Jamia Millia Islamia: जामिया में छात्र आंदोलन के बाद प्रशासन का बड़ा फैसला, चुनाव, निलंबन वापसी और जांच का ऐलान
Jamia Millia Islamia: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर करीब दो सप्ताह से जारी आंदोलन के बीच प्रशासन ने 26 अक्टूबर को लिखित आदेश जारी किया है। इसमें छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन बाद चुनाव कराने, प्रदर्शन के दौरान जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने तथा सुरक्षा कर्मियों के आचरण की जांच के लिए समिति गठित करने की बात कही गई है। हालांकि, संविधान को मंजूरी देने की तारीख तय नहीं होने से चुनाव की समय-सीमा पर सवाल बने हुए हैं।
Jamia Millia Islamia: 2006 से छात्र संघ चुनाव नहीं होने पर प्रदर्शन
जामिया में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर छात्रों ने 12 अक्टूबर से धरना और भूख हड़ताल शुरू की थी। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में वर्ष 2006 के बाद से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। उनकी प्रमुख मांग निर्वाचित छात्र प्रतिनिधित्व की बहाली और चुनाव के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करना रही है।
आंदोलन के दौरान छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच तनाव भी बढ़ा। कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और विश्वविद्यालय ने पहले कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करने का फैसला लिया था।
प्रशासन ने चुनाव को लेकर क्या कहा?
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से 26 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ के चुनाव संविधान को मंजूरी मिलने की तारीख से 15 दिन बाद कराए जाएंगे।
हालांकि, आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी कब दी जाएगी। ऐसे में चुनाव की निश्चित तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। यही मुद्दा छात्रों की प्रमुख चिंताओं में शामिल है।
निलंबन और कारण बताओ नोटिस होंगे वापस
प्रशासन ने आंदोलन की अवधि के दौरान छात्रों को जारी किए गए निलंबन आदेश और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की घोषणा भी की है। इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मियों के आचरण की जांच के लिए एक समिति गठित करने की बात कही गई है।
ये दोनों फैसले प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल थे। हालांकि, प्रशासन के आदेश में कुछ शर्तें भी दर्ज हैं। इसके तहत छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान की गई कथित मानहानिकारक टिप्पणियों, कार्रवाइयों या सोशल मीडिया पोस्ट के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक माफी देने और संबंधित पोस्ट हटाने की सहमति दी है।
क्या आंदोलन खत्म हो गया है?
प्रशासन के आदेश के बावजूद आंदोलन की समाप्ति को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं रही। कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने आदेश को अस्पष्ट बताते हुए आपत्ति जताई। उनका कहना है कि संविधान को मंजूरी देने की तारीख तय किए बिना चुनाव का निश्चित कार्यक्रम सामने नहीं आया है। छात्रों ने यह भी कहा कि उनकी कुछ अन्य मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने आदेश जारी होने के बाद प्रदर्शन समाप्त करने का निर्देश दिया है, लेकिन छात्रों की प्रतिक्रिया से साफ है कि चुनाव की समय-सीमा और समझौते की शर्तें आगे भी चर्चा का विषय रह सकती हैं।
जामिया में आगे क्या होगा?
जामिया में छात्र संघ चुनाव की बहाली की दिशा में प्रशासन का आदेश एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। निलंबन और नोटिस वापस लेने तथा सुरक्षा कर्मियों के आचरण की जांच का फैसला भी आंदोलन से जुड़े मुद्दों को संबोधित करता है।
हालांकि, चुनाव की प्रक्रिया संविधान को मंजूरी मिलने पर निर्भर है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संविधान को कब मंजूरी मिलती है और विश्वविद्यालय चुनाव के लिए निश्चित कार्यक्रम कब जारी करता है।

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