Noida International Airport: किसानों से कैसे मिली जमीन? Former DM BN Singh ने बताई पूरी Story
Noida International Airport का उद्घाटन होते ही यह सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक बड़ी कहानी बन गया है—किसानों, प्रशासन और भरोसे की कहानी। आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेवर में इस एयरपोर्ट का उद्घाटन किया, तो इसके पीछे की सबसे बड़ी चुनौती यानी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया फिर चर्चा में आ गई।
इस पूरे प्रोजेक्ट में अहम भूमिका निभाने वाले तत्कालीन जिलाधिकारी (DM) बीएन सिंह ने अब खुलकर बताया है कि आखिर कैसे हजारों किसानों से जमीन ली गई और वो भी बिना बड़े विरोध के।
शुरुआत में सबसे बड़ी चुनौती थी किसानों का भरोसा
बीएन सिंह के मुताबिक, जब जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई, तब हालात आसान नहीं थे। किसान अपनी जमीन देने को तैयार नहीं थे। उन्हें डर था कि कहीं उनकी जमीन चली गई तो उनका भविष्य क्या होगा।
कई गांवों में लोग असमंजस में थे। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि एयरपोर्ट बनने से उन्हें फायदा होगा या नुकसान। यही वजह थी कि शुरुआत में कई जगह विरोध और हिचकिचाहट भी देखने को मिली।
“दबाव नहीं, संवाद” बना सबसे बड़ा हथियार
पूर्व DM ने बताया कि सरकार ने इस प्रोजेक्ट में सबसे अलग तरीका अपनाया—किसानों पर दबाव डालने के बजाय उन्हें समझाने का रास्ता चुना गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासनिक टीम गांव-गांव पहुंची। खुद बीएन सिंह ने किसानों के घर जाकर उनसे बात की। बैठकों का दौर चला, चौपालें लगीं और हर सवाल का जवाब दिया गया।
किसानों को यह समझाया गया कि यह सिर्फ जमीन देने का मामला नहीं है, बल्कि उनके क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा फैसला है। उन्हें बताया गया कि एयरपोर्ट बनने से रोजगार बढ़ेगा, व्यापार बढ़ेगा और आने वाली पीढ़ियों को फायदा मिलेगा।
किसानों को दिखाया गया भविष्य का रोडमैप
प्रशासन ने किसानों को साफ तौर पर यह बताया कि इस प्रोजेक्ट से क्या बदलाव आएंगे।
- इलाके में बड़े निवेश आएंगे
- जमीन की कीमत बढ़ेगी
- युवाओं को रोजगार मिलेगा
- सड़क, मेट्रो और कनेक्टिविटी बेहतर होगी
धीरे-धीरे किसानों को समझ आने लगा कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि उनके अपने विकास का हिस्सा है।
दो साल में पूरा हुआ अधिग्रहण, बनी मिसाल
बीएन सिंह के अनुसार, यह देश की सबसे तेज और कम खर्चीली जमीन अधिग्रहण प्रक्रियाओं में से एक रही। करीब दो साल के भीतर हजारों हेक्टेयर जमीन किसानों की सहमति से ली गई।
सबसे खास बात यह रही कि इस पूरे प्रोसेस में बड़े स्तर पर कोई टकराव या हिंसा नहीं हुई। इसे प्रशासन और किसानों के बीच भरोसे का मॉडल माना जा रहा है।
आज दिख रहा है उसी भरोसे का नतीजा
आज जब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू हो चुका है, तो इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर का दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बन चुका है और आने वाले समय में यह क्षेत्र का सबसे बड़ा एविएशन हब बनने की ओर बढ़ रहा है।
सरकार का दावा है कि यह प्रोजेक्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए गेम चेंजर साबित होगा और व्यापार, निवेश व रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
स्थानीय लोगों और किसानों में खुशी
एयरपोर्ट के उद्घाटन के साथ ही स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है। कई किसान, जिन्होंने अपनी जमीन दी थी, अब इस प्रोजेक्ट को अपने फैसले का सही परिणाम मान रहे हैं।
लोगों का कहना है कि जिस विकास का वादा किया गया था, अब वह जमीन पर उतरता दिख रहा है। युवाओं को उम्मीद है कि आने वाले समय में उन्हें अपने ही क्षेत्र में रोजगार के मौके मिलेंगे।
भरोसे से बना विकास का मॉडल
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की यह कहानी सिर्फ एक प्रोजेक्ट की नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि अगर सरकार और जनता के बीच संवाद और भरोसा हो, तो बड़े से बड़ा काम बिना संघर्ष के पूरा किया जा सकता है।
जेवर एयरपोर्ट इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां “जमीन अधिग्रहण” एक विवाद नहीं, बल्कि सहमति और विकास की कहानी बन गया।
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