आस्था पर सवाल! Tirupati Laddu Ghee Scam में बाथरूम क्लीनर वाले केमिकल का आरोप
Tirupati Laddu Ghee Scam: आंध्र प्रदेश की राजनीति इन दिनों एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दे पर गरमा गई है। मामला देश-विदेश में प्रसिद्ध तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के पवित्र तिरुपति लड्डू से जुड़ा है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने एक जनसभा में ऐसा दावा किया, जिसने न सिर्फ सियासी हलकों बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं को भी चौंका दिया। नायडू का आरोप है कि पिछली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) सरकार के कार्यकाल में तिरुपति लड्डू बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए घी में शौचालय साफ करने में प्रयोग होने वाले रसायन की मिलावट थी।
क्या है पूरा विवाद?
Chandrababu Naidu Statement में मुख्यमंत्री ने कुरनूल जिले के एक गांव में जनसभा को संबोधित करते हुए बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि YSRCP शासन के दौरान TTD को सप्लाई किया गया घी बेहद घटिया गुणवत्ता का था। नायडू के मुताबिक, यह घी ऐसे केमिकल से तैयार किया गया था, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर बाथरूम क्लीनर में होता है। उन्होंने इसे सिर्फ खाद्य मिलावट नहीं, बल्कि भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की पवित्रता और श्रद्धालुओं की आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ बताया।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह गड़बड़ी एक-दो दिन की नहीं, बल्कि करीब पांच साल तक लगातार चलती रही। उनका आरोप है कि उस समय न सिर्फ तिरुपति, बल्कि श्रीशैलम जैसे अन्य धार्मिक स्थलों के लिए भेजे गए घी में भी इसी तरह की मिलावट की गई।
“यह सिर्फ घी नहीं, आस्था का सवाल है”
नायडू ने अपने भाषण में भावनात्मक लहजे में कहा कि तिरुपति लड्डू करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए सिर्फ प्रसाद नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक है। ऐसे में अगर उसमें मिलावट हुई, तो यह सीधे-सीधे भक्तों की भावनाओं पर चोट है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने सत्ता में आने के बाद प्रसाद की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं और पहले व अब के लड्डू में “ज़मीन-आसमान का अंतर” है।
जगन मोहन रेड्डी पर सीधा हमला
मुख्यमंत्री नायडू ने इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी को सीधे निशाने पर लिया। नायडू ने कहा कि जगन यह दावा कर रहे हैं कि CBI और विशेष जांच दल (SIT) ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है, लेकिन उनके ही परिवार के सदस्य और पूर्व TTD अध्यक्ष वाई. वी. सुब्बा रेड्डी ने कथित तौर पर मिलावट की बात स्वीकार की है।
नायडू ने यह भी आरोप लगाया कि YSRCP नेता जनहित के मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय शक्ति प्रदर्शन और सड़कों पर भीड़ जुटाने में लगे रहते हैं। उन्होंने जगन रेड्डी की हालिया गुंटूर यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि इससे आम लोगों और वाहन चालकों को भारी परेशानी हुई।
जगन रेड्डी का पलटवार
वहीं दूसरी ओर, YSRCP प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री नायडू के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। जगन का कहना है कि CBI की विशेष जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि TTD को आपूर्ति किए गए घी में किसी भी प्रकार की पशु वसा या मिलावट नहीं पाई गई। उन्होंने दावा किया कि न तो बीफ टैलो, न लार्ड और न ही किसी अन्य आपत्तिजनक तत्व के अंश मिले हैं।
जगन ने नायडू पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह पूरा मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और इसका मकसद तिरुपति मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं की भावनाओं को भड़काना है। उनके अनुसार, जांच रिपोर्ट में किसी भी तरह के आपराधिक कृत्य की पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीति बनाम आस्था
इस पूरे विवाद ने आंध्र प्रदेश की राजनीति को दो ध्रुवों में बांट दिया है। एक तरफ मुख्यमंत्री नायडू हैं, जो इसे पिछली सरकार की “गंभीर लापरवाही और अपवित्रता” बता रहे हैं। दूसरी तरफ जगन रेड्डी हैं, जो इसे “झूठा प्रचार और राजनीतिक स्टंट” करार दे रहे हैं।
सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर मिलावट हुई थी, तो जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में इसका जिक्र क्यों नहीं है? और अगर नहीं हुई थी, तो मुख्यमंत्री इतने गंभीर आरोप क्यों लगा रहे हैं?
आगे क्या?
फिलहाल तिरुपति लड्डू विवाद पर सियासी बयानबाज़ी तेज है। श्रद्धालु सच्चाई जानना चाहते हैं, जबकि सरकार और विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और दस्तावेज, रिपोर्ट या जांच सामने आ सकती है।
लेकिन इतना तय है कि तिरुपति लड्डू से जुड़ा यह विवाद सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। यह आस्था, भरोसे और सार्वजनिक जवाबदेही का सवाल बन चुका है। अब देखना यह होगा कि सच क्या है और क्या यह सच जनता के सामने पूरी पारदर्शिता के साथ आ पाएगा या नहीं।
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