Shankaracharya पर Sexual Exploitation Allegations से हिली आस्था, भक्तों के विश्वास पर बड़ा सवाल!
Sexual Exploitation Allegations : प्रयागराज से उठी एक खबर ने देशभर के सनातन समाज को गहरी सोच में डाल दिया है। मामला जुड़ा है ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से। वही धर्मगुरु, जिनके प्रवचन हजारों लोग सुनते हैं, जिनके बताए रास्ते पर अनगिनत श्रद्धालु चल रहे हैं, और जिन्हें कई लोग भगवान के समान पूजते हैं। लेकिन अब उन्हीं के खिलाफ गंभीर आरोपों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—आस्था और सच के बीच की दूरी आखिर कितनी है?
क्या हैं आरोप?
Shankaracharya को लेकर प्रयागराज में आशुतोष ब्रह्मचारी ने प्रेस वार्ता कर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि विदेशों और राजनीतिक दलों से फंडिंग ली जाती है। इसके साथ ही नाबालिग बच्चों के साथ कथित यौन शोषण का मामला भी सामने आया है। कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। मामला पॉक्सो एक्ट समेत कई धाराओं में दर्ज है और पुलिस जांच जारी है।
सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज किए गए हैं। कुछ दावों के प्रारंभिक स्तर पर सही पाए जाने की चर्चा भी है, हालांकि अंतिम सच्चाई पूरी जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके एक शिष्य ने अग्रिम जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।
“सीक्रेट कमरे” और मठ के अंदर की बातें
मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। एक लेखिका ने दावा किया कि मठ के अंदर कुछ “सीक्रेट कमरे” हैं, जहां किसी को जाने की अनुमति नहीं है। यहां तक कि मठ में स्वीमिंग पूल होने की बात भी कही गई। इन दावों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सफाई देते हुए कहा कि मठ में कोई गुप्त कमरा नहीं है। स्वीमिंग पूल उनके गुरु के स्वास्थ्य के लिए बनाया गया था, जो अब इस्तेमाल में नहीं है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कारणों से हर किसी को कैमरे के साथ प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कौन हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जन्म 15 अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। संन्यास लेने से पहले उनका नाम उमाशंकर उपाध्याय था। उन्होंने वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की उपाधि प्राप्त की। वे ज्योतिष पीठ, जोशीमठ के 46वें शंकराचार्य हैं—एक ऐसा पद जिसकी स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी। यह सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि एक परंपरा और आस्था का प्रतीक है।
भक्तों के मन में उठते सवाल
सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ा है जो उन्हें अपना गुरु मानते हैं। जिन्होंने उनके प्रवचनों को जीवन का मार्गदर्शन माना, जिन्होंने उनकी तस्वीर अपने घर के मंदिर में रखी, जिन्होंने उनके शब्दों पर भरोसा किया—उनके मन में आज उथल-पुथल है।
जब किसी धर्मगुरु पर यौन शोषण जैसे आरोप लगते हैं, तो सिर्फ एक व्यक्ति पर सवाल नहीं उठता, बल्कि भक्तों का विश्वास भी डगमगा जाता है। सोचिए, कैसा लगता होगा उन लोगों को, जिन्होंने आंख बंद कर विश्वास किया? शायद उनके मन में यह सवाल उठता होगा—“क्या हमने सही गुरु चुना?” यह पीड़ा शब्दों में बयान करना आसान नहीं है।
धर्म और व्यक्ति का फर्क
यह समझना जरूरी है कि किसी एक व्यक्ति पर लगे आरोप पूरे धर्म पर आरोप नहीं होते। सनातन धर्म हजारों साल पुराना है और उसकी जड़ें गहरी हैं। अगर कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसका अपराध उसी तक सीमित होना चाहिए। लेकिन अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो कानून को अपना काम करना चाहिए—चाहे वह कोई भी हो।
जागरूकता की जरूरत
यह मामला हमें एक बड़ी सीख देता है—आस्था रखें, लेकिन आंख बंद करके नहीं। सवाल पूछना गलत नहीं है। बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले है। अगर कहीं भी शोषण हो रहा है, तो आवाज उठाना जरूरी है।
फिलहाल जांच जारी है और अदालत का फैसला आना बाकी है। सच जो भी हो, सामने आना चाहिए। क्योंकि धर्म का आधार सत्य है, और सत्य से ही न्याय की राह निकलती है।
यह मामला सिर्फ एक विवाद नहीं, बल्कि समाज के लिए एक आईना है। हमें तय करना है कि हम अंधभक्ति में रहेंगे या जागरूक नागरिक बनेंगे। आखिरकार, गुरु वही है जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए—न कि हमें सवालों और संदेह के अंधेरे में छोड़ दे।
यह भी पढ़े
हरियाणा में Shivaji Image Controversy, Washroom Sign पर लगी तस्वीरों से मचा बवाल!




