ऐसे बिल्डरों की अनसोल्ड इन्वेंट्री और अन्य संपत्तियों को जब्त कर नीलामी के जरिए 2000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जाएगी।
ऐसे बिल्डरों की अनसोल्ड इन्वेंट्री और अन्य संपत्तियों को जब्त कर नीलामी के जरिए 2000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जाएगी।
Noida Authority action: नोएडा में लंबे समय से अधूरे पड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट्स और फंसे हुए होम बायर्स को राहत देने के लिए Noida Authority ने बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने उन बिल्डरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिन्होंने बकाया भुगतान को लेकर बनाई गई सिफारिशों को नजरअंदाज किया। अब ऐसे बिल्डरों की अनसोल्ड इन्वेंट्री और अन्य संपत्तियों को जब्त कर नीलामी के जरिए 2000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जाएगी।
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Toggleयह कार्रवाई Amitabh Kant समिति की सिफारिशों के आधार पर की जा रही है। समिति ने बिल्डरों को राहत देते हुए प्रस्ताव दिया था कि वे अपने कुल बकाया का 25 प्रतिशत जमा कर दें, जिससे उनके प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने और रजिस्ट्री शुरू कराने का रास्ता साफ हो सके।
रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा में 57 बिल्डर प्रोजेक्ट्स पर करीब 28,000 करोड़ रुपये का बकाया है। यह रकम न केवल प्राधिकरण के लिए चिंता का विषय है, बल्कि हजारों होम बायर्स के लिए भी बड़ी परेशानी बनी हुई है।
प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, 22 बिल्डरों ने 25 प्रतिशत बकाया जमा कर दिया है और उनके प्रोजेक्ट्स में काम तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, 14 बिल्डरों ने सहमति तो जताई, लेकिन अब तक पैसा जमा नहीं किया।
इसके अलावा, 15 बिल्डरों ने आंशिक भुगतान किया है, जबकि 8 बिल्डरों ने न तो किसी तरह की सहमति दी और न ही कोई भुगतान किया। अब इन 8 बिल्डरों पर सबसे पहले सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पहले चरण में जिन बिल्डरों पर कार्रवाई की जा रही है, उन्हें कुल मिलाकर सिर्फ 251.40 करोड़ रुपये जमा करने थे। अगर वे यह रकम जमा कर देते, तो 533 होम बायर्स की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो जाता।
इतना ही नहीं, अगर ये बिल्डर अपना पूरा बकाया यानी 1171.94 करोड़ रुपये चुका देते, तो करीब 2123 खरीदारों को उनके घरों का मालिकाना हक मिल सकता था। लेकिन ऐसा न होने पर अब प्राधिकरण ने कड़ा रुख अपनाया है।
प्राधिकरण ने जिन प्रमुख बिल्डरों को नोटिस जारी किए हैं, उनमें
IVR Prime,
RG Residency,
Futec Shelter Private Limited,
Gardenia India Limited,
MPG Realty Private Limited,
AGC Realty Private Limited और
Manisha KBI Project Private Limited शामिल हैं।
इन बिल्डरों की अनसोल्ड इन्वेंट्री, जमीन और अन्य संपत्तियों की जांच तेजी से की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द नीलामी प्रक्रिया शुरू की जा सके।
इनमें से कुछ बिल्डरों पर भारी बकाया है। उदाहरण के तौर पर, IVR Prime पर करीब 659.92 करोड़ रुपये और RG Residency पर करीब 170 करोड़ रुपये का बकाया है। अन्य बिल्डरों पर भी 20 करोड़ से लेकर 115 करोड़ रुपये तक की देनदारी है।
प्राधिकरण का कहना है कि सभी डिफॉल्टर बिल्डरों को अंतिम नोटिस जारी किया जा चुका है और यदि वे जल्द भुगतान नहीं करते हैं, तो उनकी संपत्तियों की नीलामी तय है।
इस कार्रवाई का सबसे बड़ा फायदा उन हजारों होम बायर्स को मिलेगा, जो सालों से अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं। नीलामी से मिलने वाली राशि से प्रोजेक्ट्स को पूरा करने और रजिस्ट्री शुरू कराने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही बढ़ेगी और भविष्य में बिल्डरों की लापरवाही पर अंकुश लगेगा।
नोएडा अथॉरिटी की यह कार्रवाई पूरे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक सख्त संदेश मानी जा रही है। इससे यह साफ हो गया है कि अब बकाया भुगतान और प्रोजेक्ट में देरी को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
प्राधिकरण का उद्देश्य न केवल राजस्व वसूली करना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आम लोगों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे और उन्हें समय पर उनका घर मिल सके।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कितने बिल्डर इस दबाव के बाद भुगतान करते हैं और कितनों की संपत्तियां नीलामी तक पहुंचती हैं।
