Women Reservation Bill: लोकसभा में बड़ा बदलाव प्रस्तावित, सीटें 850 तक, महिलाओं को 33% आरक्षण
केंद्र सरकार ने संसद के विशेष सत्र से पहले तीन महत्वपूर्ण विधेयकों का मसौदा सांसदों को भेजा है, जिनमें भारतीय लोकतंत्र की संरचना में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। इन प्रस्तावों में लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए Women Reservation Bill के तहत 33% आरक्षण लागू करने जैसे ऐतिहासिक कदम शामिल हैं।
इन विधेयकों को 16 से 18 अप्रैल के बीच बुलाए गए विशेष सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। सरकार का दावा है कि इन बदलावों से प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित और समावेशी होगा, जबकि विपक्ष ने इनके समय और मंशा पर सवाल उठाए हैं।
कौन-कौन से हैं प्रस्तावित विधेयक?
सरकार द्वारा जिन तीन प्रमुख विधेयकों का मसौदा जारी किया गया है, उनमें शामिल हैं:
- केंद्र शासित प्रदेश क़ानून (संशोधन) विधेयक 2026
- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026
- परिसीमन विधेयक 2026
ये विधेयक 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लागू करने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं। पहले इस कानून को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया था, जिससे इसके लागू होने में लंबा समय लगने की आशंका थी।
लोकसभा सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव
संविधान संशोधन विधेयक के तहत लोकसभा की अधिकतम सीटों को 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित की जा सकती हैं।
यह बदलाव संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन के जरिए किया जाएगा। गौरतलब है कि 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों के पुनर्निर्धारण पर 1976 से रोक लगी हुई है। अब सरकार इस रोक को हटाकर नई जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्गठन करना चाहती है।
परिसीमन और 2011 जनगणना का आधार
परिसीमन विधेयक 2026 के अनुसार, सीटों का पुनर्निर्धारण “ताज़ा प्रकाशित जनगणना” के आधार पर किया जाएगा। चूंकि भारत में आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी, इसलिए फिलहाल उसी को आधार बनाए जाने की संभावना है।
परिसीमन आयोग, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश करेंगे, इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देगा। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य चुनाव आयुक्त भी सदस्य होंगे।
दक्षिणी राज्यों की चिंता
इस प्रस्ताव को लेकर सबसे अधिक विरोध दक्षिण भारत के राज्यों से सामने आ रहा है। उनका मानना है कि अगर सीटों का निर्धारण जनसंख्या के अनुपात में हुआ, तो उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को ज्यादा सीटें मिलेंगी, जिससे दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इसे “लोकतंत्र पर हमला” बताते हुए कहा कि राज्यों से बिना परामर्श लिए ऐसा फैसला लेना गलत है। वहीं, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भी इस मॉडल का विरोध करने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है और अब उन्हें इसका नुकसान झेलना पड़ सकता है।
Women Reservation Bill को लेकर क्या है प्रस्ताव?
विधेयकों में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव भी शामिल है। वर्तमान में लोकसभा में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 14% है, जो वैश्विक औसत (करीब 27%) से काफी कम है।
प्रस्ताव के अनुसार, महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का रोटेशन हर परिसीमन चक्र के बाद किया जाएगा और यह आरक्षण 15 वर्षों तक लागू रहेगा, जिसे बाद में बढ़ाया भी जा सकता है।
विपक्ष का आरोप: चुनावी राजनीति
विपक्षी दलों ने इन विधेयकों के समय पर सवाल उठाते हुए इसे पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के आगामी चुनावों से जोड़कर देखा है। उनका आरोप है कि सरकार महिला मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए यह कदम उठा रही है।
राज्यसभा सांसदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि 2023 में पारित कानून को तत्काल लागू करने की मांग को नजरअंदाज किया गया था, जबकि अब अचानक इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।
2029 चुनाव पर पड़ सकता है असर
अगर ये तीनों विधेयक संसद से पारित हो जाते हैं, तो 2029 के आम चुनाव में महिला आरक्षण लागू होने का रास्ता साफ हो सकता है। साथ ही, लोकसभा की नई संरचना देश की राजनीति और प्रतिनिधित्व के समीकरणों को भी बदल सकती है।
कुल मिलाकर, ये प्रस्ताव भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकते हैं, लेकिन इन पर सहमति बनाना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।
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