Child Begging-Free Delhi: दिल्ली में ‘बाल भिक्षा-मुक्त दिल्ली’ अभियान जल्द, बच्चों को भीख से निकालकर शिक्षा से जोड़ेगी सरकार
Child Begging-Free Delhi: दिल्ली सरकार जल्द ‘बाल भिक्षा-मुक्त दिल्ली’ अभियान शुरू करेगी। 13 जिलों में चलने वाले इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को भीख मांगने से निकालकर शिक्षा, देखभाल और स्किल ट्रेनिंग से जोड़ना है। परिवारों की काउंसलिंग के साथ बच्चों से भीख मंगवाने वाले संगठित गिरोहों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली में जल्द शुरू होगा ‘बाल भिक्षा-मुक्त दिल्ली’ अभियान
दिल्ली सरकार राजधानी को बाल भिक्षावृत्ति से मुक्त बनाने के लिए जल्द ही ‘बाल भिक्षा-मुक्त दिल्ली’ अभियान शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर इस अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह अभियान दिल्ली के सभी 13 जिलों में चलाया जाएगा।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों, ट्रैफिक सिग्नल, बाजारों, धार्मिक स्थलों, बस स्टैंड, मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख चौराहों पर भीख मांगने वाले बच्चों को सुरक्षित वातावरण और बेहतर भविष्य देना है।
बच्चों को जबरन नहीं हटाया जाएगा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि अभियान के दौरान बच्चों को जबरदस्ती सड़कों से नहीं हटाया जाएगा। सरकार दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के साथ मिलकर बच्चों और उनके परिवारों की समस्याओं को समझेगी।
परिवारों की काउंसलिंग की जाएगी और उनकी आर्थिक या अन्य परेशानियों को समझकर बच्चों के लिए भीख मांगने के बजाय बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।
भीख मंगवाने वाले गिरोहों पर होगी कार्रवाई
सरकार का एक बड़ा फोकस उन संगठित गिरोहों की पहचान करने पर भी होगा, जो छोटे, गरीब, बेघर या मजबूर बच्चों को भीख मांगने के लिए इस्तेमाल करते हैं। रेखा गुप्ता ने कहा कि ऐसे गिरोहों की पहचान कर उन्हें सामने लाया जाएगा। उनके खिलाफ जरूरत के अनुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने लोगों से भी अभियान को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव और प्रतिक्रिया सरकार तक पहुंचाने की अपील की है।
स्वतंत्रता दिवस के आसपास शुरू हो सकता है अभियान
DCPCR के चेयरमैन ओपी व्यास ने बताया कि जनता से मिलने वाले सुझावों पर विचार करने के बाद यह अभियान स्वतंत्रता दिवस के आसपास शुरू किए जाने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि बाल भिक्षावृत्ति की समस्या को दो हिस्सों में समझने की जरूरत है। पहला, उन माता-पिता की काउंसलिंग करना है जो आर्थिक या दूसरी परेशानियों के कारण बच्चों को भीख मांगने के लिए भेजते हैं। दूसरा, उन संगठित गिरोहों पर कार्रवाई करना है जो बच्चों को जबरदस्ती भीख मांगने के लिए मजबूर करते हैं।
बच्चों की पढ़ाई और स्किल ट्रेनिंग पर जोर
ओपी व्यास ने बताया कि इस अभियान में NGOs के साथ-साथ बाल कल्याण समितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत बाल कल्याण समितियों को देखभाल और सुरक्षा की जरूरत वाले बच्चों के लिए जरूरी फैसले लेने का अधिकार है।
भीख मांगने से बाहर निकाले गए बच्चों को केवल सड़क से हटाना ही अभियान का उद्देश्य नहीं होगा। उन्हें देखभाल, शिक्षा और जरूरी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। छोटे बच्चों को औपचारिक शिक्षा से जोड़ने की कोशिश की जाएगी, जबकि बड़े बच्चों के लिए स्किल ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वे आगे चलकर अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
दिल्ली में हजारों बच्चे सड़कों पर
सामाजिक संगठनों के अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में करीब 70 हजार स्ट्रीट चिल्ड्रन हैं। इनमें से बड़ी संख्या में बच्चे सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगते हैं। ये बच्चे धार्मिक स्थलों, बस और मेट्रो स्टेशनों, बाजारों और बड़े चौराहों पर अक्सर दिखाई देते हैं।
सरकार के प्रस्तावित अभियान का मकसद केवल बच्चों को भीख मांगने से रोकना नहीं, बल्कि उनकी पारिवारिक परेशानियों को समझना, उन्हें शिक्षा और रोजगार से जोड़ना और बच्चों का शोषण करने वाले गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करना है। सरकार का कहना है कि बच्चों को सड़कों पर भीख मांगने के बजाय ऐसा माहौल और अवसर मिलना चाहिए, जिससे वे सुरक्षित तरीके से अपना भविष्य बना सकें।
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