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महिला तटरक्षक बल को मिले स्थाई कमीशन-सुप्रीम कोर्ट

सोमवार को भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसमें उन्होंने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) को समझौता करने के लिए यह सुनिश्चित करने को कहा है कि महिलाओं को भी स्थाई कमीशन मिले।सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी भारतीय तटरक्षक बल की अधिकारी प्रियंका त्यागी की एक याचिका की सुनवाई के दौरान आई। याचिका में उन्होंने योग्य महिला शार्ट सर्विस कमीशन अधिकारीयों को स्थायी कमीशन देने की मांग की है। 

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई में तीन जजों की पीठ ने अटॉर्नी-जनरल आर. वेंकटरमणी को संबोधित करते हुए कहा, “महिलाओं को उनके हाल पर छोड़ा नहीं जा सकता। अगर आप नहीं कर सकते तो हम करेंगे। तो उस पर एक नजर डालें”। पहले भी एक सुनवाई में पीठ ने कहा था आप नारी शक्ति की बात करते हैं तो उसे प्रोत्साहित करें। कोर्ट ने ऐसी नीति बनाने की सिफारिश की जिससे महिलाओं के साथ निष्पक्ष व्यवहार हो। 

इससे पहले वेंकटरमणी ने कार्यात्मक और परिचालन संबंधी कठिनाइयों का हवाला देते हुए महिला शार्ट सर्विस कमीशन अधिकारीयों को स्थाई कमीशन का दर्जा देने में आपत्ति की थी। जिस पर मुख्य न्यायधीश ने कहा था इस तरह के तर्क 2024 में मायने नहीं रखते। 

सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद, भारतीय तटरक्षक बल द्वारा गठित बोर्ड महिलाओं के स्थाई कमीशन की प्रक्रिया को तेजी से लागू करने के लिए नीतिगत कदम उठाने की दिशा में जिम्मेदारी से काम करेगा। यह निर्णय महिलाओं के समाज में उनके समान और उचित स्थान की प्रोत्साहना करेगा।

 

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