Chhath Puja Nahay Khay: क्यों खास होता है पहला दिन? जानिए Kaddu-Bhat Prasad का महत्व
Chhath Puja Nahay Khay: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से शुरू होने वाला लोक आस्था का महान पर्व चैती छठ पूजा 2026 22 मार्च से नहाय-खाय के साथ शुरू हो चुका है। यह पर्व चार दिनों तक चलता है और पूरी श्रद्धा, अनुशासन और शुद्धता के साथ मनाया जाता है।
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। मान्यता है कि इस पर्व को विधि-विधान से करने पर घर में सुख-समृद्धि आती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
नहाय-खाय का क्या है महत्व
Chaiti Chhath 2026 का पहला दिन नहाय-खाय कहलाता है। ‘नहाय’ का मतलब है पवित्र स्नान और ‘खाय’ का मतलब है सात्विक भोजन करना। इस दिन व्रती सुबह उठकर नदी या किसी पवित्र जल में स्नान करते हैं और घर की साफ-सफाई करते हैं।
इसके बाद पूरी शुद्धता के साथ भोजन बनाया जाता है। नहाय-खाय का दिन शरीर और मन को पवित्र करने का प्रतीक माना जाता है, ताकि आने वाले कठिन व्रत को श्रद्धा के साथ पूरा किया जा सके।
आज बनता है कद्दू-भात का प्रसाद
इस दिन खास तौर पर कद्दू-भात और चने की दाल का सात्विक भोजन बनाया जाता है। इस प्रसाद को बनाने में घी का इस्तेमाल किया जाता है और लहसुन-प्याज का प्रयोग नहीं किया जाता।
सबसे पहले यह प्रसाद भगवान को अर्पित किया जाता है, उसके बाद व्रती इसे ग्रहण करते हैं और फिर परिवार के बाकी सदस्य भी प्रसाद खाते हैं। यह परंपरा शुद्धता और आस्था का प्रतीक मानी जाती है।
चार दिनों तक चलता है छठ महापर्व
छठ पूजा चार दिनों का एक कठिन और अनुशासित व्रत होता है:
- पहला दिन: नहाय-खाय
- दूसरा दिन: खरना
- तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य
- चौथा दिन: उषा अर्घ्य
दूसरे दिन यानी खरना के बाद व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं, जो इस पर्व का सबसे कठिन हिस्सा होता है।
आज खरना का दिन
23 मार्च को छठ पूजा का दूसरा दिन यानी खरना मनाया जाएगा। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को सूर्य देव की पूजा के बाद गुड़ की खीर, रोटी और फल का प्रसाद ग्रहण करते हैं।
खरना के बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जिसमें व्रती पानी की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करते।
संध्या और उषा अर्घ्य का महत्व
छठ पूजा का तीसरा दिन सबसे खास होता है। इस दिन व्रती शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं। यह क्षण बेहद भावुक और श्रद्धा से भरा होता है।
इसके अगले दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसी के साथ व्रत का समापन होता है और व्रती प्रसाद बांटकर पारण करते हैं।
कहां-कहां मनाया जाता है छठ पर्व
चैती छठ मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हालांकि अब यह पर्व देश के अन्य हिस्सों में भी लोकप्रिय हो चुका है।
छठ पर्व को प्रकृति, अनुशासन और आस्था का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है।
आस्था के साथ जुड़ी जिम्मेदारी भी जरूरी
जहां एक तरफ लोग छठ पूजा की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं कई जगहों पर छठ घाटों की सफाई और व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। तालाबों और नदियों में गंदगी के कारण व्रतियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे में प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि इस पवित्र पर्व को स्वच्छ और सुरक्षित माहौल में संपन्न कराया जाए।
आखिरी बात
छठ पूजा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, त्याग और अनुशासन का प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।
नहाय-खाय से शुरू हुआ यह महापर्व आने वाले दिनों में भक्ति, समर्पण और विश्वास की मिसाल पेश करेगा।
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