Narendra Modi Israel Visit: अरब मीडिया में क्यों मची हलचल? बदलते Middle East Politics में भारत की नई रणनीति
प्रधानमंत्री Narendra Modi Israel Visit को लेकर अरब मीडिया में व्यापक चर्चा हो रही है। यह यात्रा केवल India Israel Relations तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे बदलते Middle East Politics और वैश्विक शक्ति संतुलन के संदर्भ में देखा जा रहा है।
इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ गर्मजोशी भरी मुलाकात और इसराइली संसद Knesset Speech के दौरान दिए गए संबोधन ने क्षेत्रीय समीकरणों पर नई बहस छेड़ दी है।
अरब मीडिया का विश्लेषण: रणनीतिक बदलाव का संकेत
कई अरब विश्लेषकों का मानना है कि भारत की विदेश नीति अब पारंपरिक वैचारिक रुख से हटकर “Interest Based Diplomacy” की दिशा में आगे बढ़ रही है।
ऐतिहासिक रूप से भारत Two State Solution का समर्थक रहा है और फ़लस्तीन के साथ उसके मजबूत कूटनीतिक संबंध रहे हैं। लेकिन मौजूदा दौर में भारत और इसराइल के बीच रक्षा, तकनीक और साइबर सुरक्षा में बढ़ती साझेदारी को क्षेत्रीय रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
अरब मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि यह साझेदारी आने वाले समय में एशिया और मध्य पूर्व की राजनीति में नए ध्रुवीकरण को जन्म दे सकती है।
Gaza War और भारत का रुख
Gaza War के संदर्भ में भी इस यात्रा को देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने 7 अक्टूबर 2023 के हमले का उल्लेख करते हुए नागरिकों की हत्या की निंदा की और इसराइल के साथ एकजुटता व्यक्त की।
हालांकि, अरब मीडिया ने इस बात को भी रेखांकित किया कि ग़ज़ा में मानवीय संकट और इसराइल पर लगे गंभीर आरोपों के बीच भारत का यह स्पष्ट समर्थन बहस का विषय बना है।
भारत के विपक्षी दलों ने भी उम्मीद जताई थी कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में मानवीय संकट का उल्लेख करेंगे।
Pakistan Turkey Saudi Equation पर प्रभाव?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भारत और इसराइल के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी क्षेत्र में संभावित Pakistan Turkey Saudi समीकरण को संतुलित करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इसराइल की उन्नत रक्षा तकनीक और एयर डिफेंस सिस्टम में रुचि रखता है। वहीं इसराइल के लिए भारत जैसा बड़ा और परमाणु शक्ति संपन्न देश रणनीतिक गहराई प्रदान करता है।
Global South Diplomacy में भारत की भूमिका
अरबी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने इस बात पर जोर दिया कि 7 अक्टूबर के बाद कई पश्चिमी नेता इसराइल का दौरा कर चुके हैं, लेकिन Global South Diplomacy के तहत एशिया या अफ्रीका के बड़े नेताओं की यात्राएँ सीमित रही हैं।
ऐसे में मोदी की यात्रा को इसराइल के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समर्थन के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
बदलती India Foreign Policy
विश्लेषकों के अनुसार, भारत की India Foreign Policy अब संतुलन की नई परिभाषा गढ़ रही है।
एक ओर भारत इसराइल के साथ रक्षा और टेक्नोलॉजी साझेदारी बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर खाड़ी देशों और ईरान के साथ ऊर्जा और व्यापारिक संबंध भी बनाए हुए है।
भारत उन देशों में भी शामिल रहा है जिन्होंने वेस्ट बैंक में विस्तारवादी कदमों की आलोचना की थी। इससे संकेत मिलता है कि भारत पूर्ण रूप से एकतरफा रुख अपनाने के बजाय बहु-आयामी रणनीति पर काम कर रहा है।
Arab Media Reaction: संदेश क्या है?
अरब मीडिया कवरेज से तीन प्रमुख संकेत निकलते हैं:
- भारत-इसराइल साझेदारी अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि सामरिक आयाम ले चुकी है।
- यह साझेदारी क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है।
- भारत अपनी विदेश नीति को वैचारिक प्रतिबद्धताओं के बजाय रणनीतिक हितों के अनुसार ढाल रहा है।
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