आज के दौर में, जब फिल्में तेजी से बदलते दृश्य, हाई-ऑक्टेन एक्शन और मसालेदार डायलॉग्स से भरी होती हैं, वहीं कुछ फिल्में ऐसी भी होती हैं जो धीरे-धीरे दिल में उतरती हैं _ चुपचाप, लेकिन गहराई से। Kaalidhar Laapata उन्हीं फिल्मों में से एक है। यह फिल्म सिर्फ एक व्यक्ति की गुमशुदगी की कहानी नहीं है, बल्कि उस समाज का आईना है जहाँ आम आदमी की आवाज़ कहीं गुम होती जा रही है।
क्या होता है जब एक साधारण व्यक्ति अचानक गायब हो जाता है, और उसके पीछे न कोई सुराग होता है, न ही कोई चर्चा? कौन खोजता है उसे? कौन सवाल करता है सिस्टम से? इन्हीं सवालों से टकराती है फिल्म Kaalidhar Laapata, जिसमें अभिषेक बच्चन एक बार फिर अपनी दमदार मौजूदगी से दर्शकों के दिल में उतर जाते हैं। ‘दोस्ती और सपनों की कोई उम्र नहीं होती’, अभिषेक बच्चन की फिल्म ने छू लिया लोगों का दिल ।

