अब तक 1,200 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश, सोना-चांदी, शराब, ड्रग्स और चुनावी फ्रीबीज जब्त किए जा चुके हैं।
Tamil Nadu Elections 2026 से पहले राज्य में सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गयी है। Election Commission of India ने सख्ती दिखाते हुए राज्यभर में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। अब तक 1,200 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश, सोना-चांदी, शराब, ड्रग्स और चुनावी फ्रीबीज जब्त किए जा चुके हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो ₹169.85 करोड़ नकद और ₹650.87 करोड़ के सोना-चांदी की बरामदगी हुई है। इसके अलावा भारी मात्रा में शराब और अन्य प्रलोभन सामग्री भी पकड़ी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी जब्ती यह संकेत देती है कि चुनाव में पैसे का प्रभाव अभी भी गहराई तक मौजूद है। यही वजह है कि आयोग ने इस बार निगरानी तंत्र को और मजबूत किया है। फ्लाइंग स्क्वॉड, चेकपोस्ट और वीडियो सर्विलांस टीमों को हर जिले में सक्रिय किया गया है।
पीएम का संबोधन आचार संहिता के खिलाफ है?
18 अप्रैल को प्रधानमंत्री Narendra Modi के राष्ट्र के नाम संबोधन ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। महिला आरक्षण बिल पर दिए गए इस भाषण को लेकर 700 से ज्यादा नागरिकों ने चुनाव आयोग को शिकायत भेजी है।
इनमें पूर्व ब्यूरोक्रेट्स, सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार शामिल हैं। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान इस तरह का संबोधन मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है, जो आदर्श आचार संहिता (MCC) के खिलाफ हो सकता है।
हालांकि अभी तक इस मामले में आयोग की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं आया है, लेकिन इसने राजनीतिक बहस को जरूर तेज कर दिया है।
क्या सरकारी मीडिया का इस्तेमाल निष्पक्षता पर सवाल है?
इस विवाद का सबसे अहम पहलू यह है कि प्रधानमंत्री का संबोधन दूरदर्शन, संसद टीवी और ऑल इंडिया रेडियो जैसे सरकारी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुआ।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि चुनाव के दौरान सरकारी मीडिया का इस तरह इस्तेमाल सत्ताधारी दल को अप्रत्यक्ष फायदा दे सकता है। उनका तर्क है कि अगर ऐसे प्रसारण की अनुमति दी जाती है, तो अन्य राजनीतिक दलों को भी समान अवसर मिलना चाहिए।
यह मुद्दा अब निष्पक्ष चुनाव और मीडिया की भूमिका को लेकर बड़ी बहस बनता जा रहा है।
विजय की एंट्री चुनाव को दिलचस्प बनाएगी?
तमिल फिल्म इंडस्ट्री के बड़े चेहरे और अब नेता बन चुके विजय थलापति ने भी चुनावी समीकरणों को बदल दिया है। 20 अप्रैल को तिरुवल्लूर में उनके रोड शो में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
विजय की लोकप्रियता खासकर युवाओं के बीच काफी ज्यादा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी एंट्री पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकती है और मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकती है।
हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी लोकप्रियता वोट में कितनी तब्दील होती है।
क्यों बढ़ रहे हैं आरोप-प्रत्यारोप?
जैसे-जैसे Tamil Nadu Elections 2026 नजदीक आ रहे हैं, नेताओं के बीच बयानबाजी भी तेज होती जा रही है। Mamata Banerjee ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार के लिए सरकारी मशीनरी और संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
वहीं Rahul Gandhi ने तमिलनाडु में एक रैली के दौरान कहा कि भाजपा यहां “रिमोट कंट्रोल” सरकार बनाना चाहती है। उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इसी तरह सत्ता का समीकरण बदला गया।
इन आरोपों ने चुनावी माहौल को और ज्यादा राजनीतिक बना दिया है।
हाई कोर्ट ने क्यों उठाए सवाल?
इस बीच Madras High Court ने भी एक अहम दखल दिया है। कोर्ट ने विजय से जुड़े एक मामले में चुनाव आयोग और आयकर विभाग को नोटिस जारी किया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अलग-अलग विधानसभा सीटों के हलफनामों में उनकी संपत्ति के आंकड़ों में करीब 100 करोड़ रुपए का अंतर है।
यह मामला अब चुनाव के बीच पारदर्शिता और उम्मीदवारों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है।
Tamil Nadu Elections 2026 संसाधनों की भी जंग है?
Tamil Nadu Elections 2026 अब सिर्फ वोटों का मुकाबला नहीं रह गया है। इसमें पैसे, प्रभाव और रणनीति की भी बड़ी भूमिका नजर आ रही है।
इतनी बड़ी जब्ती यह साफ दिखाती है कि चुनाव में फ्रीबीज और धनबल का असर अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
चुनाव आयोग की सख्ती के बावजूद यह सवाल बना हुआ है कि क्या इन कदमों से पूरी तरह निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो पाएगा।
आखिर किसके पक्ष में जाएगा माहौल?
अब तमिलनाडु की जनता के सामने कई विकल्प और कई सवाल हैं। एक तरफ सख्त निगरानी और बड़े खुलासे हैं, तो दूसरी ओर नए चेहरे और तीखी राजनीतिक बयानबाजी।
आने वाले दिनों में चुनाव आयोग के फैसले, कोर्ट की कार्रवाई और राजनीतिक दलों की रणनीति यह तय करेगी कि चुनाव किस दिशा में जाएगा। इतना तय है कि इस बार तमिलनाडु का चुनाव सिर्फ परिणाम के लिए नहीं, बल्कि अपने पूरे घटनाक्रम के कारण भी याद रखा जाएगा।
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