी सहन नहीं कर पाती। लगातार गर्म माहौल में रहने से—
- बैटरी जल्दी खराब होने लगती है
- फोन जल्दी डिस्चार्ज होने लगता है
- कुछ मामलों में बैटरी फूल सकती है, जिससे स्क्रीन या बैक पैनल खराब हो सकता है
अगर बैटरी पहले से खराब हो या लोकल चार्जर इस्तेमाल किया जा रहा हो, तो ज्यादा गर्मी से आग लगने जैसी स्थिति भी बन सकती है। यही वजह है कि फायर डिपार्टमेंट और एक्सपर्ट्स कंबल के नीचे मोबाइल चार्ज करने से मना करते हैं।
Mobile phone radiation concerns
अंधेरे में मोबाइल चलाना सेहत के लिए क्यों नुकसानदायक है?
रजाई के अंदर पूरा अंधेरा होता है और मोiबाइल की रोशनी सीधे आंखों पर पड़ती है। इससे शरीर पर कई तरह के बुरे असर पड़ते हैं।
नींद पर असर
मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट दिमाग को यह संकेत देती है कि अभी दिन है। इससे शरीर एक्टिव हो जाता है और नींद आने में देरी होती है।
- नींद देर से आती है
- बार-बार नींद टूटती है
- सुबह उठने पर थकान महसूस होती है
असल में ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को कम कर देती है, जो अच्छी नींद के लिए जरूरी होता है।
आंखों के लिए खतरा
कंबल के अंदर मोबाइल अक्सर आंखों के बहुत पास होता है। लगातार पास से स्क्रीन देखने पर आंखों की मसल्स पर दबाव पड़ता है।
- आंखों में जलन और दर्द हो सकता है
- सिरदर्द की समस्या बढ़ सकती है
- दूर की चीजें धुंधली दिखने लगती हैं
लंबे समय तक ऐसा करने से मायोपिया और ड्राई आई जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
दिमाग पर असर
लेट नाइट स्क्रॉलिंग दिमाग को शांत नहीं करती, बल्कि और ज्यादा एक्टिव कर देती है। सोशल मीडिया, खबरें और वीडियो दिमाग को ‘ऑन मोड’ में रखती हैं।
- गहरी नींद प्रभावित होती है
- अगले दिन चिड़चिड़ापन रहता है
- फोकस और एनर्जी कम हो जाती है
इस आदत से कैसे बचें?
अगर आप रात में मोबाइल इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ आसान सावधानियां जरूरी हैं—
- कंबल या तकिए के नीचे मोबाइल कभी चार्ज न करें
- डार्क मोड और नाइट शिफ्ट ऑन रखें
- स्क्रीन की ब्राइटनेस कम रखें
- सोने से 30–60 मिनट पहले मोबाइल बंद कर दें
- 20-20-20 रूल अपनाएं—हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखें
अंत में एक सवाल
रजाई के अंदर मोबाइल चलाना भले ही आरामदायक लगे, लेकिन इसका असर हमारी नींद, आंखों और दिमाग पर गहरा पड़ता है।
अब सवाल यह है—क्या कुछ मिनट की स्क्रॉलिंग आपकी सेहत से ज्यादा जरूरी है?
शायद आज रात मोबाइल से पहले अपनी नींद को चुनना ज्यादा समझदारी होगी।
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