Iran War : होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ा युद्ध का खतरा: ईरान की समुद्री माइंस हटाने को ब्रिटेन तैयार, कमांडो उतरेंगे पानी में
मध्य पूर्व के बेहद अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट में इस समय तनाव काफी बढ़ गया है। इस खतरे को देखते हुए ब्रिटेन ने बड़ा कदम उठाया है। उसने अपनी रॉयल नेवी की एक खास गोताखोर टीम को पूरी तरह तैयार और अलर्ट मोड में रखा है। जरूरत पड़ने पर यह टीम समुद्र में उतरकर ईरान द्वारा बिछाई गई खतरनाक बारूदी माइंस को खोजकर नष्ट करेगी।
दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइंस होने की खबर सामने आने के बाद दुनियाभर के जहाजों में डर का माहौल है। कई जहाज इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे हालात में ब्रिटेन इन माइंस को हटाकर जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता बनाने की तैयारी कर रहा है।
समुद्र में उतरेंगे खतरनाक मिशन वाले कमांडो
ब्रिटेन की यह खास टीम रॉयल नेवी के “डाइविंग एंड थ्रेट एक्सप्लॉइटेशन ग्रुप (DTXG)” का हिस्सा है। इस यूनिट को दुनिया की सबसे खतरनाक सैन्य टुकड़ियों में गिना जाता है। इन कमांडो का काम समुद्र के अंदर जाकर छिपे हुए विस्फोटकों और माइंस को ढूंढना और उन्हें निष्क्रिय करना होता है।
यह काम बेहद जोखिम भरा होता है क्योंकि उन्हें गहरे पानी में, बहुत कम रोशनी और खतरनाक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। जरा सी गलती जानलेवा साबित हो सकती है।
कैसे ऑपरेशन को अंजाम देती है यह टीम
रिपोर्ट्स के अनुसार, ये कमांडो अलग-अलग तरीकों से मिशन तक पहुंच सकते हैं। वे नाव, पैराशूट या मिनी पनडुब्बियों (मिनी-सबमरीन) का इस्तेमाल करते हैं। इन छोटी पनडुब्बियों में छह गोताखोर एक साथ जा सकते हैं और ये करीब 50 किलोमीटर तक काम कर सकती हैं।
इसके अलावा, यह टीम अत्याधुनिक पनडुब्बियों के साथ भी काम करती है। इन कमांडो को आतंकवाद-रोधी अभियानों की भी ट्रेनिंग दी जाती है और वे स्पेशल बोट सर्विस (SBS) के साथ मिलकर बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हैं।
कितना बड़ा है समुद्री माइंस का खतरा
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कई दर्जन समुद्री माइंस बिछाई हो सकती हैं। ये माइंस कई तरह से हमला कर सकती हैं—
जहाज के टकराते ही विस्फोट
मैग्नेटिक (चुंबकीय) सिग्नल से धमाका
आवाज (साउंड सिग्नल) के जरिए एक्टिव होना
ईरान के पास करीब 5,000 तक समुद्री माइंस होने का अनुमान है। इनमें भारी मात्रा में विस्फोटक भरा होता है। कुछ माइंस पानी के अंदर तैरती रहती हैं, जबकि कुछ समुद्र की तलहटी में लगी होती हैं और जहाज के ऊपर आते ही हमला करती हैं।
सबसे खतरनाक बात यह है कि कुछ माइंस को लगाने के बाद तुरंत सक्रिय नहीं किया जाता, बल्कि उन्हें कई दिनों बाद चालू किया जाता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
दुनिया पर क्या पड़ेगा असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई गुजरती है। ऐसे में अगर यहां खतरा बढ़ता है, तो पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
इस समय सैकड़ों जहाज इस इलाके में फंसे हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बढ़ रहा है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो शिपिंग पूरी तरह रुक सकती है।
रॉयल नेवी के एक अधिकारी के अनुसार, अभी यह साफ नहीं है कि ईरान ने वास्तव में माइंस बिछाई हैं या नहीं, लेकिन किसी भी बुरी स्थिति के लिए पहले से तैयार रहना जरूरी है।
