Falta Re-Polling 2026: Jahangir Khan ने क्यों वापस लिया नामांकन?
Falta Re-Polling 2026:West Bengal के Falta Assembly Seat पर होने वाली re-polling से पहले TMC उम्मीदवार Jahangir Khan ने नाम वापस ले लिया। जानिए पूरा विवाद, BJP-TMC आरोप, Election Commission की कार्रवाई और Bengal Politics पर इसका असर।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया जब दक्षिण 24 परगना की चर्चित फलता विधानसभा सीट से TMC उम्मीदवार Jahangir Khan ने अचानक चुनावी मैदान छोड़ने का फैसला कर लिया। 21 मई 2026 को होने वाली re-polling से ठीक पहले आई इस खबर ने पूरे Bengal Politics को हिला दिया है।
फलता सीट पहले से ही विवादों, हिंसा, Election Commission की कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की वजह से सुर्खियों में थी। लेकिन अब Jahangir Khan की नाम वापसी ने इस पूरे मामले को और ज्यादा हाई-वोल्टेज बना दिया है।
कौन हैं Jahangir Khan?
Jahangir Khan को TMC का मजबूत नेता माना जाता रहा है। Diamond Harbour क्षेत्र में उनका काफी प्रभाव बताया जाता है और उन्हें TMC सांसद Abhishek Banerjee का करीबी भी माना जाता है। फलता सीट लंबे समय से TMC का गढ़ रही है और यहां पार्टी लगातार मजबूत स्थिति में रही है।
लेकिन 2026 West Bengal Assembly Election के दौरान यह सीट अचानक राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गई। मतदान के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा, बूथ कैप्चरिंग, EVM में गड़बड़ी और मतदाताओं को डराने जैसे आरोप सामने आए। इसके बाद Election Commission ने पूरे विधानसभा क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया।
क्यों करानी पड़ी Re-Polling?
29 अप्रैल को हुए मतदान के बाद विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि कई बूथों पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि कुछ जगहों पर विपक्षी उम्मीदवारों के चुनाव चिन्हों पर टेप या स्याही लगाई गई थी ताकि मतदाता सही तरीके से वोट न डाल सकें।
Election Commission ने इन शिकायतों को गंभीर मानते हुए जांच कराई। जांच के बाद आयोग ने फलता सीट पर दोबारा मतदान कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया। यह फैसला TMC के लिए बड़ा झटका माना गया क्योंकि पार्टी की छवि पर सवाल खड़े होने लगे थे।
‘Pushpa’ बन गया राजनीतिक प्रतीक
राजनीतिक गलियारों में Jahangir Khan को ‘Pushpa’ नाम से भी जोड़ा जाने लगा। Bengal BJP नेताओं ने उन्हें इसी नाम से निशाना बनाना शुरू कर दिया था।
West Bengal के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने भी सार्वजनिक मंचों से Jahangir Khan पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा था कि “Pushpa अब मेरी जिम्मेदारी है।” इसके बाद राज्य की राजनीति और ज्यादा गरमा गई।
BJP लगातार आरोप लगा रही थी कि फलता में लोकतंत्र को कुचला गया। वहीं TMC का कहना था कि BJP राजनीतिक दबाव बनाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रही है।
अचानक क्यों लिया नाम वापसी का फैसला?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर Jahangir Khan ने अचानक चुनावी मैदान क्यों छोड़ दिया?
TMC का दावा है कि उनके उम्मीदवार पर भारी राजनीतिक दबाव बनाया गया। पार्टी नेताओं का कहना है कि लगातार कार्रवाई, जांच और राजनीतिक माहौल के कारण यह फैसला लेना पड़ा।
दूसरी तरफ BJP इसे TMC की “हार की स्वीकारोक्ति” बता रही है। BJP नेताओं का कहना है कि जनता का गुस्सा देखकर TMC पीछे हट गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फलता सीट पर इस बार माहौल पूरी तरह बदल चुका था। Bengal Election Results में BJP की बड़ी जीत के बाद TMC रक्षात्मक स्थिति में आ गई थी और फलता का re-polling चुनाव पार्टी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया था।
High Court से भी मिली थी राहत
दिलचस्प बात यह है कि Jahangir Khan को हाल ही में Calcutta High Court से राहत भी मिली थी। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज मामलों में 26 मई तक “कोई कठोर कार्रवाई नहीं” करने का आदेश दिया था ताकि वे चुनाव लड़ सकें।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बनाए रखना जरूरी है। हालांकि इसके बावजूद Jahangir Khan ने चुनावी मैदान से हटने का फैसला कर लिया।
TMC Office में हुई थी तोड़फोड़
फलता में राजनीतिक तनाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव परिणाम आने के बाद Jahangir Khan के पार्टी कार्यालय में भी तोड़फोड़ हुई थी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक BJP समर्थकों ने TMC कार्यालय में घुसकर तोड़फोड़ की और वहां पार्टी के झंडे हटाकर BJP के झंडे लगा दिए। इस घटना के वीडियो भी सोशल Media पर वायरल हुए थे।
इस घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ी थी।
अब आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि Jahangir Khan की नाम वापसी के बाद फलता सीट पर चुनावी समीकरण कैसे बदलेंगे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे BJP को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सकती है। वहीं TMC के लिए यह सीट अब प्रतिष्ठा का बड़ा संकट बन चुकी है।
21 मई को होने वाली re-polling पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि यह सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं बल्कि Bengal Politics की बदलती तस्वीर का संकेत माना जा रहा है।
Aarambh News लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।
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