China Nuclear Submarine Missile Test: चीन ने न्यूक्लियर सबमरीन से दाग दी बैलिस्टिक मिसाइल, प्रशांत महासागर में मचा हड़कंप, घबराया अमेरिका
China Nuclear Submarine Missile Test: चीन ने सोमवार को दक्षिण प्रशांत महासागर में अपनी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी से एक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागी। इस मिसाइल परिक्षण के बाद अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और ताइवान ने चिंता जताई है।
प्रशांत महासागर में चीन का बड़ा मिसाइल परिक्षण
चीन की सेना ने सोमवार को दक्षिण प्रशांत महासागर में एक बड़ा सैन्य कदम उठाया। चीन की पीपलस लिबरेशन आर्मी नौसेना यानि PLAN ने अपनी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी से एक लंबी दूरी की पनडुब्बी लॉन्च बैलस्टिक मिसाइल दागी। यह मिसाइल 12 बजकर 1 मिनट पर लॉन्च की गई।
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, इस मिसाइल में असली हथियार नहीं बल्कि एक डमी ट्रेनिंग वारहेड लगा था। मिसाइल पहले से तय समुद्री इलाके में सटीकता से जाकर गिरी। यह लॉन्च चीन और रूस के बीच शुरू हुए वार्षिक नौसैनिक अभ्यास “जॉइंट सी-2026” के पहले दिन हुआ, जो क्विंगदाओ बंदरगाह से शुरू होकर 13 जुलाई तक चलेगा।
कौन सी मिसाइल हो सकती है ?
चीन ने आधिकारिक तौर पर मिसाइल का नाम या पनडुब्बी की पहचान उजागर नहीं की है। सूत्रों के मुताबिक, यह मिसाइल JL-2 या JL-3 मिसाइल थी, जो फिलीपींस के लुजोन द्वीप के ऊपर से गुजरते हुए नाउरू और टोंगा के बीच समुद्र में जारकर गिरी।
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के पुराने अनुमान के मुताबिक, JL-2 मिसाइल की मारक क्षमता करीब 10,000 किलोमीटर तक मानी जाती है। यानी यह मिसाइल भारत और अमेरिका तक मार करने में सक्षम मानी जा रही है।
परमाणु मुक्त क्षेत्र में परिक्षण से बड़ा विवाद
यह मिसाइल परिक्षण दक्षिण प्रशांत महासागर के उस हिस्से में किया गया, जिसे 1986 की रारोटोंगा संधि के तहत परमाणु मुक्त क्षेत्र घोसित किया गया है। चीन ने 1987 में इस संधि के प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करते हुए यह वादा किया था की वह इस क्षेत्र में परमाणु हथियारों का परिक्षण नहीं करेगा।
न्यूजीलैंड सरकार ने बताया की उसे इस परिक्षण की जानकारी लॉन्च से केवल कुछ घंटे पहले ही दी गई थी। न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने कहा की इतने काम समय पहले सुचना देना क्षेत्रीय सुरक्षा से जुडी चिंताओं को पूरी तरह दूर नहीं करता।
अमेरिका ने जताई चिंता
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने एक बयान जारी कर कहा की अमेरिका ने इस मिसाइल परिक्षण पर नजर रखी थी। उन्होंने कहा की जहाँ अमेरिका परमाणु हथियारों को फैलाने से रोकने के लिए लगातार काम कर रहा है, वहीँ चीन इसके उलट कदम उठा रहा है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा की चीन का तेज और अपारदर्शी परमाणु हथियार निर्माण पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। अमेरिका ने चीन से हथियार नियंत्रण को लेकर बातचीत करने और मिसाइल परीक्षणों की सुचना नियमित रूप से देने की अपील की। साथ हैअमेरिका ने कहा की वह अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध रहेगा।
ऑस्टेलिया, जापान, और ताइवान की प्रतिक्रिया
ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने इस मिसाइल परिक्षण को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया। संयोग से इसी दिन ऑस्ट्रेलिया ने फिजी के साथ “ओशन ऑफ़ पीस” नाम की नै रक्षा संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दोनों देश हमले करने पर सहमत हुए हैं।
जापान सरकार ने भी चिंता जताते हुए कहा की उसने चीन से मिसाइल परीक्षण पर पुनर्विचार करने की अपील की, ताकि यह जापान की सुरक्षा के लिए खतरा न बने। जापान के तटरक्षक बल को बताया गया था की मिसाइल का मलबा जापान के होंशु द्वीप के पास उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र में गिर सकता है। वहीँ ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव जोसेफ वू ने इस परिक्षण को उकसावे वाला कदम बताते हुए इसे इंडो पैसिफिक क्षेत्र को अस्थिर करने वाला बताया।
चीन ने दी सफाई
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा की यह बैलेस्टिक मिसाइल परिक्षण चीनी सेना के नियमित वार्षिक प्रशिक्षण का हिस्सा था। उन्होंने स्पष्ट किया की यह देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार पहले ही सम्बंधित देशों को इसकी जानकारी दे दी गयी थी।
आगे क्या
विशेषज्ञों का मान न है की यह प्रशांत महासागर में चीन का पहला सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया पनडुब्बी से रणनीतिक मिसाइल परिक्षण है। इससे साफ़ है की चीन अपनी परमाणु क्षमता तेजी से बढ़ा रहा है, जिस पर दुनिया की नज़र बानी हुई है।
यह भी पढ़े…
