Apple Touchscreen MacBook Pro: Apple ने पेश किया अपना पहला टचस्क्रीन MacBook, Steve Jobs की पुरानी सोच से हटकर लिया बड़ा फैसला
Apple Touchscreen MacBook Pro: Apple ने अपनी MacBook सीरीज़ में बड़ा बदलाव करते हुए पहला टचस्क्रीन MacBook Pro पेश किया है। यह कदम कंपनी के दिवंगत सह-संस्थापक Steve Jobs की पुरानी सोच से अलग है और दिखाता है कि Apple अब बदलती तकनीक और ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार अपनी रणनीति बदल रहा है।
दुनिया की प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों में शामिल Apple ने अपने लैपटॉप को लेकर एक नया कदम उठाया है। कंपनी ने पहली बार MacBook Pro में टचस्क्रीन फीचर पेश किया है। यह बदलाव इसलिए भी खास है क्योंकि Steve Jobs लंबे समय तक लैपटॉप में टचस्क्रीन देने के विचार के पक्ष में नहीं थे। हालांकि, समय के साथ तकनीक और ग्राहकों की जरूरतें बदल रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए Apple अपनी पुरानी रणनीति से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
Apple Touchscreen MacBook Pro: Apple का पहला टचस्क्रीन MacBook Pro
नया टचस्क्रीन MacBook Pro Apple की लैपटॉप सीरीज़ में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसमें पारंपरिक कीबोर्ड और ट्रैकपैड के साथ स्क्रीन को सीधे छूकर इस्तेमाल करने की सुविधा दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह लैपटॉप OLED आधारित PROLED XDR डिस्प्ले के साथ आया है। इसे 14 इंच और 16 इंच के दो विकल्पों में पेश किया गया है। इसमें Apple के M5 Pro और M5 Max प्रोसेसर दिए गए हैं। इसकी शुरुआती कीमत 14 इंच मॉडल के लिए 2,899 डॉलर और 16 इंच मॉडल के लिए 3,399 डॉलर रखी गई है। इसके लिए प्री-ऑर्डर 30 अक्टूबर से शुरू हुए और सामान्य बिक्री 6 नवंबर 2026 से निर्धारित की गई है।
Steve Jobs टचस्क्रीन MacBook के खिलाफ क्यों थे?
Apple के सह-संस्थापक Steve Jobs की टचस्क्रीन लैपटॉप को लेकर सोच अलग थी। अक्टूबर 2010 में एक प्रेजेंटेशन के दौरान उन्होंने बताया था कि लैपटॉप की सीधी स्क्रीन पर लगातार हाथ उठाकर काम करना लंबे समय तक इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए असुविधाजनक हो सकता है।
उनका मानना था कि स्क्रीन को बार-बार छूने से हाथों और कंधों में थकान महसूस हो सकती है। इसी वजह से Apple ने कई वर्षों तक अपने MacBook में टचस्क्रीन फीचर शामिल नहीं किया। लेकिन अब कंपनी का नया फैसला बताता है कि Apple अपनी पुरानी सोच में बदलाव करने के लिए तैयार है।
Apple अब अपने संस्थापक की पुरानी सोच से आगे बढ़ रहा है
टचस्क्रीन MacBook पहला ऐसा उदाहरण नहीं है, जब Apple ने Steve Jobs की पुरानी सोच से अलग रास्ता चुना हो। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने कई ऐसे प्रोडक्ट और सेवाएं पेश की हैं, जो उनकी शुरुआती विचारधारा से अलग थीं।
इनमें कुछ प्रमुख उदाहरण शामिल हैं:
- बड़ी स्क्रीन वाले iPhone: 2014 में Apple ने iPhone 6 और iPhone 6 Plus पेश किए।
- iPad mini: Steve Jobs की छोटे टैबलेट को लेकर आपत्तियों के बावजूद Apple ने 2012 में iPad mini लॉन्च किया।
- Apple Pencil: 2015 में कंपनी ने Apple Pencil पेश किया।
- Apple Music: 2015 में Apple ने अपनी म्यूजिक स्ट्रीमिंग सर्विस शुरू की।
- किफायती MacBook: कंपनी ने अधिक ग्राहकों तक पहुंचने के लिए कम कीमत वाले लैपटॉप सेगमेंट में भी विस्तार किया।
इन उदाहरणों से पता चलता है कि Apple समय के साथ अपनी प्रोडक्ट रणनीति में बदलाव करता रहा है।
iPhone Duo के साथ भी Apple ने किया बड़ा बदलाव
Apple की बदलती रणनीति केवल MacBook तक सीमित नहीं है। कंपनी ने सितंबर 2026 में अपना पहला फोल्डेबल स्मार्टफोन iPhone Duo भी पेश किया। इसमें 7.6 इंच की इंटरनल डिस्प्ले और 5.4 इंच की एक्सटर्नल डिस्प्ले दी गई है।
फोल्डेबल डिजाइन के कारण यूजर्स को मल्टीटास्किंग, एंटरटेनमेंट और प्रोडक्टिविटी के लिए अधिक विकल्प मिलते हैं। BigGo की रिपोर्ट में Apple Pencil सपोर्ट को भी कंपनी की बदलती तकनीकी रणनीति का एक उदाहरण बताया गया है।
Apple का बढ़ता कारोबार और बदलती रणनीति
Apple की बदलती प्रोडक्ट रणनीति के पीछे उसका मजबूत वैश्विक कारोबार भी एक महत्वपूर्ण कारण है। कंपनी का वित्त वर्ष 2025 का राजस्व लगभग 416.2 अरब डॉलर रहा, जबकि 2011 में यह करीब 108 अरब डॉलर था। 2011 में ही Steve Jobs का निधन हुआ था। इसके अलावा, Apple का सर्विसेज बिजनेस भी तेजी से बढ़ा है और इससे कंपनी को 100 अरब डॉलर से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है।
इससे साफ होता है कि Apple अब केवल iPhone और MacBook जैसे हार्डवेयर प्रोडक्ट पर निर्भर नहीं है। कंपनी की सेवाएं, सब्सक्रिप्शन और पूरा टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम भी उसके कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
Apple के भविष्य के लिए क्या मायने रखता है यह बदलाव?
टचस्क्रीन MacBook Pro केवल एक नए फीचर की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह Apple की बदलती सोच को भी दर्शाता है। आज के ग्राहक ऐसे डिवाइस चाहते हैं, जिनमें बेहतर परफॉर्मेंस, आसान इस्तेमाल और अलग-अलग तरीकों से काम करने की सुविधा हो। Apple का यह कदम दिखाता है कि कंपनी अपनी पुरानी परंपराओं को बनाए रखने के साथ-साथ नए प्रयोग करने के लिए भी तैयार है।
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