Tarique Rahman oath: बांग्लादेश में तारिक़ रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक़ रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है।
Tarique Rahman oath: बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक़ रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के बाद बीएनपी ने मंगलवार को नई सरकार का गठन किया। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्हें प्रधानमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
शेख़ हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के पतन के बाद बनी अंतरिम सरकार के 18 महीने पूरे होने पर यह आम चुनाव कराया गया था। चुनाव के नतीजों में बीएनपी को स्पष्ट जनादेश मिला, जिसके बाद सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ हुआ।
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Toggleसंसद में Tarique Rahman oath
मंगलवार को ही दिन में नव-निर्वाचित सांसदों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरुद्दीन ने 13वीं राष्ट्रीय संसद के लिए चुने गए सदस्यों को शपथ दिलाई। 299 सीटों वाले सदन में बीएनपी ने अकेले 209 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी दलों के साथ गठबंधन ने कुल 212 सीटों पर जीत दर्ज की। इस तरह पार्टी ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया।
संसद में बीएनपी सांसदों ने सर्वसम्मति से तारिक़ रहमान को अपना नेता चुना और प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया। इसके तुरंत बाद राष्ट्रपति ने उन्हें औपचारिक रूप से शपथ दिलाई।
Tarique Rahman oath के दौरान संवैधानिक विवाद
हालांकि शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक नया राजनीतिक विवाद भी सामने आया। सांसदों को शपथ दिलाने के साथ-साथ उन्हें प्रस्तावित ‘संविधान सुधार परिषद’ के सदस्य के रूप में भी शपथ दिलाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस पर बीएनपी ने आपत्ति जताई।
संसद भवन में समारोह से पहले बीएनपी स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने पार्टी सांसदों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि वे संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि यह परिषद अभी मौजूदा संविधान का हिस्सा नहीं है और इसे शामिल करने के लिए विधिवत संवैधानिक संशोधन जरूरी है।
सलाहुद्दीन अहमद ने कहा, “हममें से कोई भी संवैधानिक सुधार परिषद का चुना हुआ सदस्य नहीं है। अगर जनमत-संग्रह के फैसले के आधार पर ऐसी परिषद बनती है, तो पहले उसे संविधान में शामिल किया जाना चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि उसके सदस्य किस पद की शपथ लेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी अब तक संविधान का पालन करती आई है और आगे भी करती रहेगी।
उनके बयान के समय पार्टी अध्यक्ष तारिक़ रहमान और अन्य निर्वाचित सांसद भी मौजूद थे। इसके बाद बीएनपी सांसदों ने केवल संसद सदस्य के रूप में शपथ ली।
सोशल मीडिया पर चर्चा
बीएनपी के इस रुख पर सोशल मीडिया में भी बहस छिड़ गई है। पत्रकार इंद्रजीत कुंडू ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि बीएनपी ने अंतरिम सरकार के उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है, जिसमें सांसदों से अपेक्षा की गई थी कि वे संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में भी शपथ लें।
इस परिषद का उद्देश्य हालिया चुनाव के साथ कराए गए जनमत-संग्रह के आधार पर संविधान में बदलाव करना बताया जा रहा है। बीएनपी का कहना है कि परिषद से जुड़े प्रावधान अभी संविधान में शामिल नहीं हैं और इस पर संसद में विस्तृत चर्चा आवश्यक है।
अन्य दलों का रुख अलग
जहां बीएनपी सांसदों ने परिषद की शपथ लेने से इनकार किया, वहीं जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिज़ंस पार्टी (एनसीपी) के छह निर्वाचित सांसदों ने संसद सदस्य के साथ-साथ संविधान सुधार परिषद के सदस्य के रूप में भी शपथ ली। इससे यह संकेत मिलता है कि नए संसद सत्र में संवैधानिक मुद्दों पर व्यापक बहस और राजनीतिक मतभेद देखने को मिल सकते हैं।
आगे की राह
बीएनपी की ऐतिहासिक जीत के साथ बांग्लादेश में नई राजनीतिक पारी की शुरुआत हो चुकी है। अंतरिम शासन के बाद स्थायी सरकार का गठन देश के लिए अहम मोड़ माना जा रहा है। हालांकि संवैधानिक सुधार परिषद को लेकर उठे विवाद से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर तीखी बहस और राजनीतिक खींचतान जारी रह सकती है।
फिलहाल, तारिक़ रहमान के नेतृत्व में नई सरकार के सामने आर्थिक स्थिरता, राजनीतिक संतुलन और संवैधानिक स्पष्टता सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती होगी।
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