Nepal Flood: नेपाल में ग्लेशियल आपदा से तबाही, 163 की मौत,133 भारतीय तीर्थयात्री लापता
Nepal Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर से जुड़ी आपदा के बाद आई भीषण बाढ़ ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई। 163 लोगों की मौत और 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें 133 भारतीय तीर्थयात्री शामिल हैं। राहत-बचाव अभियान जारी है और बिहार में भी बाढ़ को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।
Nepal Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियल आपदा से भारी तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर से जुड़ी एक बड़ी आपदा के बाद अचानक आई बाढ़ ने मध्य नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 163 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 750 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं।
लापता लोगों में 133 भारतीय तीर्थयात्री भी शामिल हैं। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश और बचाव अभियान चला रहे हैं।
कैसे शुरू हुई तबाही?
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक शक्तिशाली भूस्खलन हुआ, जिससे करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर का भूकंपीय संकेत दर्ज किया गया। इस भूस्खलन के बाद बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान, मलबा नदी में जा गिरा। यह नदी आगे चलकर भोते कोशी नदी की सहायक नदी से जुड़ती है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के प्रवक्ता सुनील शर्मा के अनुसार, 133 भारतीय तीर्थयात्री लापता हैं। ये सभी तिब्बत स्थित हिंदुओं के प्रमुख तीर्थस्थल कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे थे।
कई जिलों में भारी तबाही
नेपाल के रसुवा और धादिंग जिले इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हैं। अचानक आई बाढ़ ने कई बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ और आवागमन भी बाधित हो गया। बाढ़ के कारण नेपाल में कई सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।
गुरुवार सुबह तक नेपाल में 163 शव बरामद किए जा चुके थे। इनमें सबसे ज्यादा चितवन से 64 शव मिले हैं। इसके बाद धादिंग से 27, पूर्वी नवलपरासी से 26, गोरखा से 20, नुवाकोट से 12, तनहूं से 9, रसुवा से 3 और पश्चिमी नवलपरासी से 2 शव बरामद किए गए हैं।
नेपाल में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
इस प्राकृतिक आपदा के चलते नेपाल में सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाओं समेत कई अहम बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है। पड़ोसी चीन के तिब्बत क्षेत्र से भी लोगों की मौत और कई लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है। वहीं, नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने कहा है कि फिलहाल ऐसी कोई विश्वसनीय जानकारी नहीं है, जिससे रसुवा या नुवाकोट में एक और बड़ी बाढ़ आने की आशंका हो। हालांकि, बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी हो सकती है।
राहत और बचाव अभियान तेज
नेपाल सरकार ने आपदा के बाद सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया है। दूरदराज और बाढ़ में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद भी ली जा रही है। भारत ने भी राहत प्रयासों में सहयोग बढ़ाया है। प्रभावित भारतीय नागरिकों तक मदद पहुंचाने के लिए राहत सामग्री भेजी जा रही है और बचाव एवं सहायता अभियानों में समन्वय किया जा रहा है।
वहीं, नेपाल से आने वाले बाढ़ के पानी के कारण बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है। नेपाल से पानी बढ़ने के बाद इसका असर गंडक नदी में भी देखने को मिला है, जिसके चलते प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
लापता व प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद के लिए भारतीय मिशन
नेपाल के पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कम से कम 133 भारतीय तीर्थयात्री बाढ़ के बाद लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित इलाकों में कई जगह संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण परिवारों और अधिकारियों के लिए यात्रियों की स्थिति और लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो रहा है।
लापता या प्रभावित भारतीय नागरिकों के परिजनों की मदद के लिए भारतीय मिशन और कई राज्य सरकारों ने हेल्पलाइन शुरू की हैं। परिवार इन नंबरों पर संपर्क कर अपने परिजनों से जुड़ी जानकारी और सहायता प्राप्त कर सकते हैं:
+977 985 131 6807
+977 970 910 7500
बस्तियां पूरी तरह पानी में डूबी
भोटे कोशी नदी में आई तेज बाढ़ ने तिब्बत सीमा से लगे नेपाल के रसुवा और धादिंग जिलों को बुरी तरह प्रभावित किया। इसके बाद रसुवा के टिमुरे इलाके से बाढ़ का पानी त्रिशूली नदी में पहुंचा, जहां से यह पानी आगे के इलाकों में फैल गया।
बाढ़ का असर नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहूं और पूर्वी नवलपरासी तक देखने को मिला। प्रभावित इलाके काठमांडू से करीब 70 किलोमीटर से लेकर लगभग 200 किलोमीटर की दूरी तक फैले हुए बताए गए हैं।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पूरी बस्तियों को पानी में डूबा हुआ, तेज बहाव में वाहनों को बहते और पुलों को टूटते देखा गया। अधिकारियों के मुताबिक, नदियों के किनारे बसे इलाकों में भारी स्तर पर नुकसान और तबाही हुई है।
परिवहन व्यवस्था को भारी नुकसान
बाढ़ ने नेपाल के परिवहन ढांचे को भी बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया है। सरकार के मुताबिक, कम से कम 19 मोटरेबल पुल बाढ़ के तेज बहाव में बह गए। इसके अलावा नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग से जोड़ने वाली करीब 42 किलोमीटर लंबी सड़क भी बाढ़ की चपेट में आकर बह गई।
सामने आए वीडियो में तेज बहाव के कारण पुलों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त होते और फिर पानी के साथ बहते देखा गया। एक वीडियो में एक पुल देखते ही देखते गंदे पानी में घिर गया और करीब 30 सेकंड के भीतर पूरी तरह ढह गया।
सड़कों और पुलों के टूटने से कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। इससे राहत और बचाव अभियान भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल बेहद अहम हो गया है।
यह भी पढ़े: Toxic Movie Review: यश का दमदार स्वैग, कहानी ने किया कन्फ्यूज!
