Valentine Week India: प्यार का जश्न या पश्चिमी संस्कृति का असर? जानिए पूरा सच
हर साल 7 फरवरी से 14 फरवरी तक मनाया जाने वाला Valentine Week India के युवाओं के बीच खासा लोकप्रिय हो चुका है। गुलाब, चॉकलेट, टेडी और वादों से भरा यह हफ्ता देखने में भले ही सिर्फ रोमांस का उत्सव लगे, लेकिन इसके पीछे कई सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहलू जुड़े हुए हैं। कोई इसे प्यार की आज़ादी मानता है, तो कोई भारतीय संस्कृति पर हमला। सच क्या है—आइए इसे आसान और साफ शब्दों में समझते हैं।
भारत में Valentine Week की शुरुआत कैसे हुई?
भारत में वैलेंटाइन वीक का कोई प्राचीन धार्मिक या सांस्कृतिक आधार नहीं है। यह परंपरा पश्चिमी देशों से आई, जहां 14 फरवरी को संत वैलेंटाइन की याद में प्रेम का उत्सव मनाया जाता है। कहा जाता है कि संत वैलेंटाइन ने रोमन सम्राट के आदेश के खिलाफ जाकर प्रेमी जोड़ों की शादी करवाई थी, जिसके कारण उन्हें सजा दी गई। बाद में यही दिन प्रेम और बलिदान का प्रतीक बन गया।
भारत में यह चलन खासतौर पर 1990 के दशक के बाद तेज़ी से फैला, जब आर्थिक उदारीकरण हुआ, विदेशी ब्रांड आए और टीवी चैनलों, फिल्मों व विज्ञापनों का प्रभाव बढ़ा।
Valentine Week युवाओं में क्यों लोकप्रिय हुआ ?
आज का युवा अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करना चाहता है। वैलेंटाइन वीक उन्हें यही मौका देता है।
- रोज़ डे पर गुलाब देकर इज़हार,
- प्रपोज डे पर दिल की बात,
- चॉकलेट डे पर मिठास,
- टेडी और प्रॉमिस डे पर अपनापन,
- और आखिर में वैलेंटाइन डे—जब रिश्तों को नाम मिलता है।
यह सिर्फ रोमांटिक पार्टनर तक सीमित नहीं रहा। अब लोग इसे दोस्तों, पति-पत्नी और यहां तक कि परिवार के साथ भी मनाने लगे हैं।
बाजार और कंपनियों की बड़ी भूमिका
सच यह भी है कि वैलेंटाइन वीक अब सिर्फ भावनाओं का त्योहार नहीं, बल्कि एक बड़ा बिज़नेस इवेंट बन चुका है।
चॉकलेट कंपनियां, फूलों की दुकानें, ग्रीटिंग कार्ड, ऑनलाइन गिफ्ट पोर्टल—सबके लिए यह कमाई का सुनहरा मौका होता है। विज्ञापनों के ज़रिए यह संदेश दिया जाता है कि अगर आपने गिफ्ट नहीं दिया, तो प्यार अधूरा है। यही वजह है कि कई लोग इसे “कमर्शियल फेस्टिवल” भी कहते हैं।
Valentine Week 2026 Dates
7 फरवरी – रोज़ डे
8 फरवरी – प्रपोज डे
9 फरवरी – चॉकलेट डे
10 फरवरी – टेडी डे
11 फरवरी – प्रॉमिस डे
12 फरवरी – हग डे
13 फरवरी – किस डे
14 फरवरी – वैलेंटाइन डे
पूरे हफ्ते को इस तरह बांटने का मकसद यही है कि प्यार के अलग-अलग भावों को अलग-अलग दिन मनाया जा सके।
Valentine Week का भारत में विरोध क्यों होता है?
Valentine Week भारत में जितना लोकप्रिय है, उतना ही विवादों में भी रहता है। हर साल कुछ संगठन इसका खुलकर विरोध करते हैं और इसे लेकर बहस छिड़ जाती है।
- संस्कृति का तर्क
विरोध करने वाले कहते हैं कि यह पश्चिमी संस्कृति है, जो भारतीय मूल्यों के खिलाफ है। उनका मानना है कि भारत में प्रेम की अपनी परंपराएं हैं—राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती—तो विदेशी त्योहार अपनाने की जरूरत नहीं। - सार्वजनिक नैतिकता का मुद्दा
कुछ समूहों का आरोप है कि वैलेंटाइन डे सार्वजनिक जगहों पर अश्लीलता और अनैतिकता को बढ़ावा देता है। इसी वजह से कई बार पार्कों और मॉल्स में कपल्स के साथ “मॉरल पुलिसिंग” की घटनाएं सामने आती हैं। - व्यापारीकरण का विरोध
कई लोग इसे बड़ी कंपनियों की मार्केटिंग चाल मानते हैं, जो युवाओं की भावनाओं का इस्तेमाल सिर्फ मुनाफे के लिए करती हैं। - पुलवामा हमले के बाद का नजरिया
14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा आतंकी हमले के बाद, कुछ लोग इस दिन को शहीदों को श्रद्धांजलि देने के रूप में मनाने की बात करते हैं और वैलेंटाइन डे के जश्न का विरोध करते हैं।
युवा क्या सोचते हैं?
Valentine Week Youth Culture को लेकर युवाओं की सोच बिल्कुल अलग है। उनका मानना है कि प्यार कोई अपराध नहीं है और वैलेंटाइन वीक स्वतंत्र अभिव्यक्ति का प्रतीक है। युवाओं का कहना है कि जब भारतीय समाज शादी और रिश्तों की बात करता है, तो फिर प्यार की बात करने में बुराई क्या है?
भारतीय रंग में ढलता वैलेंटाइन वीक
दिलचस्प बात यह है कि भारत में वैलेंटाइन वीक अब पूरी तरह विदेशी नहीं रहा। कई लोग इसे अपने तरीके से मनाते हैं—कोई दोस्तों के साथ, कोई पति-पत्नी के रूप में, तो कोई इसे सिर्फ खुशियां बांटने का बहाना मानता है। कहीं-कहीं यह “लव नहीं, रिस्पेक्ट डे” बन जाता है।
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