Venezuela के बाद आने वाले समय में ट्रम्प कि नजर अब किन देशों पर हो सकती है।
US global strategy: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का दूसरा कार्यकाल उनकी आक्रामक और महत्वाकांक्षी विदेश नीति के अनुरूप तेज़ी से आकार लेता दिख रहा है। सत्ता में लौटते ही ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका की वैश्विक भूमिका को वह पहले से अधिक सख़्त, निर्णायक और दबाव आधारित बनाना चाहते हैं। हालिया घटनाक्रमों के कारण विश्व भर में हलचल मच गयी है। ऐस में ये जानना जरूरी है कि Venezuela के बाद आने वाले समय में ट्रम्प कि नजर अब किन देशों पर हो सकती है।
Venezuela ऑपरेशन और ‘डोनरो डॉक्ट्रिन’
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत वेनेज़ुएला के ख़िलाफ़ एक नाटकीय सैन्य कार्रवाई से हुई। रात के अंधेरे में किए गए इस ऑपरेशन में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को राजधानी काराकास में भारी सुरक्षा के बीच गिरफ़्तार कर लिया गया। इस कार्रवाई के बाद ट्रंप ने 1823 की ऐतिहासिक ‘मुनरो डॉक्ट्रिन’ का ज़िक्र करते हुए उसे नया नाम दिया— ‘डोनरो डॉक्ट्रिन’।
मुनरो डॉक्ट्रिन के तहत अमेरिका ने पश्चिमी गोलार्ध को यूरोपीय शक्तियों के प्रभाव से मुक्त रखने की नीति अपनाई थी। ट्रंप अब इसी विचार को आधुनिक रूप देकर अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र को मज़बूती से लागू करने का संदेश दे रहे हैं।
ग्रीनलैंड
वेनेज़ुएला के बाद ट्रंप की निगाह ग्रीनलैंड पर टिक गई है। अमेरिका का पहले से ही वहां ‘पिटुफिक स्पेस बेस’ नामक सैन्य अड्डा मौजूद है, लेकिन ट्रंप पूरे द्वीप को अमेरिकी नियंत्रण में लाने की इच्छा जता चुके हैं।
ट्रंप का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से ग्रीनलैंड बेहद ज़रूरी है, क्योंकि यह क्षेत्र रूसी और चीनी जहाजों की गतिविधियों से घिरा हुआ है। इसके अलावा ग्रीनलैंड रेयर अर्थ मिनरल्स से भरपूर है, जो स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन और सैन्य तकनीक के लिए अहम हैं। इस क्षेत्र में चीन पहले ही अमेरिका से आगे है।
हालांकि, ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ़्रेडरिक नीलसन ने अमेरिकी नियंत्रण की धारणा को “काल्पनिक” करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के सम्मान की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनलैंड पर किसी भी तरह का अमेरिकी दबाव नाटो गठबंधन में गंभीर तनाव पैदा कर सकता है।
कोलंबिया
वेनेज़ुएला ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद ही ट्रंप ने कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेत्रो को कड़ी चेतावनी दी। कोलंबिया तेल और खनिज संसाधनों से समृद्ध देश है, लेकिन नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए भी कुख्यात रहा है।
अमेरिका ने पहले ही पेत्रो पर प्रतिबंध लगाए हैं और उन पर ड्रग कार्टेल को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि कोलंबिया “एक बीमार व्यक्ति” के नेतृत्व में है। जब उनसे सैन्य कार्रवाई की संभावना पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा “ऐसा सुनना मुझे अच्छा लगता है।”
यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि कोलंबिया दशकों से अमेरिका के ड्रग्स विरोधी अभियान का प्रमुख सहयोगी रहा है।
ईरान
ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर भी ट्रंप ने सख़्त रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों की मौतें बढ़ीं, तो ईरानी अधिकारियों को “बहुत कड़ी सज़ा” मिलेगी।
पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों और इसराइल-ईरान के बीच 12 दिन चले संघर्ष के बाद यह चेतावनी और भी गंभीर मानी जा रही है। हाल ही में मार-ए-लागो में ट्रंप और इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की बैठक में भी ईरान प्रमुख एजेंडा रहा।
मेक्सिको
मेक्सिको Donald Trump की राजनीति का पुराना केंद्र रहा है। अपने पहले कार्यकाल की तरह इस बार भी उन्होंने मेक्सिको पर ड्रग्स और अवैध आप्रवासन रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है। ‘गल्फ़ ऑफ़ मेक्सिको’ का नाम बदलकर ‘गल्फ़ ऑफ़ अमेरिका’ करना इसी मानसिकता का प्रतीक माना जा रहा है।
ट्रंप ने मेक्सिको में ड्रग कार्टेल से निपटने के लिए अमेरिकी सैनिक भेजने की पेशकश की, लेकिन राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबॉम ने इसे सिरे से ख़ारिज कर दिया।
क्यूबा
क्यूबा को लेकर Donald Trumpका रुख अपेक्षाकृत नरम दिखता है। वेनेज़ुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद क्यूबा की तेल आपूर्ति पर संकट गहरा सकता है। ट्रंप का कहना है कि क्यूबा “झुकने के लिए तैयार” है और फिलहाल सैन्य कार्रवाई की ज़रूरत नहीं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी संकेत दिए हैं कि क्यूबा की सरकार को ट्रंप के बयानों को गंभीरता से लेना चाहिए।
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