हादसा या इंसानियत की परीक्षा? Uttarakhand Bus Accident में नोटों के बैग पर मचा बवाल
Uttarakhand Bus Accident : उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर हुआ HRTC Bus Crash सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं था, बल्कि यह घटना इंसानियत, लालच और जिम्मेदारी—तीनों की कड़ी परीक्षा बन गई। एक तरफ तीन लोगों की मौत से मातम पसरा हुआ था, घायल सड़क पर तड़प रहे थे, और दूसरी तरफ उसी जगह नोटों से भरा एक बैग लोगों के बीच झगड़े की वजह बन गया।
यह हादसा मंगलवार को उस वक्त हुआ, जब हिमाचल के नेरवा से विकासनगर होते हुए पांवटा साहिब जा रही HRTC Bus उत्तराखंड क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। बस के पलटते ही चारों ओर चीख-पुकार मच गई। कुछ लोग मदद के लिए दौड़े, तो कुछ की नजरें मौके पर गिरे सामान पर टिक गईं।
जब पैसों ने इंसानियत को पीछे छोड़ दिया
हादसे के बाद जब राहत और बचाव का काम चल रहा था, तभी मौके पर एक काले रंग का कपड़े का बैग मिला। बैग खोलते ही उसमें 3 लाख 20 हजार रुपये नकद देखकर कई लोगों की नीयत डोल गई। हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ लोग उस बैग को अपना बताने लगे और आपस में झगड़ने लगे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कोई कह रहा था कि यह बैग उसके घायल रिश्तेदार का है, तो कोई खुद को उसका मालिक बता रहा था। जिस जगह इंसानियत, संवेदना और मदद की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वहीं पैसों के लिए हाथापाई जैसी स्थिति बन गई।
यह दृश्य उस वक्त और भी ज्यादा विचलित करने वाला था, जब पास ही तीन मृतकों के शव पड़े थे और कई घायल जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
स्थिति बिगड़ती देख कालसी थाना प्रभारी दीपक धारीवाल मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए बैग को अपने कब्जे में लिया और झगड़ा शांत कराया। इसके बाद बैग के असली मालिक की पहचान की प्रक्रिया शुरू की गई।
पुलिस ने बस में सवार घायलों से संपर्क किया और बैग के बारे में जानकारी जुटाई। जांच के दौरान बैग से पैन कार्ड और फोटो पहचान पत्र भी बरामद हुआ, जिससे मामला साफ होने लगा।
बैग निकला अब्दुल कयूम का
जांच में सामने आया कि नोटों से भरा यह बैग अब्दुल कयूम नाम के व्यक्ति का है, जो सहारनपुर का रहने वाला है और नेरवा में क्रॉकरी की दुकान चलाता है। हादसे में अब्दुल कयूम भी घायल हुए थे और उन्हें विकासनगर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जब पुलिस ने उनसे फोन पर संपर्क किया और पहचान की पुष्टि की, तो सारी तस्वीर साफ हो गई। नायब तहसीलदार राजेन्द्र लाल ने संतुष्ट होने के बाद उपमंडलाधिकारी चकराता की मौजूदगी में बैग को अब्दुल कयूम के परिजनों को सौंपने का निर्णय लिया।
बेटी सानिया को सौंपा गया बैग
Abdul Qayoom के परिजन भी मौके पर पहुंच गए थे। सभी जरूरी दस्तावेजों और पहचान की पुष्टि के बाद अब्दुल की बेटी सानिया को नोटों से भरा बैग सौंप दिया गया।
यह पल राहत भरा जरूर था, लेकिन साथ ही यह सवाल भी छोड़ गया कि अगर पुलिस समय पर न पहुंचती, तो क्या यह बैग सही मालिक तक पहुंच पाता?
प्रशासन ने की राहत राशि की घोषणा
हादसे के बाद शिमला जिला प्रशासन की टीम भी सक्रिय हुई। एडीएम लॉ एंड ऑर्डर पंकज शर्मा और नायब तहसीलदार चंद वर्मा की अगुवाई में टीम विकासनगर अस्पताल पहुंची और घायलों से मुलाकात की।
प्रशासन की ओर से:
- सामान्य घायलों को 5-5 हजार रुपये
- रेफर किए गए घायलों को 10-10 हजार रुपये
- मृतकों के परिजनों को 25-25 हजार रुपये
की फौरी राहत राशि दी गई। Abdul Qayoom Cash Bag
उपायुक्त शिमला ने कहा कि हादसा भले ही उत्तराखंड में हुआ हो, लेकिन वहां के प्रशासन, पुलिस और अन्य एजेंसियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन में पूरी मदद की।
सवाल जो इस हादसे ने खड़े किए
यह हादसा सिर्फ सड़क सुरक्षा या प्रशासनिक व्यवस्था का मुद्दा नहीं है। यह घटना समाज के उस चेहरे को भी दिखाती है, जहां पैसे की चमक इंसानी संवेदनाओं पर भारी पड़ जाती है।
- क्या आपदा के समय हम पहले इंसान बनते हैं या मौका देखकर लाभ उठाने वाले?
- क्या लाशों और घायलों के बीच किसी का पैसों पर झगड़ना हमें आईना नहीं दिखाता?
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस और प्रशासन की भूमिका सराहनीय रही, जिन्होंने समय पर हस्तक्षेप कर हालात को संभाला और बैग को उसके असली मालिक तक पहुंचाया।
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