Amarnath Yatra 2026: 4800 श्रद्धालुओं का पहला जत्था कश्मीर पहुंचा, जानिए इस बार क्या है नया
Amarnath Yatra 2026, 3 जुलाई से शुरू हो गई है। श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को जम्मू के भगवती नगर यात्री निवासी से उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस जत्थे में 4822 श्रद्धालु शामिल थे। यात्रा मार्ग पर हर 2 किलोमीटर पर ऑक्सीजन बूथ और बालटाल रुट पर वाटरप्रूफ डोम शेल्टर बनाए गए हैं।
जम्मू से रवाना हुआ अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को भगवती नगर आधार शिविर से अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे को रवाना किया। यह जत्था कश्मीर स्तिथ पहलगाम कर बालटाल आधार शिविर के लिए भेजा गया। रवाना होने से पहले सिन्हा ने भगवती नगर आधार शिविर में विशेष पूजा-अर्चना की।
4822 श्रद्धालुओं में से 2510 पारम्परिक पहलगाम मार्ग से और 2312 बालटाल मार्ग से यात्रा पर निकले। जत्था रवाना होते समय बेस कैंप ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा।
सुरक्षा व्यवस्था और स्वागत
जैसे ही काफिला कश्मीर घाटी पहुंचा, श्रद्धालुओं का जोरदार स्वागत किया गया। उत्तर कश्मीर रेंज के उपमहानिरीक्षक विनोद कुमार, डिप्टी कमिश्नर इंदु कंवल चिब और एसएसपी एजाज अहमद जरगर ने यात्रिओं को फूल देकर शुभकामनाएं दी। बालटाल बेस कैंप में डिप्टी कमिश्नर जतिन किशोर, डीआईजी मक़सूद-उल-जमान और एसएसपी सुधांशु धामा ने स्वागत किया। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में तीर्थयात्री नवयुग टनल से घाटी में दाखिल हुए। जहाँ डीआईजी जावीद इकबाल मट्टू और डिप्टी कमिश्नर शहजाद ने माला व फूल देकर उनका स्वागत किया।
57 दिनतक चलेगी यात्रा, दो मार्गों से होंगे दर्शन
यह वार्षिक यात्रा कुल 57 दिनों तक चलेगी और 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी। यात्रा दो मार्गों स एक साथ शुरू हुई है। पहला अनंतनाग जिले का पारम्परिक नुनवान- पहलगाम मार्ग है, जसकी लम्बाई करीब 48 किलोमीटर है। दूसरा गांदरबल जिले का बालटाल मार्ग है, जिसकी लम्बाई करीब 14 किलोमीटर है, लेकिन चढ़ाई कड़ी होने के कारन यह ज़्यदा कठिन माना जाता है। पवित्र अमरनाथ गुफा समुद्र ताल से करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्तिथ है। पहले जत्थे को शुक्रवार सुबह ठीक 4 बजे बेस कैंप से गुफा की ओर रवाना किया गया। हलकी बारिश के कारन यात्रा में थोड़ी देरी हुई, क्योंकि इसे पहले सुबह 3 बजे रवाना किया जाना था।
हर 2 किमी पर ऑक्सीजन बूथ, बालटाल रुट पर वाटरप्रूफ डोम
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी से निपटने के लिए यात्रा मार्ग पर हर दो किलोमीटर की दुरी पर विशेष मेडिकल बूथ बनाये गए हैं। इसके अलावा बालटाल और पहलगाम दोनों मार्गों पर 100-100 बिस्तरों वाले दो अस्थायी बेस अस्पताल भी बनाए गए हैं।
बारिश और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए बालटाल मार्ग पर बरारी से रैलपथरी के बीच सम्बेदंशील स्थानों पर कई वाटरप्रूफ डोम शेल्टर बनाए गए हैं। ताकि बारिश के दौरान शेल्टर यात्रियों को सुरक्षित ठहरने की जगह मिल सके। दोमेल रुट पर बड़ी स्क्रीनों के जरिये मौसम और मार्ग की जानकारी दी जा रही है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
अमरनाथ यात्रा के लिए इस बार पहले से ज्या सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। सीआरपीएफ, जम्मू कश्मीर पुलिस और भारतीय सेना मिलकर सुरक्षा संभल रहे हैं। काफिले के गुजरने के दौरान नेशनल हाईवे को अस्थाई रूप से सील कर दिया जाता है और हाईवे पर सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो व बख्तरबंद गाड़ियां तैनात रहती है।
दोनों मार्गों पर एंटी ड्रोन सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे और फेशियल रेकग्निशन सिस्टम लगाए गए हैं। प्रशासन ने 1 जुलाई से यात्रा समाप्त होने तक दोनों मार्गों को नो फ्लाइंग जाने घोषित किया है, जिस वजह से इस साल हेलिकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं रहेगी।
पंजीकरण और जरुरी दस्तावेज
हर श्रद्धालु के पास अनिवार्य स्वास्थ प्रमाणपत्र होना जरुरी है, जो 8 अप्रैल 2026 या उसके बाद अधिकृत डॉक्टर द्वारा जारी किया गया हो। श्रद्धालुओं को RFID कार्ड के बिना आगे बढ़ने की अनुमति नहीं है। मार्ग पर करीब 100 ट्रांजिट कैंप बनाए गए हैं, जहाँ मुफ्त लंगर, ठहरने और चिकित्सा की सुविधा है। पैदल चलने में परेशानी वाले श्रद्धालुओं के लिए पोनी, खच्चर, और पालकी की सुविधा भी है।
आगे क्या रहेगा यात्रा का कार्यक्रम?
पहला जत्था बेस कैंप से पवित्र गुफा की ओर रवाना हो चूका है। इसके साथ ही शुक्रवार को श्रद्धालुओं का दूसरा जत्था भी कड़ी सुरक्षा के बीच जम्मू से श्रीनगर के लिए रवाना कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में रोज़ाना नए जत्थे कश्मीर घाटी के लिए रावण होते रहेंगे। अनुमान है की 28 अगस्त तक 4 लाख से ज्या श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पवित्र गुफा तक पहुंचेंगे। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां यात्रा को सुरक्षित और सुचारु रूप से पूरा कराने के लिए लगातार निगरानी बनाये हुए हैं।
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