Fighting Iran on its soil is a silly harakiri
Iran War: ईरान का प्राकृतिक किला: पहाड़ और रेगिस्तान ने ट्रंप की रणनीति को बनाया जोखिम भरा
ईरान का कठिन भूगोल—ऊंचे पहाड़ और विशाल रेगिस्तान—उसे एक प्राकृतिक सैन्य किला बनाते हैं। खार्ग द्वीप और तेल निर्यात केंद्रों पर हमला करना अमेरिका के लिए आसान हो सकता है, लेकिन कब्जा बनाए रखना बेहद महंगा और खतरनाक साबित होगा।
ईरान का भूगोल: प्राकृतिक सुरक्षा कवच
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का भूगोल चर्चा का विषय बना हुआ है। इसे अक्सर “प्राकृतिक किला” कहा जाता है। यहां की ऊंची पहाड़ियां और विशाल रेगिस्तान किसी भी बाहरी सेना के लिए बड़ी चुनौती हैं। अमेरिका ईरान पर जमीनी युद्ध की धमकी देता है, लेकिन ईरान की भौगोलिक बनावट विदेशी सेनाओं की योजनाओं को बिगाड़ सकती है।
पहाड़ और रेगिस्तान: आक्रमणकारियों के लिए जाल
ईरान के पश्चिम और उत्तर में फैली ऊंची पहाड़ियां संकरी घाटियों के कारण किसी भी आक्रमणकारी सेना की गति को धीमा कर देती हैं। वहीं देश के मध्य में फैले विशाल रेगिस्तान लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बेहद कठिन हैं। यहां की गर्मी, निर्जन क्षेत्र और खराब सतह भारी सैन्य उपकरणों की आवाजाही को लगभग असंभव बना देते हैं।
करीब 16 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला ईरान न सिर्फ आकार में बड़ा है, बल्कि इसके सैन्य ठिकाने भी पहाड़ी और आबादी वाले इलाकों में फैले हुए हैं। यही कारण है कि किसी भी जमीनी हमले को लंबा, महंगा और जोखिम भरा माना जाता है।
गुरिल्ला रणनीति और थकाकर हराने की नीति
ईरान की सैन्य रणनीति “Attrition Warfare” यानी दुश्मन को थकाकर हराने पर आधारित है। पहाड़ों और कठिन इलाकों का इस्तेमाल कर गुरिल्ला युद्ध किया जाता है। इतिहास गवाह है कि ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी दुश्मन सेनाएं इस भूगोल में उलझ गई थीं। अमेरिका जैसे देश के लिए हवाई हमले संभव हैं, लेकिन पूरे देश पर नियंत्रण स्थापित करना बेहद चुनौतीपूर्ण है।
खार्ग द्वीप: ईरान की ताकत और कमजोरी
ईरान के दक्षिण-पश्चिम में स्थित खार्ग द्वीप इस समय सबसे संवेदनशील बिंदु है। फारस की खाड़ी में मौजूद यह छोटा सा द्वीप ईरान के तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है। यहां से देश का लगभग 90-95% तेल बाहर जाता है। यह बुशहर तट से महज 55 किलोमीटर दूर है, जिससे यह सीधे ईरानी मुख्य भूमि की सैन्य पहुंच में रहता है।
कब्जा करना आसान, टिके रहना मुश्किल
अमेरिका के लिए खार्ग द्वीप पर हमला करना संभव है, चाहे वह हवाई हमले हों या समुद्री ऑपरेशन। लेकिन असली चुनौती इसे कब्जे में बनाए रखना होगी।
ईरान ने यहां माइन्स, एयर डिफेंस और MANPADS तैनात किए हैं। मुख्य भूमि की नजदीकी के कारण मिसाइल, ड्रोन और तोपों से लगातार हमले का खतरा रहेगा।
सप्लाई लाइन बनाए रखना और सैनिकों को सुरक्षित निकालना बेहद कठिन होगा। ईरान तेल सुविधाओं को खुद नुकसान पहुंचाकर भी दुश्मन के लिए हालात और मुश्किल बना सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दूरी, लेकिन खतरा बरकरार
खार्ग द्वीप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दूर जरूर है, लेकिन खाड़ी के अंदर इसकी स्थिति इसे और संवेदनशील बनाती है। यहां किसी भी सैन्य कार्रवाई का सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है।
ईरान का कठिन भूगोल और रणनीतिक तैयारी उसे एक मजबूत रक्षात्मक शक्ति बनाते हैं। अमेरिका के लिए सीमित हवाई या समुद्री हमले संभव हो सकते हैं, लेकिन पूरी सैन्य जीत या लंबे समय तक कब्जा बनाए रखना, खासकर खार्ग द्वीप जैसे संवेदनशील इलाके में, बेहद महंगा और जोखिम भरा साबित होगा।
