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PMLA क्या है? जिसके तहत अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) आज PMLA अदालत में अरविंद केजरीवाल से पूछताछ के लिए हिरासत की मांग करेगी। उधर, केजरीवाल ने गुरुवार शाम अपनी गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसपर शीर्ष अदालत आज मामले की सुनवाई करेगी।

बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री को शराब घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया है। केजरीवाल को ED नें जिस कानून के तहत गिरफ्तार किया है, उससे उनके सामने कई सारी मुश्किलें आ सकती हैं। विस्तार से इसके बारे में बताते हैं।

क्या है मनी लॉन्ड्रिंग?

आसान भाषा में कहें तो गैर-कानूनी तरीकों से कमाए हुए पैसों को छिपाने की कोशिश को मनी लॉन्ड्रिंग कहते है। यह अवैध कार्य है जो काले धन को सफेद में बदलती है। इसी काले धन की हेरा-फेरी करने वाले को लाउन्डर कहा जाता है।

Prevention of Money Laundering Act (PMLA)

जमानत मिलना होता है मुश्किल

PMLA में जमानत मिलना बहुत मुश्किल होता है। यह कानून 2002 में बनाया गया और जुलाई 2005 में लागू किया गया था। इस कानून का उद्देश्य मुख्य रुप से मनी लॉन्ड्रिंग को रोकना है। इसके दायरे में बैंक, म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियां को 2012 में शामिल किया गया। इस कानून के अंतर्गत अपराधों की जांच की जिम्मेदारी ED की होती है।

क्या कहता है यह कानून?

इस कानून की धारा 45 का जिक्र मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पहले भी किया था। इस धारा में जमानत मिलना काफी मुश्किल होता है। आरोपी व्यक्ति की रिहाई कराना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। PMLA के तहत सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है।

आसान भाषा में कहें तो PMLA के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी बेगुनाही साबित करना होगा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप गलत हैं। हालांकि, यह साबित करना बहुत मुश्किल हो सकता है।

Shree Om Singh
Author: Shree Om Singh

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