Bagalamukhi Jayanti 2026: आज की ये साधना बदल सकती है खेल—जानिए Powerful Mantra और सही मुहूर्त
Bagalamukhi Jayanti 2026: हर साल वैशाख महीने में आने वाली बगलामुखी जयंती का दिन भक्तों के लिए बेहद खास माना जाता है। यह वह अवसर होता है जब लोग मां बगलामुखी की पूजा करके अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने और नकारात्मक शक्तियों से बचने की कामना करते हैं। साल 2026 में भी यह दिन विशेष महत्व लेकर आया है, क्योंकि इस दिन की साधना को बेहद प्रभावशाली माना जाता है।
मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से एक माना जाता है और उन्हें शक्ति का उग्र रूप कहा जाता है। उनकी पूजा सिर्फ आस्था का विषय नहीं, बल्कि एक ऐसा विश्वास है, जो भक्तों को मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास देता है। कई लोग मानते हैं कि इस दिन मां की उपासना करने से जीवन में आ रही परेशानियां कम होती हैं और शत्रुओं से राहत मिलती है।
क्यों खास है मां बगलामुखी की पूजा
मां बगलामुखी को ‘पीताम्बरा’ भी कहा जाता है, क्योंकि उन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। उनके स्वरूप में पीले वस्त्र, पीले आभूषण और स्वर्ण जैसा तेज देखा जाता है। यही कारण है कि उनकी पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व होता है। भक्त इस दिन पीले कपड़े पहनते हैं और पूजा में भी पीली चीजों का ही इस्तेमाल करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां बगलामुखी को ‘स्तंभन शक्ति’ की देवी माना जाता है। इसका अर्थ है किसी भी नकारात्मक शक्ति या बुरे प्रभाव को रोक देना। ऐसा विश्वास है कि मां अपने भक्तों के विरोधियों की वाणी और बुद्धि को स्थिर कर देती हैं, जिससे वे नुकसान नहीं पहुंचा पाते।
पौराणिक कथा जो बढ़ाती है आस्था
पुराणों में एक कथा का उल्लेख मिलता है, जिसमें बताया गया है कि सतयुग में एक भयंकर तूफान ने पूरी सृष्टि को संकट में डाल दिया था। तब भगवान विष्णु ने तपस्या की और उनकी साधना से प्रसन्न होकर हरिद्रा सरोवर से मां बगलामुखी प्रकट हुईं। उन्होंने अपनी शक्ति से उस तूफान को रोक दिया और सृष्टि की रक्षा की। यही कारण है कि उन्हें संकट हरने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।
Bagalamukhi Puja Vidhi
बगलामुखी जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और साफ-सुथरे, खासकर पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। पूजा के लिए एक शांत और साफ स्थान चुनें। वहां पीला कपड़ा बिछाकर मां की मूर्ति या यंत्र स्थापित करें।
इसके बाद हाथ में जल और फूल लेकर संकल्प लें और माता को हल्दी, पीले फूल, पीले चावल और मिठाई अर्पित करें। भोग में बेसन के लड्डू, केसरिया हलवा या चने की दाल जैसी चीजें चढ़ाई जाती हैं। घी का दीपक जलाकर श्रद्धा के साथ पूजा करें और अंत में आरती करें।
पूजा के दौरान मन शांत रखना और पूरी श्रद्धा से मां का स्मरण करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
मंत्र जाप का विशेष महत्व
इस दिन मां बगलामुखी के मंत्र का जाप करना बेहद लाभकारी माना जाता है। यह मंत्र न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाता है। माना जाता है कि नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और व्यक्ति अपने जीवन में मजबूती महसूस करता है।
Powerful Mantra
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।
इस मंत्र का उच्चारण करते समय मन को एकाग्र रखना जरूरी होता है।
प्रमुख मंदिर जहां उमड़ती है आस्था
देश में मां बगलामुखी के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां इस दिन विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। मध्य प्रदेश के दतिया और नलखेड़ा में स्थित मंदिरों को बेहद सिद्ध पीठ माना जाता है। वहीं हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित बनखंडी मंदिर भी भक्तों के बीच खास महत्व रखता है।
इन मंदिरों में बगलामुखी जयंती के दिन भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है और वातावरण पूरी तरह भक्ति में डूबा रहता है।
आस्था के साथ संतुलन भी जरूरी
हालांकि पूजा और साधना से मानसिक शांति मिलती है, लेकिन यह भी जरूरी है कि जीवन में संतुलन बनाए रखा जाए। सकारात्मक सोच, मेहनत और सही दिशा में प्रयास भी उतने ही जरूरी हैं।
