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समय की मांग है समान नागरिक संहिता कानून-मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी

मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी ने आज एक एक्‍स पोस्‍ट किया है, जिसमें उन्‍होंने लिखा-समय की मांग है समान नागरिक संहिता कानून और हम इसे लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।


रविवार को उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी की अध्‍यक्षता में कैबिनेट की बैठकमें कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) के ड्राफ्ट के प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्‍ताव को 6 फरवरी को विधानसभा सत्र के दौरान पेश किया जाएगा। उत्तराखंड कैबिनेट की यह 24 घंटे में दूसरी बैठक थी। बैठक के दौरान ही यूसीसी ड्राफ्ट को कैबिनेट के सामने रखा गया। ड्राफ्टिंग कमेटी ने UCC के ड्राफ्ट को 2 फरवरी को मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी को सौंपा था।

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के मसौदे को लागू करने की पहल का कदम उत्तराखंड सरकार द्वारा बड़ा महत्वपूर्ण है। यह कानून सभी नागरिकों को उनके धर्म, जाति, और लिंग के आधार पर नहीं, बल्कि समानता और न्याय के मूल्यों के आधार पर एकसमानता प्रदान करने का प्रयास करता है। इसमें विवाह, तलाक, भूमि, संपत्ति, और विरासत संबंधित मुद्दों पर सामान्य नियमों को स्थापित करना शामिल है।

उत्तराखंड की सरकार ने इसके मसौदे को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपकर एक प्रगतिशील प्रक्रिया की शुरुआत की है। समिति की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई के साथ, इसमें और भी सदस्य हैं जो इस मसौदे को विवाद रहित, सामंजस्यपूर्ण, और न्यायप्रधान बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

यदि यूसीसी का मसौदा उत्तराखंड में लागू होता है, तो यह राज्य भारत में सबसे पहला होगा जो इसको अपनाएगा। इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार और विशेषाधिकार मिलेंगे, अनेक समाजिक प्रथाओं को समाप्त करने में मदद मिलेगी, और यह न्यायपूर्ण और समर्पित समाज की स्थापना में मदद करेगा।

यूनिफॉर्म सिविल कोड का उत्पादन एक समृद्धि और समरसता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, और इससे समाज में सामाजिक न्याय और समानता की भावना को मजबूती मिलेगी।

यूसीसी पर विधेयक को लाने के लिए उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र का आयोजन बड़ी महत्वपूर्ण घटना है। यह सत्र 5 से 8 फरवरी तक बुलाया गया है। इस सत्र के दौरान, यूसीसी पर विधेयक के मसौदे को स्वीकृति प्राप्त करने के लिए विधायकों के बीच चर्चा होगी। यह सत्र चार दिन का है और इसमें यूसीसी पर विधेयक के विचारण के लिए समय समर्पित किया जाएगा।

यह विधेयक बीजेपी की एक महत्वपूर्ण वादी मुद्दा है, जिसे 2022 के चुनावों में उत्तराखंड की जनता ने समर्थन दिया था।उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में सरकार द्वारा नियुक्त पांच-सदस्यीय समिति ने शुक्रवार को 749 पृष्ठ की चार खंड वाली रिपोर्ट उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी थी।

इस समिति के सदस्यों में सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई, सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, सामाजिक कार्यकर्ता मनु गौड़, उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, और दून विश्वविद्यालय की उप कुलपति सुरेखा डंगवाल शामिल थे। इस समिति को चार विस्तारों के साथ दिया गया था और इसने अपने कार्यकाल में लगभग 2.33 लाख लिखित सुझाव प्राप्त किए और 60 बैठकों में सदस्यों ने करीब साठ हजार लोगों से बातचीत की। इस समिति की मुख्य सिफारिशों में निम्नलिखित विषयों पर बल दिया जा रहा है:

  1. बहुविवाह पूरी तरह से प्रतिबंध: समिति ने बहुविवाह को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का सुझाव दिया है, जिससे किसी भी व्यक्ति को एक समय में एक से अधिक व्यक्तियों से विवाह करने का अधिकार नहीं होगा।
  2. बाल विवाह पूरी तरह से प्रतिबंध: समिति ने बाल विवाह को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का सुझाव दिया है, जिससे किसी भी व्यक्ति को अपनी आयु से पहले विवाह करने का अधिकार नहीं होगा।
  3. सभी धर्मों की लड़कियों के लिए समान विवाह योग्य आयु: समिति ने सुझाव दिया है कि सभी धर्मों की लड़कियों के लिए विवाह योग्य आयु को समान कर देना चाहिए, जिससे सामाजिक समानता को बढ़ावा मिले।
  4. तलाक के लिए समान आधार और प्रक्रियाएं: समिति ने सुझाव दिया है कि तलाक के लिए समान आधार और प्रक्रियाएं अपनानी चाहिए, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में न्याय और समानता सुनिश्चित हो सके।

इस समिति की योजना और सुझावों के माध्यम से, यूसीसी पर विधेयक को सुधारने का प्रयास किया गया है, ताकि यह समाज में समरसता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बने।

Aarambh News
Author: Aarambh News

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