
Wakf Amendment Bill: वक्फ संशोधन बिल को लेकर संसद बहस शुरू हो चुकी है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की तरफ से सदन में बिल पर चर्चा शुरू की गई। हालांकि बिल पास होने के लिए सत्ता पक्ष एनडीए के पास पर्याप्त संख्या है। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय में भी बिल लेकर राय मिली जुली है। अब सवाल है कि इसके लागू होने पर क्या कुछ बदलाव आएंगे।
Wakf Amendment Bill: क्या परिवर्तन होंगे
यदि वक्फ बिल लागू हो जाता है तो इसके साथ ही कई बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे। उदाहरण के लिए ट्रिब्यूनल का फैसला आखिरी नहीं माना जाएगा, दावे को सिविल कोर्ट, हाई कोर्ट और उच्चतम न्यायालय में चुनौती दिया जा सकता है। वक्फ की ओर से किसी भी जमीन पर दावा करना आसान नहीं होगा। दान में मिली जमीन को ही वक्फ की संपत्ति माना जाएगा। वक्फ की पूरी संपत्ति पोर्टल पर दर्ज होती जाएगी। इसके अतिरिक्त अगर सरकारी संपत्ति पर दावा किया जाता है तो उसकी जांच भी होगी। इसके अलावा इस्तेमाल के आधार पर किसी जमीन पर वक्फ का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। वक्फ की जिन संपत्तियों पर नमाज पढ़ी जाती है उनमे कोई दखल नहीं दिया जाएगा। पंजीकृत संपत्तियों में कोई दखलंदाजी नहीं की जाएगी। खास बात यह है कि वक्फ किसी भी आदिवासी इलाके में संपत्ति होने का दवा नहीं कर पाएगा।
Wakf Amendment Bill: ये खास परिवर्तन भी होगा
संपत्ति का मालिकाना हक तय करने का अधिकार अब जिला कलेक्टर के बजाए, कलेक्टर से ऊपरी रैंक के अधिकारियों को सौप जाएगा और राज्य सरकार को रिपोर्ट सौपने का अधिकार भी इसी अधिकारी का होगा। खास बात यह है कि यह अधिकारी राज्य सरकार द्वारा ही चुना जाएगा। आपको बता दे वक्फ ट्रिब्यूनल में तीन सदस्य होंगे इनमें से एक मुस्लिम कानून का एक्सपर्ट, एक पूर्व या मौजूदा जिला जज और तीसरा सदस्य राज्य सरकार में सहसचिव की रैंकिंग के होंगे।
इस बिल में कहा गया है कि इस काउंसिल के कम से कम दो सदस्य गैर मुस्लिम होने चाहिए। कॉउन्सिल में नियुक्त किए गए सांसदों, पूर्व जजों और गणमान्य का मुस्लिम होना जरूरी नहीं होगा। इसके अलावा इसमें मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि इस्लामी कानून के जानकार और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष भी शामिल किए जाएंगे। मुस्लिम सदस्यों में कम से कम दो महिलाओं का होना भी आवश्यक है।
Wakf Amendment Bill: ट्रिब्यूनल का फैसला, अंतिम फैसला नहीं होगा
वर्तमान कानून के अनुसार वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला आखिरी फैसला होता है और इस फैसले के खिलाफ अदालत में भी कार्यवाही नहीं की जाती। हालांकि हाई कोर्ट अपनी इच्छा से इन मामलों पर सुनवाई कर सकता है। अब आने वाले बिल में ट्रिब्यूनल के फैसले को अंतिम फैसला नहीं माना जाएगा। इसके अलावा यह भी रूल है कि ट्रिब्यूनल के फैसले पर 90 दिनों के अंदर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जा सकेगी।
संशोधन बिल केंद्र सरकार की पंजीकृत वक्फ के खातों के प्रकाशन जैसे बड़े नियमों में बदलाव कर सकता है। साथ ही केंद्र सरकार वक्फ के खातों को ऑडिट CAG या अधिकारी से कर सकती है।
इस बिल में बोहरा और आगखानी के लिए अलग बोर्ड तैयार करने की अनुमति प्रदान की गई है।
Wakf Amendment Bill: कितनी संपत्ति है वक्त के पास
WAMSI यानी वक्फ एसेट्स मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया के ताजा आंकड़ों के अनुसार वक्फ के पास 872804 अचल संपत्तियां रजिस्टर्ड है वही चल संपत्तियों की संख्या 16716 है।
Wakf Amendment Bill: यहां से शुरू हुआ वक्फ
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के मंत्रालय के अनुसार भारत में वक्फ का इतिहास दिल्ली सल्तनत की शुरुआती दिनों से संबंधित है। जब सुल्तान मुईजुद्दीन सैम गौर ने मुल्तान की जामा मस्जिद को दो गांव समर्पित किये और इसका प्रशासन शेखुल इस्लाम को सौंप दिया गया। जैसे-जैसे दिल्ली की सल्तनत और बाद में इस्लामी राजवंश भारत में अपना वर्चस्व फैलाते गए वक्फ संपत्तियों की संख्या में बढ़ोतरी होती गई।
बताया जाता है कि 19वीं शताब्दी के अंत में भारत में वक्फ को समाप्त करने का मामला तब उठाया गया था जब लंदन की प्रिवी काउंसिल में वक्फ संपत्ति पर विवाद छेड़ा गया। जबकि भारत औपनिवेशिक शासन के अधीन था। इस मामले की सुनवाई करने वाले चार न्यायाधीशों को वक्फ को “सबसे खराब और सबसे घातक किस्मत की शाश्वतता” के रूप में बताया गया था। और वक्फ को अमान्य ने घोषित कर दिया गया था। फिर बाद में भारत में इस निर्णय को स्वीकार नहीं किया गया। 1913 का मुसलमान वक्फ वैदिक कारण अधिनियम को लागू कर इन सभी संपत्तियों को कानून द्वारा बचा लिया गया। तब से लेकर अब तक वक्फ पर रोक लगाने की कोशिश नहीं की गई।
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