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अत्यंत दुखद: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक कुमार साहनी का निधन

कुमार साहनी का 83 साल की उम्र में कोलकाता के एक अस्पताल में निधन

राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित फिल्म निर्देशक और लेखक कुमार साहनी का आज सुबह पश्चिम बंगाल के डकोरिया स्थित एएमआरआई अस्पताल में निधन हो गया। उनकी स्वास्थ्य स्थिति बीते दिनों में बहुत खराब हो गई थी, और उन्हें लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, हाईपरटेंशन, और सेप्सिस की दिक्कत थी। उन्हें अस्पताल के आईसीयू में ले जाया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। इसी बीच शनिवार की रात करीब 10:30 बजे उनकी मौत हो गयी।

1940 में अविभाजित भारत में सिंध के लरकाना में जन्म लेने वाले कुमार साहनी 1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बाद परिवार सहित मुंबई आ गए थे। साहनी के परिवार में उनकी पत्नी और दो बेटियां हैं। निधन से परिवार शोकाकुल है। साहनी की उम्र 83 वर्ष थी।

अपनी फिल्म “माया दर्पण” (1972) के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके निर्देशक कुमार साहनी के निधन की सूचना साहनी की करीबी दोस्त और उनके साथ ‘ख्याल गाथा’ और ‘कस्बा’ जैसी फिल्मों में काम कर चुकीं अभिनेत्री मीता वशिष्ठ द्वारा दी गई।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को फिल्म निर्माता कुमार शाहनी के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने ट्विटर पर कुमार शाहनी श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, “कोलकाता में प्रसिद्ध फिल्म निर्माता कुमार शाहनी के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। शाहनी एक प्रसिद्ध और सशक्त फिल्म निर्देशक थे, जिनकी भारतीय समानांतर सिनेमा में मजबूत उपस्थिति थी। यह वाकई भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक बड़ी क्षति है।उनके परिवार, दोस्तों और अनुयायियों के प्रति मेरी संवेदनाएं”

 

साहनी की अंतिम यात्रा में उनके समर्थन में कई फिल्म उत्पादक, निर्माता, अभिनेता, और संगीतकार भाग लेने पहुंचे। उन्हें उनके योगदान और उनकी कला के प्रति समर्पित रहने के लिए याद किया जा रहा है। साहनी का अंतिम संस्कार उनके परिवार के उपस्थिति में हुआ, जिसमें उनके साथी फिल्मकारों, दोस्तों, और प्रशंसकों ने भी शिरकत ली। उन्हें शांति मिले, यही हम सभी की प्रार्थना है।

साहनी ने समानान्तर सिनेमा में अपनी विशेष छाप छोड़ी है उन्होंने अपने अद्वितीय दृष्टिकोण और रचनात्मकता के माध्यम से कई महत्वपूर्ण फिल्मों को प्रेरित किया था।  फिल्म माया दर्पण, तरंग और डॉक्यूमेंट्री भवन्तराना के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। भारतीय सिनेमा में अपने योगदान के लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा।

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