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पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान भगदड़, 15 घायल, एक की मौत


हादसे की जानकारी
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी जिसमें भगदड़ मचने से 15 भक्त घायल हो गए और एक श्रद्धालु की मौत हो गई। घायल श्रद्धालुओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से कई को मामूली चोटें आई थीं। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जबकि गंभीर रूप से घायल श्रद्धालुओं का इलाज जारी है। मृतक श्रद्धालु ओडिशा के बाहर का बताया जा रहा है, लेकिन अभी तक उसकी पहचान नहीं हो पाई है।

53 साल बाद दो दिन की रथ यात्रा
इस साल पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 53 साल बाद दो दिन की जा रही है। 1971 से यह रथ यात्रा एक दिन की होती थी। हर साल इस रथ यात्रा में भारी संख्या में भक्त शामिल होते हैं। इस बार भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा दो दिन में मौसी के घर पहुंचेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान यहां कई तरह के पकवान खाते हैं जिससे उनकी तबीयत खराब हो जाती है। पुरी की रथ यात्रा का धार्मिक महत्व अत्यधिक है और इसमें शामिल होने से 100 यज्ञ कराने के बराबर पुण्य मिलता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में भक्त इस रथ यात्रा में भाग लेते हैं।

बलभद्र के रथ खींचने के दौरान हादसा
हादसा प्रभु बलभद्र के रथ खींचे जाने के दौरान हुआ। इस दौरान एक व्यक्ति जमीन पर गिर गया जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के कारण हल्की भगदड़ मच गई जिसमें 15 लोग घायल हो गए।

धार्मिक रस्में और मान्यताएं
रथ यात्रा शुरू होने से पहले विभिन्न धार्मिक रस्में रविवार को ही पूरी कर ली गईं। मान्यता के अनुसार, स्नान पूर्णिमा पर स्नान के बाद भगवान बीमार हो जाते हैं। इस साल भी स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान ठीक हो चुके हैं। रथ यात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को दोपहर 2:30 बजे अपने-अपने रथ में विराजमान किया गया।

प्रमुख रस्में
जगन्नाथ मंदिर के पंचांगकर्ता डॉ. ज्योति प्रसाद ने बताया कि भगवान को आम दिनों से 2 घंटे पहले जगाया गया और मंगला आरती सुबह 4 बजे की बजाय तड़के 2 बजे हुई। मंगला आरती के बाद करीब 2:30 बजे दशावतार पूजन हुआ। 3 बजे नैत्रोत्सव और 4 बजे पुरी के राजा की तरफ से पूजा की गई। सुबह 5:10 बजे सूर्य पूजा और करीब 5:30 बजे द्वारपाल पूजा संपन्न हुई। सुबह 7 बजे भगवान को खिचड़ी भोग-प्रसाद लगाया गया।

इस तरह, पुरी की रथ यात्रा इस साल भी अपनी धार्मिक महत्ता और भक्तों की अपार श्रद्धा को दर्शाती है। हालांकि, हादसे के कारण हुई दुःखद घटनाओं ने इस उत्सव को थोड़ा सा म्लान कर दिया है। प्रशासन और आयोजकों के लिए यह घटना एक महत्वपूर्ण सबक है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक सतर्कता बरती जाए।

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