Lenskart Controversy: तिलक-बिंदी को लेकर उठा सवाल! कंपनी ने बदली नीति, Lenskart ने मांगी माफी
Lenskart Controversy: कभी-कभी एक छोटा सा मुद्दा इतना बड़ा रूप ले लेता है कि उसका असर सीधे कंपनी के कारोबार और छवि दोनों पर दिखाई देने लगता है। लेंसकार्ट के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। एक कथित ड्रेस कोड दस्तावेज के वायरल होने के बाद जो विवाद शुरू हुआ, वह देखते ही देखते सोशल मीडिया से निकलकर शेयर बाजार तक पहुंच गया।
कंपनी के शेयरों में करीब 5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के लिए यह एक साफ संकेत था कि ब्रांड की छवि पर पड़ा असर सीधे बाजार के भरोसे को प्रभावित करता है।
क्या था पूरा मामला
विवाद की शुरुआत एक ऐसे दस्तावेज से हुई, जिसे कंपनी की आंतरिक ग्रूमिंग पॉलिसी बताया गया। इसमें दावा किया गया कि कर्मचारियों को कुछ धार्मिक प्रतीकों जैसे बिंदी और तिलक पहनने की अनुमति नहीं है। जैसे ही यह जानकारी सोशल मीडिया पर फैली, लोगों की प्रतिक्रिया तेज हो गई।
कई यूजर्स ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए कंपनी पर सवाल उठाए। कुछ ने इसे भेदभावपूर्ण बताया तो कुछ ने सीधे तौर पर कंपनी के बहिष्कार की मांग तक कर दी।
बढ़ता दबाव और कंपनी की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर बढ़ते विरोध के बीच कंपनी के सामने स्थिति संभालना जरूरी हो गया। ऐसे में लेंसकार्ट के संस्थापक और सीईओ पीयूष बंसल सामने आए और उन्होंने साफ किया कि जो दस्तावेज वायरल हो रहा है, वह पुराना है और वर्तमान नीति को नहीं दर्शाता।
उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी की मौजूदा पॉलिसी में किसी भी धार्मिक प्रतीक पर कोई प्रतिबंध नहीं है। साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले से हुई असहजता के लिए माफी भी मांगी।
नई पॉलिसी ने क्या बदला
विवाद को शांत करने के लिए कंपनी ने एक नया ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ जारी किया। इसमें साफ तौर पर कहा गया कि कर्मचारी अपनी आस्था से जुड़े प्रतीकों को पहन सकते हैं।
इसमें बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा, हिजाब और पगड़ी जैसे सभी प्रतीकों को अनुमति दी गई है। कंपनी ने अपने बयान में कहा कि वह भारत की विविधता और संस्कृति का सम्मान करती है और इसे अपनी पहचान का हिस्सा मानती है।
शेयर बाजार पर पड़ा असर
हालांकि कंपनी ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन बाजार पर इसका असर साफ दिखाई दिया। शेयर की कीमत में गिरावट आई और कंपनी का मार्केट कैप भी 90 हजार करोड़ रुपये के नीचे आ गया।
दिलचस्प बात यह है कि इससे कुछ ही दिन पहले कंपनी का शेयर अपने ऑल टाइम हाई पर था। यानी विवाद ने एक मजबूत ग्रोथ ट्रेंड को अचानक झटका दे दिया।
ब्रांड इमेज कितनी मायने रखती है
यह पूरा मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि आज के समय में ब्रांड की छवि कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। खासकर ऐसे देश में जहां धर्म और संस्कृति लोगों की पहचान का बड़ा हिस्सा हैं, वहां इस तरह के मुद्दे बेहद संवेदनशील हो जाते हैं।
कंपनियों को सिर्फ अपने प्रोडक्ट या सर्विस पर ही नहीं, बल्कि अपनी नीतियों और संचार पर भी उतना ही ध्यान देना पड़ता है।
सोशल मीडिया की ताकत
इस घटना ने सोशल मीडिया की ताकत को भी साफ तौर पर सामने रखा। एक दस्तावेज वायरल हुआ और कुछ ही घंटों में यह राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन गया।
आज के डिजिटल दौर में कोई भी जानकारी कितनी तेजी से फैल सकती है और उसका असर कितना बड़ा हो सकता है, यह इस मामले से साफ समझा जा सकता है।
कंपनियों के लिए सबक
लेंसकार्ट का यह मामला सिर्फ एक कंपनी की कहानी नहीं है, बल्कि यह हर उस संगठन के लिए एक सबक है जो बड़े स्तर पर काम कर रहा है।
पारदर्शिता, स्पष्ट संवाद और समय पर प्रतिक्रिया देना अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुका है। अगर किसी भी तरह का भ्रम पैदा होता है, तो उसे तुरंत दूर करना जरूरी होता है।
भरोसा ही सबसे बड़ी पूंजी
अंत में बात सिर्फ शेयर कीमत या विवाद की नहीं है, बल्कि भरोसे की है। एक कंपनी की सबसे बड़ी ताकत उसका ब्रांड और ग्राहकों का विश्वास होता है।
लेंसकार्ट ने माफी मांगकर और नई पॉलिसी लाकर स्थिति को संभालने की कोशिश जरूर की है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह अपने ग्राहकों और निवेशकों का भरोसा पूरी तरह वापस जीत पाती है या नहीं।
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