Voter Registration: चुनाव आयोग ने Form 6 से हटाया SIR Declaration, अब ECINet पर भरना होगा अलग फॉर्म
Voter Registration: Election Commission of India ने नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन से जुड़े Form 6 में बड़ा बदलाव किया है। अब SIR (Special Intensive Revision) से जुड़ा Declaration Form 6 का हिस्सा नहीं होगा। चुनाव आयोग ने इसे अलग फॉर्म के रूप में उपलब्ध करा दिया है। यह बदलाव उन राज्यों में भी लागू किया गया है, जहां SIR की प्रक्रिया अभी जारी है।
भारत में वोटर लिस्ट में नए नाम जुड़वाने के लिए Form 6 का इस्तेमाल किया जाता है। इसी फॉर्म को लेकर पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग के भीतर और कानूनी स्तर पर चर्चा चल रही थी। अब Election Commission ने Form 6 और SIR Declaration को अलग-अलग करने का फैसला लिया है।
The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला 21 अक्टूबर 2026 को लिया गया था और अब इसे ECINet पोर्टल पर लागू कर दिया गया है।
Voter Registration: Form 6 से क्यों हटाया गया SIR Declaration?
दरअसल, SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग ने ऑनलाइन Form 6 में एक अतिरिक्त Declaration जोड़ा था। इसके तहत नए मतदाताओं से पूछा जाता था कि क्या उनका नाम पिछले SIR के दौरान जारी वोटर लिस्ट में था या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम उस सूची में शामिल था। अगर इनमें से किसी का नाम पुरानी वोटर लिस्ट में था, तो आवेदक को उससे जुड़ी जानकारी भी देनी होती थी।
इस अतिरिक्त जानकारी के बिना ऑनलाइन आवेदन आगे नहीं बढ़ पाता था। इसी को लेकर चुनाव आयोग के दो आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि Form 6 एक निर्धारित कानूनी फॉर्म है और इसमें बदलाव करने के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
चुनाव आयोग ने क्यों लिया अलग फॉर्म बनाने का फैसला?
The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग ने 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में बताया कि Form 6 में वास्तव में कोई कानूनी संशोधन नहीं किया गया था।
आयोग ने कहा कि SIR Declaration को ऑनलाइन Form 6 के साथ दिखाने का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाना था। इससे आवेदक को केवल एक OTP और एक ई-सिग्नेचर के जरिए दोनों प्रक्रियाएं पूरी करने की सुविधा मिलती थी। हालांकि, ऑनलाइन पोर्टल पर दोनों को एक साथ दिखाने से ऐसा लग सकता था कि Form 6 में बदलाव कर दिया गया है।
इसी समस्या को देखते हुए 21 अक्टूबर को दोनों को अलग-अलग करने का फैसला लिया गया। अब Form 6 और SIR Declaration अलग दस्तावेजों के रूप में उपलब्ध हैं।
दो चुनाव आयुक्तों ने उठाए थे सवाल
Form 6 में SIR Declaration जोड़ने के फैसले पर चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने पहले ही सवाल उठाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, विवेक जोशी ने 16 मई को इस बदलाव पर आपत्ति दर्ज की थी, जबकि सुखबीर सिंह संधू ने 13 अगस्त को इसे अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए हटाने की बात कही थी।
उनका कहना था कि Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित Form 6 में बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। इस मुद्दे पर विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने पहले कुछ राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म से Declaration हटाया और अब इसे सभी संबंधित राज्यों में अलग दस्तावेज बना दिया है।
SIR Declaration में क्या जानकारी देनी होती है?
SIR Declaration का उद्देश्य नए आवेदक का संबंध पिछली वोटर लिस्ट से जोड़ना है।
इसमें आवेदक को बताना होता है कि:
- क्या उसका अपना नाम पिछली SIR वोटर लिस्ट में शामिल था?
- क्या उसके माता या पिता का नाम पुरानी वोटर लिस्ट में था?
- क्या उसके दादा या दादी का नाम उस सूची में दर्ज था?
- अगर नाम मौजूद था, तो उससे जुड़ी पुरानी वोटर लिस्ट की जानकारी क्या है?
इस जानकारी के आधार पर चुनाव आयोग पुराने चुनावी रिकॉर्ड से आवेदक का विवरण मिलाने की कोशिश करता है। आयोग के अनुसार, सफलतापूर्वक मैपिंग होने पर आवेदक को दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त दस्तावेज देने की जरूरत कम हो सकती है।
क्या नए वोटरों के लिए आसान होगी आवेदन प्रक्रिया?
Form 6 और SIR Declaration को अलग करने का फैसला ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को निर्धारित कानूनी फॉर्म के अनुरूप रखने की दिशा में अहम कदम है। अब दोनों दस्तावेज अलग-अलग उपलब्ध होने से Form 6 की मूल संरचना और SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी के बीच अंतर स्पष्ट रहेगा।
हालांकि, जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया जारी है, वहां संबंधित आवेदकों को SIR के नियमों के अनुसार अलग Declaration भी भरना पड़ सकता है।
चुनाव आयोग के इस फैसले का क्या होगा असर?
इस बदलाव का सबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो नए वोटर के रूप में अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाना चाहते हैं। अब ऑनलाइन आवेदन करते समय Form 6 और SIR Declaration को अलग-अलग दस्तावेजों के रूप में देखा जाएगा। इससे फॉर्म में बदलाव को लेकर चल रहा विवाद भी काफी हद तक स्पष्ट हो गया है।
