पार्टी ने राज्यसभा में डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी Raghav Chadha से लेकर Ashok Kumar Mittal को सौंप दी है।
आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर इन दिनों सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्टी ने राज्यसभा में डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी Raghav Chadha से लेकर Ashok Kumar Mittal को सौंप दी है। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं और बयानबाज़ी का दौर जारी है।
Raghav Chadha ने उठाए सवाल
पार्टी के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए राघव चड्ढा ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वे लगातार संसद में जनहित के मुद्दे उठाते रहे हैं और यह जानना चाहते हैं कि इससे पार्टी को क्या नुकसान हुआ।
Raghav Chadha ने एक वीडियो जारी कर कहा, “जब भी मुझे संसद में बोलने का मौका मिला, मैंने जनता की समस्याओं को उठाया। क्या जनता की आवाज़ बनना कोई अपराध है?”
चड्ढा ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से उनके बोलने के समय को सीमित करने की बात कही है। उन्होंने कहा, “मेरी आवाज़ को दबाने की कोशिश क्यों की जा रही है?”
पार्टी नेताओं का पलटवार
Raghav Chadha के बयान के बाद आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने उन पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि चड्ढा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चुप रहते हैं और भाजपा के खिलाफ खुलकर नहीं बोलते।
Anurag Dhanda ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पार्टी के कार्यकर्ता निडर हैं और अगर कोई डर जाए तो वह देश के लिए संघर्ष कैसे करेगा। उन्होंने चड्ढा पर आरोप लगाया कि वे पिछले कुछ समय से बड़े मुद्दों से बचते रहे हैं।
आतिशी और संजय सिंह के भी सवाल
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री Atishi Marlena ने भी राघव चड्ढा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “आप बीजेपी और प्रधानमंत्री से सवाल पूछने से क्यों डरते हैं?”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब Arvind Kejriwal की गिरफ्तारी हुई, तब पार्टी के कई नेता सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे, लेकिन चड्ढा उस समय लंदन में थे।
वहीं, राज्यसभा में आप के वरिष्ठ नेता Sanjay Singh ने कहा कि देश के कई अहम मुद्दों पर चड्ढा की चुप्पी सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी लाइन के महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी चड्ढा ने समर्थन नहीं दिया।
सौरभ भारद्वाज का ‘सॉफ्ट पीआर’ आरोप
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता Saurabh Bharadwaj ने राघव चड्ढा पर संसद में गंभीर मुद्दों की बजाय हल्के विषय उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सीमित समय में पार्टी को बड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर फोकस करना चाहिए।
अशोक मित्तल ने क्या कहा?
नए डिप्टी लीडर बनाए गए अशोक कुमार मित्तल ने इस पूरे विवाद को सामान्य बताते हुए कहा कि पार्टी में जिम्मेदारियां समय-समय पर बदलती रहती हैं।
उन्होंने कहा, “हमारी पार्टी लोकतांत्रिक है और हर नेता को सीखने और आगे बढ़ने का मौका दिया जाता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है।”
विपक्ष ने भी साधा निशाना
इस विवाद को लेकर विपक्षी दलों ने भी आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष Amarinder Singh Warring ने कहा कि राघव चड्ढा या तो पार्टी छोड़ सकते हैं या उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
वहीं, भाजपा नेता Ramvir Singh Bidhuri ने कहा कि किसी सांसद के बोलने पर रोक लगाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और पार्टी नेतृत्व को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।
केजरीवाल के करीबी रहे हैं राघव चड्ढा
राघव चड्ढा को कभी Arvind Kejriwal का करीबी रणनीतिकार माना जाता था। वे 2013 के ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन के दौरान पार्टी से जुड़े थे।
चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे चड्ढा ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की और पार्टी में शामिल होने के बाद तेजी से उभरे। वे पार्टी के सबसे युवा प्रवक्ताओं में से एक बने और टीवी डिबेट्स में पार्टी का प्रमुख चेहरा रहे।
2020 में उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की और 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद बने।
क्या बढ़ेगा विवाद?
आम आदमी पार्टी के अंदर चल रहा यह विवाद आने वाले समय में और गहराने की आशंका है। एक तरफ राघव चड्ढा अपने फैसले पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व और अन्य नेता खुलकर उनके खिलाफ बयान दे रहे हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इस अंदरूनी मतभेद को कैसे संभालती है और क्या यह विवाद आगे किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का रूप लेता है।
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