अक्सर देखा जाता है कि लंबे समय में लोग जितना लोन लेते हैं, उससे कई गुना ज्यादा पैसा ब्याज के रूप में बैंक को देना पड़ता है।
अक्सर देखा जाता है कि लंबे समय में लोग जितना लोन लेते हैं, उससे कई गुना ज्यादा पैसा ब्याज के रूप में बैंक को देना पड़ता है।
Home loan prepayment: अपना घर होना लगभग हर व्यक्ति का सपना होता है। लेकिन इस सपने को पूरा करने के लिए ज्यादातर लोग होम लोन का सहारा लेते हैं और कई सालों तक हर महीने EMI चुकाते रहते हैं। अक्सर देखा जाता है कि लंबे समय में लोग जितना लोन लेते हैं, उससे कई गुना ज्यादा पैसा ब्याज के रूप में बैंक को देना पड़ता है।
ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि अगर उनके पास अतिरिक्त पैसा आ जाए तो क्या उन्हें Home loan prepayment कर देना चाहिए या फिर तय अवधि तक EMI भरते रहना बेहतर है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, सही स्थिति में किया गया प्रीपेमेंट आपको बड़ी रकम के ब्याज से बचा सकता है, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं।
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Toggleहोम लोन प्रीपेमेंट का मतलब है कि लोन की तय अवधि खत्म होने से पहले ही उसका कुछ हिस्सा या पूरा कर्ज चुका देना। इससे आपके लोन का मूलधन कम हो जाता है और आगे आने वाली EMI में ब्याज का बोझ घट जाता है।
उदाहरण के तौर पर यदि आपने 20 साल के लिए होम लोन लिया है और बीच में अतिरिक्त पैसा मिलने पर उसका कुछ हिस्सा चुका देते हैं, तो या तो आपकी EMI कम हो सकती है या फिर लोन की अवधि घट सकती है।
हालांकि कई मामलों में बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां प्रीपेमेंट पर चार्ज या पेनल्टी भी लगा सकती हैं। इसलिए प्रीपेमेंट से पहले ब्याज की बचत और संभावित शुल्क का सही आकलन करना जरूरी होता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार अगर आपने फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लिया है, तो उसके प्रीपेमेंट पर बैंक कोई चार्ज नहीं लगा सकते। फ्लोटिंग रेट का मतलब है कि ब्याज दर समय-समय पर बदल सकती है।
लेकिन यदि लोन फिक्स्ड रेट पर लिया गया है, तो कई बैंक प्रीपेमेंट फीस वसूल सकते हैं। फिक्स्ड रेट लोन में पूरी अवधि के दौरान ब्याज दर एक जैसी रहती है।
इसके अलावा अगर किसी कंपनी या फर्म ने होम लोन लिया है और उसे समय से पहले चुकाना चाहती है, तो आमतौर पर प्रीपेमेंट चार्ज देना पड़ सकता है।
कुछ खास स्थितियों में बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां प्रीपेमेंट फीस ले सकती हैं:
हालांकि यदि व्यक्ति अपने खुद के पैसों से फिक्स रेट लोन चुका रहा है, तो कुछ मामलों में हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां भी पेनल्टी नहीं लगा सकतीं।
Home loan prepayment के कई फायदे होते हैं, जिनमें सबसे बड़ा फायदा ब्याज की बचत है।
अगर आपने लंबे समय के लिए लोन लिया है, तो शुरुआती वर्षों में Home loan prepayment करने से आपको सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है।
हालांकि हर स्थिति में Home loan prepaymentफायदेमंद नहीं होता। इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं:
इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपनी पूरी बचत लोन चुकाने में खर्च करना समझदारी नहीं है।
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार होम लोन के पहले 5 से 7 साल प्रीपेमेंट के लिए सबसे अच्छे माने जाते हैं। इस समय EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है, इसलिए प्रीपेमेंट करने से ज्यादा बचत होती है।
इसके अलावा बोनस, निवेश की मेच्योरिटी, वेतन वृद्धि या अतिरिक्त आय मिलने पर भी प्रीपेमेंट किया जा सकता है।
जब आप प्रीपेमेंट करते हैं, तो बैंक आमतौर पर दो विकल्प देते हैं:
आमतौर पर लोन की अवधि कम करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इससे कुल ब्याज में बड़ी कमी आती है। EMI कम करने से मासिक खर्च घटता है, लेकिन कुल ब्याज में उतनी बचत नहीं होती।
यह फैसला पूरी तरह आपकी वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है। अगर आपके निवेश से मिलने वाला रिटर्न होम लोन की ब्याज दर से ज्यादा है, तो निवेश करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
लेकिन अगर आप जोखिम से बचना चाहते हैं और ब्याज दर ज्यादा है, तो प्रीपेमेंट करना फायदेमंद साबित हो सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आमतौर पर लोन का 10 से 30 प्रतिशत तक प्रीपेमेंट करना संतुलित फैसला माना जाता है। इससे ब्याज में बचत भी होती है और आपके पास पर्याप्त नकदी भी बनी रहती है।
सबसे जरूरी बात यह है कि प्रीपेमेंट करने से पहले इमरजेंसी फंड, बीमा और जरूरी खर्चों के लिए पर्याप्त पैसा अलग रखना चाहिए। तभी यह फैसला आपके लिए आर्थिक रूप से सही साबित होगा।
