ईरान के भीतर एक बेहद जोखिम भरे और जटिल सैन्य ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने अपने एक घायल एयरमैन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
US Air Force rescue mission: ईरान के भीतर एक बेहद जोखिम भरे और जटिल सैन्य ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने अपने एक घायल एयरमैन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह मिशन न सिर्फ तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था, बल्कि इसमें दुश्मन की निगरानी, पहाड़ी भूभाग और समय के दबाव जैसी कई बाधाएं भी शामिल थीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ने “ईरान के पहाड़ों की गहराई से एक बहादुर एफ़-15 क्रू सदस्य को बचा लिया है,” जो गंभीर रूप से घायल था।
कैसे गिराया गया अमेरिकी फाइटर जेट
घटना की शुरुआत तब हुई जब दक्षिणी ईरान के ऊपर उड़ रहे अमेरिकी F-15E Strike Eagle को दुश्मन की कार्रवाई में मार गिराया गया। इस विमान में दो अधिकारी—एक पायलट और एक वेपन्स सिस्टम्स ऑफिसर—सवार थे।
दोनों अधिकारियों ने समय रहते इजेक्ट कर अपनी जान बचा ली। पायलट को उसी दिन सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन दूसरा क्रू सदस्य लापता हो गया। यह पिछले दो दशकों में पहली बार था जब दुश्मन की गोलीबारी में किसी अमेरिकी लड़ाकू विमान को गिराया गया।
दुश्मन इलाके में छिपकर जिंदा रहने की जंग
लापता एयरमैन के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—जिंदा रहना और दुश्मन से बचना। रिपोर्ट्स के अनुसार, उसके पास सिर्फ एक हैंडगन थी।
ऐसी परिस्थितियों के लिए अमेरिकी एयरमैन को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें शामिल हैं:
- बीकन सिग्नल का सीमित उपयोग
- ऊंचे और सुरक्षित स्थान की तलाश
- दुश्मन से छिपकर रहना
- रेस्क्यू टीम से संपर्क बनाए रखना
बताया जाता है कि एयरमैन ने खुद को पहाड़ की एक दरार में छिपा लिया था और बीकन का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर किया, ताकि उसका सिग्नल दुश्मन के हाथ न लग जाए।
CIA की भूमिका और भ्रामक रणनीति
इस मिशन में CIA की भूमिका बेहद अहम रही। एजेंसी ने सटीक लोकेशन ट्रैक कर एयरमैन की स्थिति का पता लगाया और यह जानकारी पेंटागन तक पहुंचाई।
इसके अलावा CIA ने एक भ्रामक अभियान भी चलाया। ईरान के अंदर यह खबर फैलाई गई कि लापता एयरमैन पहले ही बचा लिया गया है, जिससे दुश्मन की खोज गतिविधि कमजोर पड़े।
कैसे चला हाई-रिस्क रेस्क्यू ऑपरेशन
रेस्क्यू ऑपरेशन में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज़, लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर शामिल थे। जैसे ही रेस्क्यू टीम एयरमैन की लोकेशन के करीब पहुंची, दुश्मन को दूर रखने के लिए भारी बमबारी और फायरिंग की गई।
इस दौरान कई मुश्किलें भी सामने आईं:
- दो ट्रांसपोर्ट विमान उड़ान नहीं भर सके
- दुश्मन के हाथ लगने से बचाने के लिए उन्हें नष्ट करना पड़ा
- अतिरिक्त विमानों से स्पेशल फोर्सेज़ को भेजा गया
आखिरकार, टीम ने एयरमैन तक पहुंचकर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
ईरान और अमेरिका के दावे आमने-सामने
ईरान की सेना ने दावा किया कि इस ऑपरेशन को नाकाम कर दिया गया और कई अमेरिकी विमान नष्ट कर दिए गए। वहीं अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि मिशन सफल रहा और एयरमैन को इलाज के लिए कुवैत ले जाया गया।
ईरान ने यह भी दावा किया कि Islamic Revolutionary Guard Corps ने एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
क्या कहते हैं सैन्य विशेषज्ञ
पूर्व अमेरिकी कमांडर जनरल फ़्रैंक मैकेंज़ी का कहना है कि ऐसे मिशनों में नुकसान की संभावना हमेशा रहती है। उन्होंने कहा,
“एक विमान बनाना आसान है, लेकिन अपने सैनिकों को कभी पीछे न छोड़ने की परंपरा बनाने में सदियां लगती हैं।”
वहीं रिटायर्ड एडमिरल विलियम फ़ैलन के अनुसार, रात के समय ऑपरेशन करना अमेरिकी सेना की ताकत है, क्योंकि वे ऐसे हालात के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित होते हैं।
रणनीतिक संदेश और भविष्य के संकेत
इस पूरे ऑपरेशन ने एक तरफ अमेरिकी सेना की “नो सोल्जर लेफ्ट बिहाइंड” नीति को मजबूत किया, वहीं दूसरी ओर यह भी दिखाया कि दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर ऑपरेशन करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना ने आधुनिक युद्ध में एयर पावर की सीमाओं को भी उजागर किया है।
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