Iran War: ईरान युद्ध के बीच रूस का बड़ा ऑफर: Su-57 से भारत की वायु ताकत होगी दोगुनी, चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता
रूस ने भारत को 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 देने का प्रस्ताव रखा है। जानिए इससे भारतीय वायुसेना की ताकत कैसे बढ़ेगी और चीन-पाकिस्तान पर इसका क्या असर पड़ेगा।
ईरान में जारी तनाव और बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रूस ने भारत को अपने अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान Su-57 देने का प्रस्ताव रखा है। अगर यह डील होती है, तो आने वाले समय में भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा हो सकता है और दक्षिण एशिया में भारत की बढ़त और मजबूत हो जाएगी।
पाकिस्तान-चीन की बढ़ती नजदीकी से भारत की चिंता
दरअसल, पाकिस्तान लंबे समय से चीन से पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट हासिल करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे विमान रडार से बच निकलने की क्षमता रखते हैं, जिसे स्टील्थ तकनीक कहा जाता है। अगर पाकिस्तान को यह तकनीक मिलती है, तो यह भारत के लिए एक चुनौती बन सकती है।
इसी खतरे को देखते हुए भारत भी अपनी अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीक को मजबूत करने में जुटा है। भारत का स्वदेशी AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्ट इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसे पूरी तरह तैयार होने में अभी कई साल लग सकते हैं।
रूस का ऑफर क्या है?
रूस ने भारत को करीब दो स्क्वाड्रन (लगभग 36–40) Su-57 फाइटर जेट देने का प्रस्ताव दिया है। अगर इस साल के अंत तक दोनों देशों के बीच समझौता हो जाता है, तो इन विमानों की डिलीवरी 2027-28 से शुरू हो सकती है और 2030 तक पूरी हो सकती है।
इस प्रस्ताव को भारत के लिए एक “अंतरिम समाधान” के रूप में देखा जा रहा है, यानी जब तक स्वदेशी AMCA तैयार नहीं होता, तब तक Su-57 भारतीय वायुसेना की ताकत को बढ़ा सकता है।
Su-57 क्यों है खास?
Su-57 एक बेहद आधुनिक और ताकतवर फाइटर जेट है, जिसमें कई उन्नत तकनीकें शामिल हैं:
स्टील्थ तकनीक: रडार से बचने की क्षमता
सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के तेज रफ्तार उड़ान
AESA रडार: एक साथ कई दुश्मनों को ट्रैक करने की क्षमता
360 डिग्री नजर: पायलट को चारों तरफ की पूरी जानकारी
सुपरमैन्युवरेबिलिटी: हवा में तेज और जटिल मूवमेंट
इंटरनल वेपन बे: हथियार अंदर रखने से स्टील्थ बरकरार
मल्टी-रोल क्षमता: हवा से हवा और जमीन पर हमला दोनों
AI और नेटवर्क सिस्टम: दूसरे प्लेटफॉर्म्स से कनेक्ट होकर ऑपरेशन
लंबी दूरी और भारी पेलोड: ज्यादा हथियार और लंबी उड़ान क्षमता
इंजन अपग्रेड की योजना
फिलहाल Su-57 में AL-41F1 इंजन का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन रूस एक और उन्नत इंजन (Izdeliye 30) पर काम कर रहा है। रूस ने भरोसा दिया है कि 2030 के बाद इन विमानों को नए इंजन से अपग्रेड किया जा सकता है, जिससे उनकी ताकत और बढ़ जाएगी।
रूस की उत्पादन योजना
रूस अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है और 2027 तक हर साल 16–20 Su-57 बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसका मकसद अपनी जरूरतों के साथ-साथ भारत जैसे देशों की मांग को भी पूरा करना है।
चुनौतियां भी हैं
हालांकि, इस प्रोग्राम को कुछ मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा है। 2025 में उत्पादन में कमी आई थी, क्योंकि रूस को पश्चिमी देशों के पार्ट्स की जगह अपने खुद के सिस्टम विकसित करने पड़े। लेकिन इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
HAL और ‘मेक इन इंडिया’ की भूमिका
भारत इस डील को सिर्फ खरीद तक सीमित नहीं रखना चाहता। सरकार चाहती है कि इस प्रोजेक्ट में Hindustan Aeronautics Limited (HAL) की भी भागीदारी हो और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत कुछ उत्पादन भारत में ही किया जाए।
HAL का मानना है कि उसकी मौजूदा सुविधाओं का करीब 50% हिस्सा Su-57 के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए रूस से तकनीक ट्रांसफर (ToT) जरूरी होगा।
अंतिम फैसला क्या होगा?
फिलहाल भारत सरकार रूस से पूरी लागत और तकनीकी शर्तों का इंतजार कर रही है। अंतिम निर्णय इन्हीं पहलुओं पर निर्भर करेगा। भारत अब रक्षा सौदों में सिर्फ खरीद पर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और घरेलू निर्माण पर भी ज्यादा ध्यान दे रहा है।
अगर यह डील पूरी होती है, तो भारतीय वायुसेना को एक बड़ी ताकत मिलेगी। इससे न सिर्फ भारत की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि क्षेत्र में उसकी रणनीतिक बढ़त भी कायम रहेगी। वहीं चीन और पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा संदेश होगा कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह तैयार है।
