Periods During Navratri: पीरियड्स या सूतक में क्या करें, क्या न करें? जानिए Puja Rules और सच
Periods During Navratri: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरू होते ही हर घर में भक्ति और आस्था का माहौल बन जाता है। लोग पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखते हैं, मां दुर्गा की पूजा करते हैं और 9 दिनों तक नियमों का पालन करते हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि इन दिनों के बीच महिलाओं को पीरियड्स आ जाते हैं या घर में सूतक-पातक की स्थिति बन जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है—अब पूजा कैसे करें?
अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। शास्त्रों में इसका स्पष्ट समाधान बताया गया है।
क्या पीरियड्स में पूजा करना मना है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पीरियड्स कोई अशुद्धि नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान शारीरिक पूजा जैसे मूर्ति को छूना, कलश स्थापना करना या पूजा सामग्री को स्पर्श करना वर्जित माना गया है।
लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि आपकी भक्ति रुक जाती है।
मानसिक पूजा का है विशेष महत्व
अगर नवरात्रि के दौरान पीरियड्स आ जाएं, तो आप मानसिक रूप से मां दुर्गा की पूजा कर सकती हैं। मन ही मन मंत्र जाप करें, जैसे—
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” या “ॐ दुं दुर्गायै नमः“
आप दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकती हैं। अगर किताब को छूना संभव न हो, तो मोबाइल के जरिए पाठ सुनना या पढ़ना भी पूरी तरह स्वीकार्य है।
याद रखें, भगवान के लिए सबसे महत्वपूर्ण आपकी श्रद्धा और भाव है, न कि केवल बाहरी विधि।
व्रत रखना चाहिए या नहीं?
यह सवाल भी अक्सर महिलाओं के मन में आता है। शास्त्रों के अनुसार, अगर आपकी तबीयत ठीक है तो आप व्रत जारी रख सकती हैं। उपवास का संबंध शरीर और मन की शुद्धि से होता है।
लेकिन अगर कमजोरी, चक्कर या असहजता महसूस हो, तो खुद को आराम देना ज्यादा जरूरी है। भक्ति में शरीर का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पूजा और घर के नियम कैसे निभाएं?
अगर आपने घर में कलश स्थापना की है या अखंड ज्योति जलाई है, तो इस दौरान पूजा की जिम्मेदारी घर के किसी अन्य सदस्य को दे दें।
ध्यान रखें—
- मूर्ति या कलश को स्पर्श न करें
- मंदिर या पूजा घर में प्रवेश से बचें
- दीपक किसी और से जलवाएं
इस तरह पूजा का क्रम बिना रुके चलता रहेगा और नियमों का भी पालन हो जाएगा।
सूतक-पातक में क्या करें?
अगर घर में जन्म या मृत्यु के कारण सूतक लगा है, तो भी शारीरिक पूजा से दूरी बनाई जाती है। लेकिन मानसिक पूजा, जप और ध्यान जारी रखा जा सकता है। एक खास बात—अगर किसी विवाहित महिला के मायके में सूतक है, तो उसका प्रभाव ससुराल में नहीं माना जाता।
क्या करें अगर बीच में पीरियड्स शुरू हो जाएं?
नवरात्रि के बीच में अचानक पीरियड्स आ जाएं, तो मन परेशान हो जाता है। लेकिन ऐसे में निराश होने की जरूरत नहीं है।
- पूजा को मानसिक रूप से जारी रखें
- व्रत अपने संकल्प के अनुसार पूरा करें
- अंतिम दिन कन्या पूजन किसी और से करवाएं
यकीन मानिए, मां दुर्गा आपके भाव को समझती हैं और उसी के अनुसार फल देती हैं।
असली भक्ति क्या है?
नवरात्रि हमें यह सिखाती है कि सच्ची भक्ति दिल से होती है, न कि केवल नियमों से। अगर आपके मन में सच्चा भाव है, तो हर परिस्थिति में आपकी पूजा स्वीकार होती है।
निष्कर्ष
पीरियड्स या सूतक जैसी परिस्थितियां जीवन का हिस्सा हैं। इनसे आपकी आस्था कमजोर नहीं होती। जरूरत है सही समझ और संतुलन की। इस नवरात्रि, खुद को दोष देने के बजाय अपने मन को शांत रखें और मां दुर्गा से जुड़ाव बनाए रखें—क्योंकि भक्ति में सबसे बड़ा नियम है आपका सच्चा भाव।
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