Women Reservation Bill: लोकसभा में 33% महिला आरक्षण की तैयारी तेज, सीटें बढ़कर 816 होने का प्रस्ताव
केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले Women Reservation Bill के तहत महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है।
केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले Women Reservation Bill के तहत महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इसके तहत संसद के मौजूदा सत्र में दो महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जा सकते हैं, जिनका उद्देश्य महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाना है।
सरकार की इस पहल को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि इससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी में ऐतिहासिक वृद्धि होने की संभावना है।
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Toggleलोकसभा सीटें बढ़कर 816 होने का प्रस्ताव
सरकार के Women Reservation Bill के अनुसार, महिला आरक्षण लागू करने के साथ ही लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
यह बदलाव परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा, ताकि जनसंख्या के आधार पर सीटों का संतुलित वितरण हो सके। इससे न केवल महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलेगा, बल्कि संसद का स्वरूप भी अधिक समावेशी बन सकेगा।
नई जनगणना का इंतजार नहीं
Women Reservation Bill 2023 के तहत यह प्रावधान था कि नई जनगणना और परिसीमन के बाद ही आरक्षण लागू होगा। हालांकि अब सरकार इस शर्त में बदलाव करना चाहती है।
प्रस्ताव है कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही परिसीमन किया जाए, ताकि प्रक्रिया में देरी न हो और 2029 से पहले आरक्षण लागू किया जा सके। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नई जनगणना में देरी के चलते कानून के लागू होने में अनिश्चितता बनी हुई थी।
दो बिल लाकर बदले जाएंगे नियम
सरकार इस दिशा में दो अलग-अलग बिल लाने की तैयारी कर रही है।
- पहला बिल ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन से जुड़ा होगा।
- दूसरा बिल परिसीमन कानून में बदलाव के लिए लाया जाएगा।
इन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। यही वजह है कि सरकार विपक्षी दलों के साथ व्यापक सहमति बनाने की कोशिश में जुटी हुई है।
राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश तेज
गृहमंत्री अमित शाह ने इस मुद्दे पर एनडीए और गैर-कांग्रेसी विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर समर्थन जुटाने की पहल की है। समाजवादी पार्टी, वाईएसआर कांग्रेस, एनसीपी (एसपी), आरजेडी और एआईएमआईएम जैसे दलों से बातचीत हो चुकी है।
बीजेडी और शिवसेना (यूबीटी) के साथ भी चर्चा हुई है, जबकि कांग्रेस के साथ बातचीत अभी बाकी है। सरकार चाहती है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति बने, ताकि विधेयक आसानी से पारित हो सके।
एससी-एसटी महिलाओं को मिलेगा आरक्षण में हिस्सा
प्रस्तावित ढांचे के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं को उनके आरक्षित कोटे के भीतर ही प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। हालांकि, ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान फिलहाल शामिल नहीं किया गया है।
इसी मॉडल को राज्यों की विधानसभाओं में भी लागू करने की योजना है, जिससे पूरे देश में एक समान व्यवस्था बनाई जा सके।
2023 में पास हुआ था ऐतिहासिक कानून
सितंबर 2023 में ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक’ को संसद के दोनों सदनों ने पारित किया था। इसे संविधान के 106वें संशोधन के रूप में मंजूरी मिली थी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इसे स्वीकृति दे दी थी।
हालांकि, यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है, क्योंकि इसकी शर्तों में नई जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना शामिल था। अब सरकार इन्हीं शर्तों में बदलाव कर इसे जल्द लागू करना चाहती है।
महिला आरक्षण की लंबी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की मांग नई नहीं है। इसकी शुरुआत 1931 में राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान हुई थी, जब सरोजिनी नायडू और बेगम शाह नवाज जैसी नेताओं ने महिलाओं के अधिकारों की वकालत की थी।
इसके बाद 1993 में 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के जरिए पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण दिया गया। कई राज्यों ने इसे बढ़ाकर 50% तक कर दिया है।
लोकसभा और विधानसभा में महिला आरक्षण का बिल पहली बार 1996 में पेश किया गया था, लेकिन लंबे समय तक यह राजनीतिक सहमति के अभाव में अटका रहा।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
यदि सरकार अपने प्रस्ताव में सफल होती है, तो यह भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक परिवर्तन साबित हो सकता है। इससे न केवल महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि नीति-निर्माण में भी उनका प्रभाव मजबूत होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिला आरक्षण लागू होने से सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता को नई दिशा मिलेगी, जो देश के लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाएगी।





