BRICS Summit 2026 Delhi में 12-13 सितम्बर को शिखर सम्मेलन, मोदी-पुतीन-जिनपिंग की मुलाकात पर सबकी नज़र
BRICS Summit 2026: राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 आयोजित होगा। इस सम्मेलन की अध्यक्षता भारत के पास है, इसलिए कार्यक्रम की थीम भी भारत ने ही तय की है। इस बार सम्मेलन की थीम है- बिल्डिंग फॉर रेजिलियंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी। इसका मतलब है कि सम्मेलन में देशों के बीच लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता बढ़ाने पर चर्चा होगी।
क्या है ब्रिक्स और कैसे हुआ इसका गठन
ब्रिक्स की शुरुआत 2009 में हुई थी। शुरुआत में इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे और इसे ब्रिक कहा जाता था। 2010 में दक्षिण अफ्रीका को इसमें शामिल करने का फैसला हुआ और 2011 में चीन के सान्या शहर में हुए शिखर सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका पहली बार सदस्य के रूप में शामिल हुआ। इसके बाद समूह का नाम ब्रिक्स हो गया।
2024 में ब्रिक्स का और विस्तार हुआ। इस साल मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी इसके सदस्य बने। एक साल बाद 2025 में इंडोनेशिया भी ब्रिक्स में शामिल हो गया। अब ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया, यानी कुल 11 पूर्ण सदस्य देश हैं। इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को साझेदार देश का दर्जा दिया गया है। यह व्यवस्था 2024 के कजान शिखर सम्मेलन में बनाई गई थी।
भारत के लिए ब्रिक्स क्यों अहम है
पिछले कुछ वर्षों में ब्रिक्स एक आर्थिक समूह से आगे बढ़कर एक बड़ा मंच बन गया है। इस मंच से दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व होता है। इसे विकासशील देशों की आवाज माना जाता है और भारत को वैश्विक दक्षिण का बड़ा पक्षकार माना जाता है।
भारत के लिए ब्रिक्स रूस और अपने पड़ोसी चीन से जुड़े रहने का भी एक अहम मंच है, जबकि भारत अमेरिका, यूरोप, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी रिश्ते मजबूत करता रहा है। इसके साथ ही ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग भी उठाता रहा है। भारत भी लंबे समय से इन संस्थाओं में सुधार का समर्थन करता रहा है।
पुतिन का दूसरा दौरा, जिनपिंग की वापसी की उम्मीद
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आएंगे। एक साल के भीतर यह उनकी दूसरी भारत यात्रा होगी। इससे पहले दिसंबर 2025 में पुतिन वार्षिक द्विपक्षीय सम्मेलन के लिए दिल्ली आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में हुए एससीओ सम्मेलन के दौरान पुतिन को निजी तौर पर ब्रिक्स सम्मेलन के लिए न्योता दिया था। 11 सितंबर को पुतिन और मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी सम्मेलन में आने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि चीन की तरफ से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अगर वे आते हैं तो यह 2019 के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। इससे पहले वे मामल्लपुरम में हुए एक अनौपचारिक सम्मेलन में भारत आए थे। अगर शी जिनपिंग भारत आते हैं तो उनकी और पीएम मोदी की द्विपक्षीय वार्ता भी तय मानी जा रही है।
इन नेताओं के भी आने की संभावना
इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद, बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम जोमार्त तोकाएव, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्णविराकुल के भी सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस के आने की भी चर्चा है, लेकिन इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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