Punjab Drug Crisis: 74 लाख लोग नशे की चपेट में, High Court ने सरकार से मांगा जवाब
Punjab Drug Crisis: पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या एक बार फिर सुर्खियों में है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 7 मार्च 2026 को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य में फैलती ड्रग समस्या को गंभीर बताया और इस मामले में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब मांगा है। याचिका में दावा किया गया है कि पंजाब में लगभग 74 लाख लोग नशे की चपेट में हैं, जिनमें बड़ी संख्या में युवा और बच्चे भी शामिल हैं।
यह याचिका कंवर पहल सिंह नाम के याचिकाकर्ता ने दायर की थी, जिन्होंने कोर्ट के सामने कई रिपोर्ट्स और आंकड़े पेश किए। इन आंकड़ों के अनुसार पंजाब में नशे का जाल इतना गहरा हो चुका है कि अब यह सिर्फ एक सामाजिक समस्या नहीं बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक संकट बन गया है।
74 लाख ड्रग यूजर्स का दावा
याचिका में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के जोनल डायरेक्टर के उस बयान का हवाला दिया गया है, जो 4 मार्च 2026 को सामने आया था। इस बयान के मुताबिक पंजाब में करीब 74 लाख लोग किसी न किसी प्रकार के नशे का सेवन कर रहे हैं।
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इस आंकड़े में करीब 7 लाख बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी उम्र 10 से 17 साल के बीच बताई गई है। इतने कम उम्र के बच्चों का नशे की गिरफ्त में आना समाज के लिए बेहद खतरनाक संकेत माना जा रहा है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
Punjab Haryana High Court Drug Case की सुनवाई चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने याचिका को गंभीरता से लेते हुए पंजाब और हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन तथा संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि याचिका में जिन कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया गया है, वे केवल सुझाव नहीं बल्कि कानूनन लागू करने योग्य जिम्मेदारियां हैं। इसलिए संबंधित अधिकारियों को इनका सही और प्रभावी तरीके से पालन करना चाहिए।
कानून के बावजूद क्यों नहीं रुक रहा नशा?
याचिकाकर्ता ने अदालत में यह भी तर्क दिया कि नशे के खिलाफ कई अभियान चलाए जा रहे हैं, जैसे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ और ‘ऑपरेशन प्रहार’, लेकिन इसके बावजूद समस्या खत्म नहीं हो रही।
याचिका के मुताबिक इसका मुख्य कारण यह है कि पुलिस और प्रशासन अधिकतर मामलों में अपराध होने के बाद कार्रवाई करते हैं, जबकि जरूरत इस बात की है कि पहले से सतर्क रहकर अपराध को रोका जाए।
याचिकाकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की कुछ धाराओं का भी हवाला दिया। उनके अनुसार धारा 128 और 129 पुलिस को यह अधिकार देती हैं कि संभावित अपराधियों के खिलाफ पहले से कार्रवाई की जा सके। लेकिन इन प्रावधानों का व्यवहार में बहुत कम इस्तेमाल किया जाता है।
मुकदमों में देरी भी बड़ी समस्या
याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया कि नशे से जुड़े कई मामलों में मुकदमे लंबे समय तक चलते रहते हैं क्योंकि गवाह समय पर अदालत में पेश नहीं होते।
इस समस्या को दूर करने के लिए याचिकाकर्ता ने BNSS की कुछ धाराओं के तहत यह मांग की कि गंभीर मामलों में गवाहों के बयान पहले ही दर्ज कर लिए जाएं और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कानूनी बांड लिया जाए।
नशे के कौन-कौन से रूप फैल रहे हैं?
रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में कई प्रकार के नशे का सेवन तेजी से बढ़ रहा है। इनमें मुख्य रूप से:
- हेरोइन
- ओपिओइड ड्रग्स
- सेडेटिव दवाएं
- इनहेलेंट्स
शामिल हैं। इसके अलावा अब कोकीन जैसे महंगे नशे भी धीरे-धीरे राज्य में फैलने लगे हैं।
NDPS कानून को सख्ती से लागू करने की मांग
याचिका में NDPS एक्ट 1985 की कुछ महत्वपूर्ण धाराओं का भी जिक्र किया गया। इनमें एक प्रावधान यह है कि जिन लोगों को ड्रग तस्करी के मामलों में दोषी ठहराया जाता है, उनके नाम और जानकारी स्थानीय अखबारों में प्रकाशित की जानी चाहिए, ताकि समाज में जागरूकता बढ़े और दूसरों के लिए चेतावनी बने।
इसके अलावा जमीन मालिकों को भी यह जिम्मेदारी दी गई है कि अगर उनकी जमीन पर अवैध नशीले पदार्थों की खेती हो रही है तो इसकी सूचना प्रशासन को दें।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट ने फिलहाल इस मामले में संबंधित सरकारों और विभागों से जवाब मांगा है। साथ ही याचिकाकर्ता को भी यह छूट दी गई है कि वह इस मुद्दे पर विस्तृत प्रस्तुति संबंधित विभागों के सामने रख सकते हैं।
पंजाब लंबे समय से नशे की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में यह मामला सिर्फ कानून या पुलिस कार्रवाई का नहीं बल्कि समाज, परिवार और सरकार—तीनों के संयुक्त प्रयास का विषय बन चुका है।
अगर समय रहते इस समस्या पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि अब सिर्फ छापेमारी और गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा, बल्कि रोकथाम, जागरूकता और पुनर्वास जैसे उपायों पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।
यह भी पढ़े







