Satya Niketan Building Collapse: 7 मौतों के बाद बड़ा एक्शन, मालिक समेत 3 गिरफ्तार, 27 घंटे बाद खत्म हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
Satya Niketan Building Collapse: दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत गिरने की घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। हादसे के बाद करीब 27 घंटे तक चले राहत और बचाव अभियान को सोमवार शाम समाप्त कर दिया गया। हादसे में पांच लोग घायल हुए हैं, जबकि मलबे से 12 लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास हुए इस हादसे ने राजधानी में छात्र आवासों और PG इमारतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने इमारत से जुड़े हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
Satya Niketan Building Collapse: 27 घंटे बाद खत्म हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई थी। इमारत में मुख्य रूप से छात्र रहते थे। हादसे के बाद NDRF, पुलिस, दमकल और अन्य बचाव एजेंसियों की टीमें लगातार मलबा हटाने और लोगों की तलाश में जुटी रहीं।
करीब 27 घंटे चले अभियान के दौरान मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला गया। हालांकि, सात लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। सोमवार शाम तक बचाव अभियान पूरा कर लिया गया।
मृतकों में छात्र और मजदूर शामिल
हादसे में जान गंवाने वालों में ज्यादातर युवा छात्र बताए गए हैं। मृतकों में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से दिल्ली में पढ़ाई करने आए छात्र शामिल हैं। एक मजदूर की भी मौत हुई है। घायलों में भी कई छात्र शामिल हैं, जिनका इलाज अस्पताल में कराया जा रहा है।
हादसे के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक, इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था। बेसमेंट में पानी जमा होने और निर्माण या खुदाई से जुड़े काम को हादसे की संभावित वजहों में शामिल किया जा रहा है। हालांकि, हादसे की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मालिक, पत्नी और बेटे पर कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने मामले में PG से जुड़े परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, हरिराम गुप्ता को राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा गया, जबकि उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को भी मामले में गिरफ्तार किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उर्मिला संपत्ति की पंजीकृत मालिक थीं, हरिराम के नाम बिजली कनेक्शन था और महेश PG के संचालन से जुड़ा था।
कोर्ट ने हरिराम और उर्मिला गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। वहीं, महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस रिमांड मिली है। जांच एजेंसियां इमारत के निर्माण, मरम्मत, बेसमेंट में हुए काम और PG के संचालन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं।
नगर निगम ने पांच अधिकारियों को निलंबित
हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें डिप्टी कमिश्नर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई इमारत की निगरानी और नियमों के पालन से जुड़े सवालों के बीच की गई है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने भी मामले में MCD की भूमिका की जांच के लिए हाई-लेवल जांच के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इस तरह की घटनाओं में सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
दिल्ली में अवैध पांचवीं मंजिलों पर कार्रवाई
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने अनधिकृत पांचवीं मंजिल वाले भवनों को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। MCD के अधिकारियों को ऐसे इमारतों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है।
दिल्ली के उपराज्यपाल ने भी PG हब वाले इलाकों में निरीक्षण अभियान चलाने और इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, PG इलाकों में इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच एक सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
छात्रों की सुरक्षा पर उठे सवाल
सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए छात्र PG और किराए के कमरों में रहते हैं। हादसे के बाद कई छात्रों ने डर के कारण अपने कमरे खाली करना शुरू कर दिया। इलाके में अन्य इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। कुछ खतरनाक इमारतों को लेकर demolition notices जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि छात्र आवास के लिए इस्तेमाल की जा रही पुरानी इमारतों की नियमित रूप से संरचनात्मक जांच होती है या नहीं और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की स्थिति में समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।
PG एग्रीमेंट भी जांच के घेरे में
हादसे के बाद PG के एक कथित एग्रीमेंट की कॉपी भी चर्चा में आई है, जिसमें कुछ परिस्थितियों में मालिक की जिम्मेदारी सीमित करने वाली शर्तें होने की बात सामने आई है। इस दस्तावेज को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और इसकी कानूनी वैधता तथा हादसे से जुड़े मामलों में इसकी भूमिका की जांच की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
सत्य निकेतन हादसे को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई करेगा और अदालत में दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित मामले को अपने पास ट्रांसफर करने पर भी विचार किया जा सकता है।
इस बीच दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से भी हादसे में प्रभावित छात्रों और उनके परिवारों की मदद को लेकर कदम उठाए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय ने अपने संबद्ध कॉलेजों से सत्य निकेतन इलाके में रहने वाले छात्रों की जानकारी जुटाने को कहा है और मृतक छात्रों के परिवारों को सहायता देने पर भी विचार किया जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल-जिम्मेदारी किसकी?
सत्य निकेतन की यह घटना सिर्फ एक इमारत के गिरने तक सीमित नहीं है। सात लोगों की मौत के बाद अब सवाल इमारत की सुरक्षा, बेसमेंट में हुए काम, PG संचालन, MCD की निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर उठ रहे हैं।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है, तीन लोग गिरफ्तार हैं, पांच MCD अधिकारी निलंबित किए जा चुके हैं और अदालतों में मामले की सुनवाई शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि आखिर पांच मंजिला इमारत हादसे से पहले किस स्थिति में थी और किन लापरवाहियों की वजह से यह हादसा हुआ।
