Vidhana Soudha AI Video: विधान सौध को बम से उड़ाने का AI वीडियो बनाने के आरोप में बिहार का प्रवासी मजदूर गिरफ्तार
Vidhana Soudha AI Video: कर्नाटक के विधान सौध भवन को धमाके में तबाह होते दिखाने वाला AI-जनरेटेड वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने बिहार के एक प्रवासी मजदूर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने फर्जी वीडियो के जरिए दहशत फैलाने के मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का दुरुपयोग एक बार फिर चर्चा में है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में पुलिस ने विधान सौध भवन को बम से उड़ाने का फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में बिहार के एक प्रवासी मजदूर को गिरफ्तार किया है। वीडियो में राज्य के प्रमुख सरकारी भवन को भीषण धमाके में तबाह होते दिखाया गया था। इसके वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर चिंता बढ़ गई और यूजर्स ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
Vidhana Soudha AI Video: इंस्टाग्राम पर अपलोड किया गया था फर्जी वीडियो
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, आरोपी की पहचान अली के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार का रहने वाला है। उसने कथित तौर पर इंस्टाग्राम पर ‘Jnx king Hg’ नाम के अकाउंट से AI-जनरेटेड वीडियो अपलोड किया था।
वीडियो में एक व्यक्ति को ट्रिगर दबाते हुए दिखाया गया, जिसके बाद विधान सौध भवन में बड़ा धमाका होता नजर आया। वीडियो के साथ दिए गए कैप्शन में भी इमारत को उड़ाने का दावा किया गया था। हालांकि, पुलिस की जांच में सामने आया कि वीडियो वास्तविक घटना का नहीं, बल्कि AI की मदद से तैयार किया गया फर्जी दृश्य था।
वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने की कार्रवाई
वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगा, जिसके बाद कई यूजर्स ने बेंगलुरु पुलिस को टैग कर मामले में कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने जांच के बाद स्पष्ट किया कि विधान सौध में ऐसा कोई वास्तविक धमाका नहीं हुआ था।
पुलिस ने आरोपी के इंस्टाग्राम अकाउंट को डिएक्टिवेट करवाने की कार्रवाई की और उसके खिलाफ FIR दर्ज की। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वीडियो बनाने और साझा करने के पीछे आरोपी का क्या मकसद था।
क्या है विधान सौध की अहमियत?
विधान सौध बेंगलुरु में स्थित कर्नाटक सरकार का प्रमुख विधायी भवन है। यहां राज्य की विधानसभा और सचिवालय से जुड़ी महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित होती हैं। सुरक्षा के लिहाज से यह एक संवेदनशील सरकारी परिसर है।
ऐसे भवन को धमाके में तबाह होते दिखाने वाला फर्जी वीडियो लोगों के बीच भय और भ्रम पैदा कर सकता है। AI तकनीक से तैयार किए गए भ्रामक दृश्य वास्तविक घटनाओं जैसे दिखाई दे सकते हैं, जिससे सोशल मीडिया पर गलत जानकारी तेजी से फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
AI के दुरुपयोग पर पुलिस की सख्ती
इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो की सत्यता जांचने की जरूरत को सामने रखा है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ के जरिए वीडियो तैयार करने के उद्देश्य सहित अन्य पहलुओं का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल, पुलिस की जांच जारी है। यह मामला बताता है कि AI तकनीक का इस्तेमाल करते समय जिम्मेदारी और सावधानी बेहद जरूरी है। किसी संवेदनशील सरकारी इमारत पर हमले का झूठा दृश्य तैयार करना या उसे वास्तविक घटना बताकर प्रसारित करना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।

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